हाल में लखनऊ शहर के पुराने इलाकों में मैं गई थी चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं का रूख परखने, लेकिन इस बहाने उन इमारतों और गलियों को भी देख आई, जो बचपन में छूट गईं। मेरी पढ़ाई उत्तर प्रदेश में हुई थी, सो उन दिनों अक्सर लखनऊ जाना होता था, पर उसके बाद जब भी इस शहर में आई हूं, तो किसी चुनाव के सिलसिले में या किसी अन्य राजनीतिक घटना को लेकर। सो दशकों बाद इस बार इमामबाड़ों को देखने और गलियों में घूमने का मौका मिला। नवाबों के जमाने की ये इमारतें उतनी ही आलीशान हैं, जितनी पहले थीं। पर दशकों की लापरवाही के कारण लखनऊ का यह सबसे सुंदर हिस्सा दिन-ब-दिन तबाह हो रहा है। यह बात जब मैंने वहां एक व्यक्ति से कही, तो उसने कहा, कुछ साल पहले इन इमारतों का हाल और भी बदतर था। अखिलेश यादव ने यहां बहुत काम किया है, इसलिए अब थोड़ी बहुत मरम्म्त हुई है।
लेकिन यह काफी नहीं है। मुख्यमंत्री ने अगर पर्यटन को अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का जरिया माना होता, तो लखनऊ के इस हिस्से में स्वच्छ भारत का असर दिखता। इस इलाके के बाजारों-गलियों में बहुत गंदगी है। पास में इस शहर के मशूहर टुंडे कबाब वाले की पहली दुकान है, लेकिन गली में इतनी गंदगी थी कि खाने का मन नहीं हुआ। फिर हम इदरिस बिरियानी वाले की मशहूर दुकान में पहुंचे, तो देखा कि एक तरफ सुंदर फूलों की दुकानें सजी थीं, जिनके बिल्कुल सामने सड़ते कूड़े का ढेर था।
उत्तर प्रदेश की गिनती देश के सबसे गरीब राज्यों में होती है। अगर उत्तर प्रदेश की सरकारों ने पर्यटन पर ध्यान दिया होता, तो संभव है, इसकी गिनती सबसे संपन्न राज्यों में होती।
अगर लखनऊ का हाल बुरा है, तो आगरा का हाल उससे भी बदतर है। ताजमहल जैसे एक व्यापक कूड़ेदान में चमकते हीरे-सा लगता है। उसके आसपास के बाजार इतने गंदे और बदहाल हैं कि ऐसा लगता है, शाहजहां के बाद किसी ने इनकी परवाह ही नहीं की। आगरा के ऐतिहासिक लाल किले की पास की झील काई और गंदगी से भरी है। मैं सड़क के रास्ते दिल्ली लौटी, ताकि अखिलेश यादव का नया लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे देख सकूं। उससे गुजरते हुए ऐसा लगा, जैसे मैं किसी विकसित देश में पहुंच गई हूं, पर एक्सप्रेस-वे के खत्म होते ही दिखे वही शर्मनाक नजारे। फिरोजाबाद का हाल इतना बुरा है कि उसे देख मुझे रोना आया। कुछ दशक पहले हम यहां चूड़ियां खरीदने आया करते थे। उस समय यह शहर इतना सुंदर था कि लगता था, जैसे इसे किसी ने रंगीन चूड़ियों से बनाया हो। अब फिरोजाबाद एक विशाल झुग्गी बस्ती की तरह दिखता है।
उत्तर प्रदेश की सरकारों ने पर्यटन पर ध्यान दिया होता, पर्यटन को अर्थव्यवस्था का साधन बनाया होता, तो शायद उत्तर प्रदेश से गरीबी हट गई होती और आम लोगों के लिए उपलब्ध होतीं वे तमाम सुविधाएं, जो पर्यटकओं को आकर्षित करने के लिए जरूरी होती हैं-जैसे, आधुनिक सड़कें, भरोसेमंद बिजली, स्वच्छ पानी और सुंदर शहर। अखिलेश यादव नौजवान होने के बावजूद विकास के बारे में पुरानी सोच रखते हैं, सो इनके इस दौर में खैरात पर ज्यादा ध्यान दिया गया है, असली विकास पर कम। इन्होंने गांव-गांव में लैपटॉप बांटे हैं, लेकिन बिजली तो अपनी मर्जी से जाती है। अब अखिलेश कह रहे हैं कि जनता उन्हें दोबारा मौका देती है, तो वह घर-घर में स्मार्टफोन पहुंचा देंगे। फिर वही खैरात बांटने के बारे में वह सोच रहे हैं। उत्तर प्रदेश बदकिस्मत है।