लेख की शुरुआत में ही मैं यह स्वीकार करती हूं कि मुझे बिल्कुल जानकारी नहीं थी कि नरेंद्र मोदी की जीत इस बार इतनी बड़ी होगी कि ऐतिहासिक मानी जाएगी। ऐसा नहीं है कि जनता की आवाज सुनने के लिए मैंने दिल से प्रयास नहीं किया था। चुनाव अभियान शुरू होने और उसके दौरान भी मैं राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में घूम रही थी। उस दौरान मैंने गांवों में जाकर आम मतदाताओं से बातें कीं और यह भी देखने का प्रयास किया कि मोदी की गरीबी हटाओ योजनाएं कितनी सफल रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के इन दौरों पर मैंने करीब सौ-सवा सौ लोगों से चुनावों के बारे में बातें की होंगी। इसके बावजूद, कि अधिकतर लोगों ने कहा कि उनका वोट मोदी को जाएगा, मुझे उस सुनामी का जरा भी पता नहीं लगा, जो पिछले बृहस्पतिवार को देश भर में आई और अपने साथ विपक्ष के उन तमाम राजनेताओं को बहा ले गई, जो कल तक प्रधानमंत्री बनने के सपने देख रहे थे।