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दूसरा पहलू: ताजमहल में लॉर्ड कर्जन की वो बेमिसाल निशानी, एक ख्वाहिश की अनूठी कहानी

भूपेंद्र कुमार Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 07 Aug 2025 07:13 AM IST

सार

अंग्रेज वायसराय ने अपने नाम का लिखा लैंप 16 फरवरी, 1908 को आगरा के ताजमहल में स्थापित करवाया था। 1904 में लंदन जाते हुए कर्जन मिस्र में रुके और ठीक वैसा लैंप तैयार कराया, जो सुल्तान बैबर के मकबरे पर टंगा था।
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ताजमहल में लॉर्ड कर्जन का लैंप - फोटो : अमर उजाला प्रिंट


1857 के स्वाधीनता संग्राम में ताजमहल को खासा नुकसान पहुंचा था। कर्जन के मन में आया अगर वह वास्तुकला के इस नायाब नमूने को संरक्षित करने में अपना योगदान देंगे, तो तारीख उन्हें याद रखेगी। उन्होंने वर्ष 1900 से 1905 तक ताजमहल में बहुत काम कराया। कर्जन ने जीर्णोद्धार के इस काम पर लगभग 50 हजार पौंड (60 लाख रुपये) की रकम खर्च की। कर्जन जब पहली बार ताजमहल गए, तो खादिमों ने उन्हें अंधेरे में धुआं उगलती लालटेन से शाही कब्रें दिखाईं। उनके मन में वहीं से एक ऐसा लैंप तैयार करने का विचार आया, जो नायाब हो। इसके लिए उन्होंने 13वीं से 16वीं सदी तक मिस्र पर राज करने वाले मामलुक वंश के मकबरों पर लगे लैंप के डिजाइन को अपनाने के लिए सोचा। उन्होंने वहां के ब्रिटिश काउंसल जनरल लॉर्ड क्रामर से बात की। फिर उन्हें बचपन में पढ़ी अरेबियन नाइट्स यानी किस्सा हजार रातें पुस्तक का ध्यान आया। उन्हें लगा कि डिजाइन किसी प्राचीन मुल्क से लिया जाए। लॉर्ड कर्जन की आत्मकथा में अर्ल ऑफ रोनाल्डशे ने लिखा है कि 1904 में लंदन जाते हुए कर्जन मिस्र में रुके और ठीक वैसा लैंप तैयार कराया, जो सुल्तान बैबर (13वीं सदी में मिस्र के शासक) के मकबरे पर टंगा था।  


काहिरा में अरब म्यूजियम के निदेशक हर्ज बे और कलाकार टाडरिस बादिर की मदद से सोने और चांदी से बने लैंप को बनाने में दो साल लगे। इस पर फारसी में लिखा गया, मुमताज महल के मकबरे को लॉर्ड कर्जन की भेंट-1906। 16 फरवरी, 1908 को इसे ताजमहल में स्थापित किया गया। इतिहासकारों के अनुसार ताजमहल में शाहजहां ने भी एक लैंप लगवाया था, पर इसके बारे में ज्यादा जानकारी किसी को नहीं है। ऐसा ही एक लैंप ताजमहल के रॉयल गेट पर है, जो वर्ष 2015 में गिर गया था, पर उसे दोबारा स्थापित किया गया। कुछ छोटे लैंप फतेहपुर सीकरी में भी लगाए गए, लेकिन ताजमहल के अंदर वाले लैंप की बात ही अलग थी, आखिर वह सबसे नायाब जो था।

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