चुनाव पास आ रहा है, सो फिर सोनिया गांधी के दामाद याद आए। पिछले चुनाव में दामाद साहिब की खूब चर्चा रही थी, पर नरेंद्र मोदी की सरकार बनते ही रॉबर्ट वाड्रा का नाम सब भूल गए। अचानक जो याद आ गए हैं, तो लोगों को शक क्यों न होने लगे कि उनसे पूछताछ केंद्र सरकार की जांच संस्थाएं राजनीतिक दृष्टि से कर रही हैं, आर्थिक घोटालों की दृष्टि से नहीं। ऐसा न होता, तो चार वर्ष में प्रियंका के पतिदेव पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई और तभी क्यों होने लगी है, जब प्रियंका ने सक्रिय राजनीति में कदम रखने का निर्णय लिया है?
जांच पूरी होने से पहले ही भाजपा के प्रवक्ता टीवी पर उछल-उछल कर रॉबर्ट वाड्रा को अपराधी कहने लगे हैं। सो शक गहरा जाता है कि सिर्फ प्रियंका की छवि बिगाड़ने के मकसद से पिछले सप्ताह उनको प्रवतन निदेशालय में बुलाया गया। माना कि सोनिया गांधी के दामाद पहले से बदनाम हैं। माना कि सोनिया-मनमोहन के दौर में उनकी स्काईलायट कंपनी ने कुछ उद्योगपतियों की मेहरबानी से काफी पैसा बनाया।
यह भी माना कि वाड्रा ने हरियाणा और राजस्थान में अपने राजनीतिक बल का सहारा लेकर किसानों की जमीनें कौड़ियों के दाम खरीदी थीं। इन चीजों को लेकर पहले उनसे पूछताछ शुरू नहीं हुई। अब पूछताछ हो रही है, तो उनकी विदेशों में तथाकथित अवैध संपत्ति को लेकर। प्रवर्तन निदेशालय के जासूस मानते हैं कि हथियारों के दलाल संजय भंडारी का लंदन स्थित आलीशान घर वास्तव में वाड्रा का है। ऐसा है, तो अदालत में मुकदमा दायर करो। वाड्रा से घंटों पूछताछ करने की क्या आवश्यकता है? ऐसा करने से लगा है कि बात कुछ और है। प्रियंका अपने पति को छोड़ने ईडी के दफ्तर गईं। सो सोशल मीडिया के मुताबिक, उनके लिए सहानभूति पैदा हुई है।
रही बात विदेशों में संपत्ति होने की, तो इसे साबित करना आसान नहीं है। कई भारतीय राजनेता हैं, जिनकी विदेशों में करोड़ों की संपत्ति है। जिस काले धन को नरेंद्र मोदी खोज रहे हैं, उसे छिपाने में हमारे जनप्रतिनिधि इतने माहिर हैं कि उसको ढूंढ निकालना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। वह जमाना गया, जब हमारे राजनेता चोरी का माल स्विस बैंक खातों में रखा करते थे। अब उसे विदेशों में इतना छिपाकर रखते हैं कि यह साबित करना असंभव है कि कहां है और किसका है।
सो अचानक इस तरह प्रियंका के पतिदेव के पीछे हाथ धोकर पड़ना उनका नुकसान कम करेगा और मोदी सरकार का ज्यादा। वैसे भी इन दिनों दिल्ली में चर्चा गर्म है कि मोदी हाल में हुए सर्वेक्षण देखकर डर गए हैं। इसलिए कि आज तक हुआ एक भी सर्वेक्षण उनको पूर्ण बहुमत नहीं देता है। सब में सहमति है कि आने वाले चुनाव के बाद भाजपा बेशक सबसे बड़ी पार्टी बनकर आएगी, पर पूर्ण बहुमत से दूर रहेगी। सो अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा, कहना मुश्किल है।
इस दौड़ में नरेंद्र मोदी आगे हैं, लेकिन अगर जनता को लगने लगेगा कि वह घबड़ा कर सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग कर अपने प्रतिद्वंद्वियों को भ्रष्ट साबित करने का प्रयास कर रहे हैं, तो निजी तौर पर उनका नुकसान होगा। वैसे भी आजकल जो भाषा उनके प्रवक्ताओं के मुंह से निकलती है, वह उन्हें शोभा नहीं देती। राहुल गांधी और उनके जीजा जी को अभी से अपराधी कहना गलत है। अपराधी कोई तभी बनता है, जब उस पर कोई अपराध साबित होता है। ऐसा न अभी हुआ है और न ही अगले चुनाव से पहले आसानी से होने वाला है।
सो अच्छा होगा कि चुनाव से पहले राजनीतिक मुद्दे उठाए जाएं।