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फिर ढहा पुल: गुजरात में वडोदरा का हादसा सुरक्षा और रखरखाव की स्थिति पर गंभीर सवाल, सच्ची श्रद्धांजलि तभी जब...

अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 11 Jul 2025 07:15 AM IST

सार

गुजरात के वडोदरा में महिसागर नदी पर बने गंभीरा पुल हादसे में 18 लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोग घायल हैं। इस हादसे के बाद सुरक्षा और रखरखाव की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।
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वडोदरा पुल हादसा - फोटो : PTI


जाहिर है कि यह हादसा, जिसने कई जानें भी निगल लीं, किसी प्राकृतिक आपदा का नतीजा नहीं, बल्कि मानवीय लापरवाही, प्रशासनिक उदासीनता और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता के अभाव का दुखद प्रमाण है। जिस समय यह पुल टूटा, उस वक्त लोग इस पर से गुजर रहे थे। गनीमत तो यह रही कि नदी में पानी कम था, अन्यथा स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। दरअसल, यह हादसा महज संरचनात्मक विफलता नहीं है; यह हमारी प्रणाली की उस कमी को उजागर करता है, जो बार-बार ऐसे हादसों को जन्म देती है।


गौरतलब है कि 2022 में गुजरात के ही मोरबी में एक केबल सस्पेंशन ब्रिज के ढहने से 130 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। सवाल यह है कि उस हादसे से क्या कोई सबक सीखा गया? ताजा हादसा इस सवाल को और गहरा करता है। विकास हो रहा है, बड़े-बड़े काम भी हो रहे हैं, लेकिन छोटे कामों में जिन बारीकियों की और जिस फॉलो-अप व्यवस्था की जरूरत होती है, उनकी अनदेखी हो रही है, तो इसमें दोष व्यवस्था का ही है।


और, यह केवल गुजरात की समस्या नहीं है; यह पूरे देश के लिए एक चेतावनी है। यह हादसा सबक देता है कि पुराने ढांचों की नियमित और गहन जांच जरूरी है। यही नहीं, भ्रष्टाचार और लापरवाही को रोकने के लिए कड़े नियम और उन्हें सख्ती से लागू करने की भी जरूरत है। जांच का आश्वासन तो दिया गया है, लेकिन यह महज औपचारिकता नहीं होनी चाहिए; इसके नतीजों को सार्वजनिक करना और दोषियों को दंड देना भी जरूरी है।


हर बार जब कोई पुल ढहता है, या कोई इमारत गिरती है, तो हम जिंदगियों के खोने के साथ लोगों का भरोसा भी खोते हैं। पुल हादसे में जो जिंदगियां खोई हैं, उनको सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।

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