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आर्थिकी: टैरिफ वार से भले ही बढ़ी है मंदी की आशंका, लेकिन एक्सपीरियंस इकनॉमी बना रही कारोबार के नए ट्रेंड

डॉ. संजय वर्मा Published by: शिव शुक्ला Updated Fri, 28 Mar 2025 07:27 AM IST

सार

अमेरिकी टैरिफ वार से भले ही मंदी की आशंका बढ़ी है, लेकिन एक्सपीरियंस इकनॉमी कारोबार के नए ट्रेंड को बढ़ावा दे रही है।
 
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शादी(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला


ये काम-धंधे कैसे हैं, इनकी एक झलक हाल में प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में दिखाई दी, जहां लाखों युवा आध्यात्मिकता की परिभाषा तलाशते नजर आए। वहीं, एक सिरा एड शीरन के म्यूजिक कॉन्सर्ट और कोल्डप्ले में दिखा। आज आप युवाओं को महंगे स्मार्टफोन खरीदने से नहीं रोक सकते। उन्हें ऋषिकेश में  रिवर राफ्टिंग या बंजी जंपिंग करने या फिर पांच सितारा होटल में होली पार्टी में एक ही दिन में हजारों रुपये फूंक देने में कोई गुरेज नहीं है। युवा अपनी शादी में प्री-वेडिंग शूट, शादी की इंस्टाग्राम अथवा किसी फिल्म सरीखी शूटिंग और यहां तक कि डेस्टिनेशन वेडिंग पर बढ़-चढ़कर खर्च करने को आमादा हैं। भले ही उन्हें इसके लिए कर्ज क्यों न लेना पड़े।


अनुभवों की यह पोटली सिर्फ नजदीकी थिएटर में फिल्म देखने या छुट्टी मनाने तक सीमित नहीं है। स्टैंडअप कॉमेडी शो देखने, शहर की सैर करने, स्पा रिट्रीट लेने से लेकर रेस्टोरेंट में भोजन के अनुभव हासिल करने से जुड़ी चीजों ने देश में एक ऐसा बड़ा बाजार पैदा किया है। युवाओं का तर्क है कि यह मामला पैसे नहीं, उनके अनुभव के बारे में है, जिसका मौका शायद उन्हें जिंदगी में दोबारा न मिले। कोविड महामारी के बाद अतिशय पर्यटन, शादियों में दिखावा आदि के अनूठे आयोजनों में युवाओं की बढ़-चढ़कर शिरकत ने एक नए शब्द-एक्सपीरियंस इकनॉमी (अनुभव आधारित अर्थव्यवस्था) को जन्म दिया है।


मिसाल के तौर पर शादियों को किसी फिल्मी कहानी के किस्सों में पिरोने और वैसे ही फिल्मांकन ने प्री-वेडिंग शूट से नए किस्म का बिजनेस मॉडल पैदा किया है। इसमें स्क्रिप्ट राइटर से लेकर कैमरामैन और एडिटर मोटा पैसा बना रहे हैं। युवा लाइव कार्यक्रमों में खर्च करने से भी गुरेज नहीं कर रहे। जनवरी से मार्च के बीच ब्रिटिश संगीतकार एड शीरन के पुणे, शिलांग और दिल्ली-एनसीआर में आयोजित कॉन्सर्ट में बेहद महंगे टिकटों के बावजूद भारी भीड़ रही। युवाओं ने एक अन्य रॉक बैंड-कोल्डप्ले के कॉन्सर्ट में इतनी दिलचस्पी ली कि इसके आयोजकों ने सैकड़ों करोड़ कमा डाले। ऐसे आयोजनों की बुकिंग करने वाले एक मंच बुकमायशो.कॉम ने 2024 में लाइव संगीत के टिकटों की बिक्री में 18 फीसदी बढ़ोतरी की। जनवरी में कोल्डप्ले के चार दिवसीय मुंबई आयोजन बताते हैं कि भारतीय संगीत के इतिहास में कमाई का नया रिकॉर्ड बन गया, क्योंकि इन कार्यक्रमों के करीब डेढ़ लाख टिकट बेचे गए थे।


वैश्विक बाजार अनुसंधान कंपनी स्टेटिस्टा के अनुसार, 2021 में भारतीय संगीत उद्योग की कीमत 19 अरब रुपये थी, जिसके 2026 में 37 अरब रुपये तक होने की उम्मीद है। ऐसे ही, प्रयागराज महाकुंभ में करीब 67 करोड़ लोग पहुंचे, उनमें 18-35 साल के युवाओं की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत तक रही। गोविंद बल्लभ पंत सोशल साइंस इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. बद्री नारायण व एसोसिएट प्रोफेसर अर्चना सिंह के नेतृत्व में 17 सदस्यीय टीम ने महाकुंभ से जुड़े जो आंकड़े जुटाए हैं, उनका शुरुआती आकलन बताता है कि इस आयोजन में हिस्सा लेने पहुंचे 40 फीसदी युवाओं का मकसद एक बड़े धार्मिक आयोजन के आध्यात्मिक पहलुओं का अनुभव करना था।


एक्सपीरियंस इकनॉमी के बढ़ने के कुछ सांख्यिकीय कारण भी हैं। भारत की 1.42 अरब की आबादी का ज्यादा बड़ा हिस्सा युवाओं का है। मनोरंजन, संगीत और शादियों के आयोजन के उद्योग से जुड़े लोग इसका फायदा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। इस नए ट्रेंड में सोशल मीडिया की भी बड़ी भूमिका है। युवा अपनी यात्राओं, लाइव संगीत आयोजनों, दावतों और शादियों के अनुभव सोशल मीडिया पर ऑनलाइन साझा करना चाहते हैं, ताकि वे परिचितों में कुछ अटेंशन पा सकें। नई उभरती अर्थव्यवस्था के तीन महत्वपूर्ण तत्व हैं-युवा उपभोक्ता वर्ग का उभार, तकनीक-प्रौद्योगिकी की भूमिका और नए कारोबार के विचार खोज रहे लोग-जिनमें ज्यादातर ऐसे युवा शामिल हैं, जो नौकरी के बजाय कोई स्टार्टअप चलाना ज्यादा पसंद करते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी चीजें विशाल युवा आबादी की आकांक्षाओं के डाटा का विश्लेषण करके इस उद्योग में क्रांति ला रही हैं। कारोबारी ट्रेंड पर नजर रखने वाली एजेंसी मैकिंसे एंड कंपनी के अध्ययन के मुताबिक, युवाओं की खोजी यात्राओं पर होने वाला खर्च 1960 के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर है।

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