विगत चार वर्षों में पहली बार फेडरल रिजर्व ने हाल ही में नीतिगत दरों में 50 आधार अंकों की कटौती की, जिसके बाद दुनिया के दूसरे केंद्रीय बैंकों द्वारा भी नीतिगत दरों में कटौती की संभावना बढ़ गई है। फेडरल रिजर्व के ताजा निर्णय के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार में ज्यादा निवेश किया है। दरअसल, डॉलर के कमजोर पड़ने, उधारी दर में कमी आने, निवेश व कारोबारों में तेजी आने आदि की संभावना बढ़ी है, जिसकी पुष्टि निवेश में तेजी से हो रही है।
चीन फिलहाल सुशासन की समस्या से जूझ रहा है, जिसके कारण विदेशी निवेशक वहां निवेश करने से परहेज कर रहे हैं और कुछ निवेशक भारत का रुख कर रहे हैं। अमेरिका की तरह चीन में भी उत्पादन, खपत आदि मापदंडों की वृद्धि अपेक्षा से अधिक धीमी है। अगस्त महीने में बेरोजगारी दर छह महीनों के उच्चतम स्तर 5.3 प्रतिशत पर पहुंच गई और शहरी बेरोजगारी दर जुलाई में 17.1 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई, जो जून में 13 प्रतिशत थी। विकास दर में तेजी लाने के लिए चीन के केंद्रीय बैंक ने उधारी दरों में कटौती की है, ताकि उधारी में उठाव आए और आर्थिक गतिविधियों में तेजी।
सवाल उठता है कि क्या फेडरल रिजर्व की तर्ज पर आगामी मौद्रिक समीक्षाओं में भारतीय रिजर्व बैंक रेपो दर में कटौती करेगा, क्योंकि महंगाई और विकास के बीच तालमेल बनाए रखने के लिए फरवरी, 2023 के बाद से रिजर्व बैंक ने रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया है और यह 6.5 प्रतिशत पर बरकरार है। रिजर्व बैंक को रेपो दर में कटौती करने से पहले मौजूदा आर्थिक स्थिति, जीडीपी वृद्धि दर, महंगाई की स्थिति, आर्थिक गतिविधियों की गति आदि पर गहन विमर्श करना होगा।
भारत में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े निरंतर बेहतर हो रहे हैं। वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कैलेंडर वर्ष 2024 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि अनुमान को बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि, मूडीज ने 2025 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि अनुमान को 6.5 प्रतिशत पर यथावत रखा है, लेकिन 2026 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान 6.6 प्रतिशत जताया है। ये आंकड़े विश्व के कई विकसित देशों से बेहतर हैं।
खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई और अगस्त महीने में चार प्रतिशत से नीचे रही है और बारिश के खत्म होने के बाद खाद्य पदार्थों की कीमतों में कमी आने का अनुमान है, जिससे आगामी महीनों में खुदरा मुद्रास्फीति में और भी कमी आने के कयास लगाए जा रहे हैं। मूडीज ने 2025 और 2026 में भारत में मुद्रास्फीति का अनुमान 4.5 प्रतिशत और 4.1 प्रतिशत जताया है। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार भी वित्त वर्ष 2025 में मुद्रास्फीति घटकर 4.5 प्रतिशत रह सकती है।
एचएसबीसी विनिर्माण पीएमआई सितंबर 2024 में घटकर 56.7 रह गया, जो अगस्त महीने में 57.5 रहा था। सेवा पीएमआई भी सितंबर महीने में घटकर 58.9 प्रतिशत रह गया, जो अगस्त महीने में 60.9 रहा था। बेशक, विनिर्माण और सेवा पीएमआई में अगस्त महीने के मुकाबले सितंबर महीने में आंशिक गिरावट दर्ज की गई है। फिर भी, यह अभी 50 से ऊपर है, जो दर्शाता है कि विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में तेजी का रुख बना हुआ है।
रेपो दर फरवरी 2023 से 6.5 प्रतिशत के स्तर पर कायम है। फिर भी, उधारी के उठाव में तेजी बनी हुई है। दिसंबर, 2023 की तुलना में ऋण उठाव में 5.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई और 9 अगस्त 2024 को समाप्त पखवाड़े के लिए क्रमिक रूप से 0.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। निरपेक्ष रूप से, पिछले आठ महीनों में, ऋण उठाव 9.2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 9 अगस्त, 2024 तक 168.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह एक अच्छा संकेत है। अगर रेपो दर में कटौती की जाती है, तो उधारी के उठाव एवं विकास की गति में और भी तेजी आएगी।
फिलहाल हमारे देश में जीडीपी में वृद्धि हो रही है और महंगाई भी काबू में है। साथ में, वित्त वर्ष 2025 और 2026 में भी खुदरा मुद्रास्फीति के रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित सहनशीलता सीमा के अंदर रहने के आसार हैं। पुनश्च: डॉलर के कमजोर रहने और निवेश व ऋण उठाव में तेजी आने से आर्थिक गतिविधियों में तेजी आ रही है, जिसे और बढ़ाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक अगली मौद्रिक समीक्षा बैठक में रेपो दर में कम से कम 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है।