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Budget 2026: विवेक, विकास और समावेशन का संतुलन, भविष्य के विजन पर फोकस

अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 02 Feb 2026 04:17 AM IST
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निर्मला सीतारमण - फोटो : PTI
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत इस लगातार नौवें बजट की खासियत यह है कि इसमें लोकलुभावन किस्म की चमत्कारिक घोषणाएं भले न हों, लेकिन राजकोषीय विवेक, विकास और समावेशन के बीच संतुलन जरूर दिखता है, जिसमें भविष्य के विजन को तात्कालिक फायदों पर तरजीह दी गई है। इसकी पुष्टि वित्त मंत्री द्वारा उल्लिखित तीन कर्तव्यों से भी होती है-आर्थिक विकास को तेज करना, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और सबका साथ, सबका विकास के तहत हर वर्ग, क्षेत्र और समुदाय को अवसर देना।


ये तीनों ही कर्तव्य 2047 तक विकसित भारत के संकल्प से भी जुड़े हैं। राजकोषीय योजना की दृष्टि से देखें, तो वित्त वर्ष 2026-27 के लिए घाटे का लक्ष्य जीडीपी के 4.4 फीसदी पर रखा गया था, जिसे कम करते हुए तीन फीसदी के आदर्श स्तर पर लाया जाना था। अपने लक्ष्य पर कायम रहते हुए इस वर्ष भी घाटा पिछले वर्ष की तुलना में कुछ कम यानी 4.3 फीसदी पर रखा गया है। करों की बात करें, तो जैसी कि उम्मीद थी, आयकर ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया गया है, क्योंकि पिछले वर्ष के बजट में काफी लाभ पहले ही दिए जा चुके हैं।


बजट में पूंजीगत व्यय पर खास ध्यान देते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इसे बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है, जो पिछले अनुमानों से करीब नौ फीसदी अधिक है। यह निवेश बुनियादी संरचना, विनिर्माण और ऊर्जा सुरक्षा पर केंद्रित है। सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और नए राष्ट्रीय जल मार्ग देश में कनेक्टिविटी को अलग स्तर पर ले जाएंगे। इसके अतिरिक्त, ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपने इस पहले बजट में वित्त मंत्री ने भू-राजनीतिक चुनौतियों की बात करते हुए कुल रक्षा बजट में 15 फीसदी की बढ़ोतरी की है, जो तार्किक भी लगता है।


सब्सिडी के मामले में सतर्कता बरतते हुए उर्वरक सब्सिडी में करीब 15 हजार करोड़ रुपये की कमी की गई है, हालांकि भारी-भरकम खाद्य सब्सिडी अब भी जारी रहेगी। लघु व मध्यम उद्यमों के लिए दस हजार करोड़ रुपये के एसएमई विकास कोष की घोषणा स्वागतयोग्य है, क्योंकि यह क्षेत्र टैरिफ से सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस वर्ष तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, असम और पुदुचेरी में चुनाव होने हैं, ऐसे में इस वर्ष चुनावी बजट की उम्मीदें थीं, लेकिन ऐसी किसी घोषणा के स्थान पर बजट में एक तरह का संतुलन दिखता है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में वांछित भी है।

 
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