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चीन को खुश करने की कोशिश महंगी पड़ेगी

Fri, 22 Jan 2016 08:43 PM IST
कुलदीप तलवार
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इस्लामाबाद ने इन दिनों पाक अधिकृत कश्मीर के उत्तरी क्षेत्र गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान में शामिल करके उसे देश का पांचवां प्रांत बनाने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। पाक अधिकृत कश्मीर की सरकार ने इस कदम का सिर्फ विरोध ही नहीं किया है, बल्कि इस्लामाबाद को चेतावनी भी दी है।
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दरअसल पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कुछ अरसा पहले इस संदर्भ में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की थी। इस समिति के सदस्य और गिलगित-बाल्टिस्तान के मुख्यमंत्री हाफिज-उर-रहमान का कहना है कि पाक के संविधान में गिलगित-बाल्टिस्तान के नाम का उल्लेख होने के बाद उसके दो प्रतिनिधियों को संघीय संसद में जगह दी जाएगी। अभी तक पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान सहित समूचे पाक अधिकृत कश्मीर को विवादित क्षेत्र मानता है और उसके संविधान में इसका कोई जिक्र नहीं है।

दरअसल इस्लामाबाद यह कदम चीन के दबाव में उठा रहा है। कुछ अरसा पहले इस्लामाबाद ने चीन के साथ 46 अरब डॉलर की लागत से पाक में आर्थिक गलियारा बनाने का करार किया था। इसके तहत पाक बलूचिस्तान स्थित ग्वादर बंदरगाह को रेल, सड़क और पाइपलाइन द्वारा जोड़ना चाहता है। इसके तहत करीब 634 किलोमीटर का हिस्सा गिलगित-बाल्टिस्तान से गुजरेगा, पर चीन इसके सांविधानिक दर्जे को लेकर सशंकित है। चीन का मानना है कि विवादित क्षेत्र होने के कारण इस इलाके में निवेश सुरक्षित नहीं है। चीन की इस चिंता को दूर करने के लिए ही पाकिस्तान यह कदम उठाना चाहता है।
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देखा जाए, तो कश्मीर पर पाकिस्तान के पारंपरिक रुख में यह बदलाव आगे चलकर इस्लामाबाद को बड़ी मुश्किलों में डाल देगा। वह कहता रहा है कि कश्मीर एक विवादित क्षेत्र है और इसके दर्जे के बारे में संयुक्त राष्ट्र के 1948-49 के प्रस्ताव के तहत जनमत संग्रह से फैसला होना चाहिए। लेकिन यह कहते हुए वह भूल जाता है कि संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव में यह भी लिखा था कि जनमत संग्रह से पहले पाक को इस क्षेत्र से अपनी पूरी फौज निकाल लेनी होगी। वैसा नहीं हुआ।

पाक अधिकृत कश्मीर के इस हिस्से को पाक से मिलाने से इसका भारत के साथ बनते रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। पाकिस्तान में ऐसे लोगों की कमी नहीं, जिनका मानना है कि अगर उसने गिलगित और बाल्टिस्तान को अपने संविधान में शामिल कर एक अलग प्रांत बनाया, तो भारत का कश्मीर पर दावा पक्का हो जाएगा। भारत संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने की घोषणा भी कर सकता है, जिसके लिए पिछले कई वर्षों से जबर्दस्त अंदरूनी दबाव पड़ रहा है। इससे बहुत-सी पेचीदगियां पैदा हो जाएंगी। उस क्षेत्र के लोग पहले ही पाकिस्तान से तंग आए हुए हैं और वे उसके चंगुल से निकलना चाहते हैं। इस्लामाबाद के इस कदम से वहां के लोगों का रोष और बढ़ेगा।

काबिल-ए-गौर है कि जब से चीन ने अपने मुस्लिम बहुल कशगार क्षेत्र को बलूचिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से जोड़ने वाले आर्थिक व सामरिक गलियारे का निर्माण करने की घोषणा की है, वहां के लोग इसका अनेक कारणों से विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि पाक और चीन मिलकर इस क्षेत्र के संसाधनों को लूटना चाहते हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान में नाममात्र का प्रशासन है और वह क्षेत्र इस्लामाबाद से रिमोट कंट्रोल के जरिये चलाया जा रहा है। पाक की राष्ट्रीय असेंबली में इसका कोई प्रतिनिधि नहीं है। पर चीन को खुश करने के लिए जो कदम अब इस्लामाबाद उठाने जा रहा है, उसका उसे ही ज्यादा नुकसान होने वाला है।
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