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राहुल के दावों का सच: पीएम मोदी ने आदिवासियों पर गोली चलाने का दिया अधिकार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Raman Singh Updated Sun, 05 May 2019 06:40 PM IST
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राहुल गांधी (फाइल फोटो)
राहुल गांधी के एक झूठ को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में अभी कार्यवाही चल ही रही है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने एक और झूठ बोल डाला। बहुत बड़ा झूठ। एक आम सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कह दिया कि नरेंद्र मोदी की सरकार ने एक कानून पारित किया है, जिसके तहत पुलिस वालों को आदिवासियों पर गोली चलाने का अधिकार दिया गया है। मैंने जब उनको यह कहते सुना, तो इतनी हैरान हुई कि यूट्यूब पर जाकर उस भाषण को खोजा। इस खोज में कांग्रेस अध्यक्ष के कई और चुनावी भाषण सुनने को मिले, जिनमें कई सारे और झूठ थे।


ओडिशा में आदिवासियों की सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस आदिवासियों को उनकी जमीन रखने का अधिकार देने का काम कर चुकी है, लेकिन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक उनसे उनकी जमीनें छीन लेना चाहते हैं, ताकि वह इन जमीनों को उद्योगपतियों को दे सकें। उन्होंने यह नहीं बताया कि इन जमीनों पर जब कारखाने बनते हैं, तो रोजगार के अवसर पैदा होते हैं आदिवासी युवाओं के लिए। इसके बदले उन्होंने यह कहा कि आदिवासी युवाओं को ओडिशा के मुख्यमंत्री न रोजगार देना चाहते हैं, न शिक्षा। इस तरह की झूठी बातें कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव अभियान शुरू होने से पहले भी कहते आए हैं।


राफेल सौदे को लेकर उन्होंने बार-बार कहा है कि प्रधानमंत्री ने इस सौदे में से 30,000 करोड़ रुपये चोरी करके अपने दोस्त अनिल अंबानी को दे दिए हैं। आज तक उन्होंने इसका कोई सुबूत पेश नहीं किया है। लेकिन यह झूठ बोलते जाते हैं, शायद इस उम्मीद से कि जब किसी झूठ को बहुत बार बोला जाता है, तो वह लोगों के मन में धीरे-धीरे सत्य बन जाता है। सो वह यह भी बोलते हैं बार-बार कि मोदी ने नोटबंदी सिर्फ इसलिए करवाई थी, ताकि ‘अपने 15 उद्योगपति दोस्तों’ को लाभ पहुंचा सकें। कभी वह यह भी कह डालते हैं कि गरीबों का पैसा हथियाने के लिए नोटबंदी की गई थी। माना कि चुनावों के समय हर राजनेता कुछ हद तक झूठ का सहारा लेता है, लेकिन क्या यह भी जरूरी नहीं है कि इतने बड़े राजनीतिक दल के अध्यक्ष थोड़ी जिम्मेदारी दिखाएं? मजे की बात यह है कि राहुल गांधी जब भी मोदी का नाम लेते हैं, तो उन पर सबसे बड़ा आरोप उनका यही रहता है कि मोदी ने झूठ बोलकर 2014 का चुनाव जीता था। वह बैंक खातों में 15 लाख रुपये डालने वाला उदाहरण दोहराते हैं। सच पूछिए तो यह भी झूठ है।


मोदी का वह भाषण ऑनलाइन अगर आप सुनने का कष्ट करेंगे, तो पाएंगे कि उन्होंने सिर्फ यह कहा था कि विदेशी बैंकों में इतना पैसा है भारत का कि अगर उसको वापस लाया जाए, तो शायद देश के हर नागरिक के बैंक खाते में 15 लाख रुपये डाल दिए जा सकेंगे। इस बात को तोड़-मरोड़ कर लोगों को गुमराह करना गलत है। लेकिन ऐसा लगता है कि राहुल गांधी सत्ता में अपने परिवार को वापस लाने के लिए कोई भी झूठ बोल सकते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष शायद अब भी उस जमाने में जी रहे हैं, जब देश के मतदाताओं को उल्लू बनाना आसान था राजनेताओं के लिए।


मेरी उम्र के पत्रकारों को उनकी दादी का दौर अच्छी तरह याद है, जब लोग कहा करते थे कि वह इंदिरा गांधी को वोट दे रहे हैं, सिर्फ इसलिए कि उनको उनका चेहरा पसंद है। तब लोग राजनेताओं को भगवान का रूप मानते थे। पर अब ऐसा नहीं है। अब मतदाताओं का दिल झूठ बोलकर या करिश्मा के बल पर जीतना इतना आसान नहीं है। लगता है कि मतदाता राजनेताओं से अधिक सयाने हो गए हैं।
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