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ट्रंप, टैरिफ और अदालत: वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में भारत अपनी मजबूत स्थिति चाहता है, अमेरिकी नीतियों से सबक...

अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 31 May 2025 05:41 AM IST

सार

चाहे वह टैरिफ का मुद्दा हो या फिर अवैध आप्रवासन का, ट्रंप अमेरिका के संसाधनों पर बोझ को घटाकर उसे फिर महान बनाने की मंशा रखते हैं। यह भी समझना होगा कि वह एक कुशल कारोबारी की तरह सिर्फ अमेरिका के हितों के लिए काम कर रहे हैं।
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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ पर शपथ ग्रहण के छह महीने बाद भी जारी है चर्चा - फोटो : PTI


दरअसल, अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही ट्रंप की आर्थिक सोच बिल्कुल स्पष्ट है। उनके सामने बढ़ते अमेरिकी व्यापार घाटे को नियंत्रित करने की चुनौती है, जिसके लिए ही उन्होंने दो अप्रैल को मुक्ति दिवस के रूप में घोषित करते हुए दुनिया भर के सौ से ज्यादा देशों से आने वाले सामान पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा की। इसके पीछे उनकी सोच यह है कि ये टैरिफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे और वैश्विक व्यापार असंतुलन को भी ठीक करेंगे।


चूंकि चीन ने जवाबी टैरिफ लगाया था, इसलिए चीन को छोड़कर बाकी देशों पर टैरिफ पर 90 दिनों के लिए रोक लगा दी थी। चीन पर टैरिफ तो 145 फीसदी तक पहुंच गया था, हालांकि बाद में इसे घटा दिया गया । व्यापार न्यायालय के फैसले से वैश्विक लॉबियों को जरूर राहत मिली होगी, लेकिन अपीलीय न्यायालय द्वारा उसके फैसले को पलटे जाने से यह स्पष्ट है कि ट्रंप की टैरिफ नीति जारी रहेगी, और उनका अमेरिका अब अपने आर्थिक हितों से बिल्कुल समझौता नहीं करेगा।


दरअसल, चाहे वह टैरिफ का मुद्दा हो या फिर अवैध आप्रवासन का, ट्रंप अमेरिका के संसाधनों पर बोझ को घटाकर उसे फिर महान बनाने की मंशा रखते हैं। यह भी समझना होगा कि वह एक कुशल कारोबारी की तरह सिर्फ अमेरिका के हितों के लिए काम कर रहे हैं। भारत, जो वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है, ट्रंप की नीतियों से कई सबक ले सकता है।


भारत का व्यापार घाटा, खासकर चीन के साथ चिंता का विषय रहा है। ऐसे में, चुनिंदा टैरिफ या संरक्षणवादी नीतियां भारत के घरेलू उद्योगों को मजबूत कर सकती हैं। भारत व्यापार समझौतों में कठोर रुख अपनाने का सबक भी अमेरिका से सीख सकता है, खासकर उन देशों के साथ, जो अनुचित व्यापार प्रथाओं का उपयोग करते हैं। ट्रंप का अंदाज बेशक कुछ अलग हो, लेकिन उनकी नीतियों से यह भी सीखा जा सकता है कि आर्थिक संप्रभुता की रक्षा के लिए साहसिक, और कभी-कभी अलोकप्रिय कदम कैसे उठाए जाते हैं।

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