अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 जुलाई को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान से वाशिंगटन में मुलाकात की थी। उस मुलाकात के बाद हुए संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में राष्ट्रपति ट्रंप ने कश्मीर विवाद के समाधान के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की।
उन्होंने कहा, 'यदि मैं मदद कर सकता हूं, तो मुझे मध्यस्थ बनना अच्छा लगेगा।' ट्रंप ने यह दावा भी किया कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे मदद के लिए आगे आने को कहा है। उन्होंने कहा, 'दो हफ्ते पहले मैं प्रधानमंत्री मोदी के साथ था। और हमने इस विषय (कश्मीर) पर बात की थी। और उन्होंने वास्तव में कहा, 'क्या आप मध्यस्थ या पंच बनना पसंद करेंगे?' मैंने कहा, 'कहां?' (मोदी ने कहा) 'कश्मीर'।'
अनुच्छेद 370 को खत्म करना सत्तारूढ़ दल के चुनावी घोषणा पत्र का हिस्सा था। हालांकि यह तो 1990 के दशक के शुरुआत से था। भाजपा 1998 से 2004 तक सत्ता में रही और फिर बिना इस घोषणा पर अमल के मई 2014 और मई 2019 में भी वह सत्ता में आई। तो फिर अभी क्यों? अनेक टिप्पणीकारों की राय है कि राष्ट्रपति ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश के कारण यह कदम तेजी से उठाया गया, और उनका दावा है कि
इस तरह से कश्मीर को पूरी तरह से घरेलू मुद्दे में बदल दिया गया, पाकिस्तान को पूरी तरह से बाहर कर दिया गया और किसी भी विदेशी नेता या राष्ट्र के लिए अपने मामलों में मध्यस्थता करना असंभव कर दिया गया है।
अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने में ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश भी कोई कारण थी या नहीं, यह केवल प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ही जानते हैं-और वह हमें यह नहीं बताने जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने सितंबर के आखिर में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इमरान खान से हुई एक अन्य मुलाकात में एक बार फिर से मध्यस्थता की पेशकश की। एक रिपोर्टर ने अमेरिकी राष्ट्रपति को यह कहते हुए कोट किया, 'मैं तैयार, इच्छुक और सक्षम (कश्मीर में मध्यस्थता के लिए) हूं।
यह एक जटिल मुद्दा है। यह लंबे समय तक चल सकता है। यदि दोनों तैयार हों, तो मैं यह करने को तैयार हूं।' एक अन्य रिपोर्टर ने ट्रंप को इस तरह से कोट किया, 'मैं चाहता हूं कि कश्मीर में सबके साथ न्याय हो; मैं एक अच्छा पंच साबित हो सकता हूं।'