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परिवहन: इलेक्ट्रिक कारें खरीदने का वक्त आ गया है... बाजार में किफायती ऑफर देने को तैयारी में हैं वाहन कंपनियां

मधुरेंद्र सिन्हा Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Fri, 24 Jan 2025 06:00 AM IST

सार

इलेक्ट्रिक कारें महंगी होने की वजह से फिलहाल कम बिक रही हैं, लेकिन अब कई कंपनियां बाजार में किफायती कारें उतारने की तैयारी में हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला


बहरहाल, भारत में काम कर रहीं तमाम कार कंपनियां इलेक्ट्रिक कारें बनाने लगी हैं, मारुति को छोड़कर। टाटा मोटर्स के अलावा, भारत की दूसरी बड़ी वाहन निर्माता कंपनी महिंद्रा भी उतर चुकी है। कोरियाई कंपनी हुंडई, एमजी, चीनी कंपनी बीवाईडी, विदेशी लग्जरी कार निर्माता कंपनियां जैसे मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी आदि ने भी अपनी कारें पेश कर दी हैं। इनके अलावा हाई एंड कार कंपनी रॉल्स रॉयल भी इलेक्ट्रिक कारें लेकर हाजिर है। बेशक उसकी कीमत सात करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। लेकिन जिस कार कंपनी को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता है वह है मारुति, जो इसी साल इलेक्ट्रिक कारें लेकर आ रही है। बताया जाता है कि वह तीन तरह की इलेक्ट्रिक कारें लेकर आएगी।


इस साल कार बाजार में स्पर्धा तेज होगी। जापानी कंपनी टोयोटा मारुति के साथ मिलकर अपनी इलेक्ट्रिक कारें उतारेगी। मारुति बाजार की स्पर्धा को ध्यान में रखते हुए शक्तिशाली बैटरी वाली कारें उतारने जा रही है। कहा जा रहा है कि ये कारें एक चार्ज में 550 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती हैं। कंपनी कीमतों को वहन करने लायक रखेगी, ताकि अधिक बिक्री हो। इलेक्ट्रिक कारों के साथ यह समस्या आ रही थी कि ये एक चार्ज में लगभग 300 किलोमीटर से ज्यादा नहीं जा पा रही थीं। इसके अलावा उनके चार्जिंग की भी समस्या थी। ठीक वैसी स्थिति है, जैसी सीएनजी वाली कारों के मालिकों को एक जमाने में झेलनी पड़ी थी।


ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) की बैटरियों का सबसे बड़ा निर्माता देश चीन है, जो दुनिया की कुल खपत का 79 फीसदी उत्पादन करता है। उसके बाद अमेरिका का स्थान है। विदेशों से आयातित होने के कारण इन बैटरियों की कीमतें भी ज्यादा हैं। भारत में बैटरियां बनती हैं, लेकिन कम। कारों की बैटरियां लीथियम से बनती हैं। अभी भारत में लीथियम की खोज चल रही है। भारत जितनी जल्दी बैटरी बनाने में स्वावलंबी होगा, ग्राहकों को उतना ही फायदा होगा। इलेक्ट्रिक कारों की बैटरियां बहुत महंगी हैं और उनकी कुल कीमतें कार की कीमतों का 70 फीसदी तक हो सकती हैं। दूसरी ओर, अब कार कंपनियां शक्तिशाली बैटरियों की तलाश में हैं। बताया जा रहा है कि मारुति दो पैक वाली 60 किलोवाट की बैटरी लेकर आ रही है। इससे कारों के ज्यादा दूर बिना चार्ज के जाने की क्षमता बढ़ जाएगी।


महंगी होने की वजह से अभी देश में कुल कारों की बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों की संख्या एक फीसदी से कुछ ज्यादा है। इलेक्ट्रिक कार को बढ़ावा देने के लिए तेलंगाना में रजिस्ट्रेशन मुफ्त कर दिया गया है। भारत सरकार की नीति भी यही है कि इन कारों को 2030 तक कम से कम 30 फीसदी की सब्सिडी मिले। यह सब्सिडी ही कारों को खरीदने के योग्य बना रही है। इलेक्ट्रिक कारों के साथ सबसे अच्छी बात यह है कि इनके रखरखाव पर खर्च नहीं के बराबर है। ऐसा इसलिए है कि जहां परंपरागत कारों में इंजन सहित सैकड़ों पुर्जे होते हैं, वहीं इन कारों में महज आठ-दस ही होते हैं। इसलिए पुर्जे वगैरह खराब होने की आशंका खत्म हो जाती है। और बार-बार सर्विसिंग से छुटकारा मिल जाता है। कारों का वजन कम हो जाने के कारण टायरों की भी लाइफ बढ़ जाती है।


कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि अभी हाइब्रिड गाड़ियों पर ध्यान दिया जाना चाहिए, क्योंकि ये गाड़ियां पेट्रोल और बिजली, दोनों से चलती हैं, जिससे बहुत अच्छा माइलेज मिलता है। इससे परंपरागत कारों का उद्योग बचा रह जाएगा और वे तमाम पुर्जा बनाने वाली कंपनियां बंद हो जाने से बच जाएंगी। अभी इन कंपनियों में लाखों लोग काम करते हैं और वहां अरबों रुपये का व्यवसाय होता है। बहरहाल, अगर आप इलेक्ट्रिक कार खरीदना चाहते हैं, तो इसके चार्जिंग की व्यवस्था घर पर ही करें। कमर्शियल चार्जिंग महंगे हैं। ऐसे में चार्जिंग लागत आधी हो जाएगी। आने वाले महीनों में इलेक्ट्रिक कारों की खरीदारी एक अच्छा सौदा हो सकता है।

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