अपने छात्र जीवन से ही मैं एक कार्यकर्ता था और मुझे लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में शुरू हुए उस चर्चित छात्र आंदोलन के एक सक्रिय कार्यकर्ता होने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ था, जिसने भारतीय राजनीति को व्यापक ढंग से प्रभावित किया। यह सचमुच देखने लायक है कि भारतीय लोकतंत्र आज इच्छा की राजनीति से उम्मीद की राजनीति में रूपांतरित हो गई है, और उससे भी आगे आश्वासन की राजनीति से आकांक्षा की राजनीति में बदलने जा रही है। पिछले लोकसभा चुनाव में देश के मतदाताओं ने उम्मीद पर भरोसा जताया और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा को निर्णायक बहुमत दिया। बहुमत की सरकार में आज हम देश को रूपांतरित करने के असाधारण काम में निरंतर लगे हुए हैं। सामाजिक सशक्तिकरण का लक्ष्य हासिल करने के लिए हर नागरिक की उम्मीद और आकांक्षा को समावेशी विकास तथा ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलने की प्रक्रिया चल रही है।
आज हमारा लक्ष्य कुछ रूपांतरकारी कार्यक्रमों और पहलकदमी के जरिये इस देश के नागरिकों के लिए नए अवसरों का निर्माण करना है। स्पष्ट रूप से इसका पहला तत्व सुशासन है, जिसका अर्थ यह है कि तमाम निर्णय उचित और पारदर्शी तरीके से लिए जाएंगे। आज मैं गर्व से यह कह सकता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शासन ईमानदारी का पर्याय बन चुका है।
मैं केंद्रीय संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री के तौर पर संचार भवन में बैठता हूं, जो पहले गलत वजहों से चर्चा में था। लेकिन आज तमाम फैसले उचित और निष्पक्ष तरीके से लिए जाते हैं, जिनमें किसी तरह का बाहरी हस्तक्षेप नहीं होता। हमने देश के इतिहास में स्पेक्ट्रम की नीलामी सबसे सफल तरीके से की है, जिससे सरकार को 16 अरब डॉलर राजस्व के तौर पर प्राप्त हुए हैं। हमारे प्रधानमंत्री हमेशा कहते हैं कि खराब शासन का गरीबों पर सबसे अधिक असर पड़ता है, इसलिए अच्छा और बेहतर शासन सुधार का केंद्रबिंदु है। चूंकि हमारा ध्यान गरीबों और हाशिये के लोगों पर है, इसलिए हम बगैर बैंकिंग सुविधा वालों को बैंक से जोड़ने, असुरक्षितों की सुरक्षा, निर्धनों की मदद और अकुशल को कौशल विकास से लैस करने जैसे नए विचारों के साथ आए हैं। पंद्रह महीनों के भीतर 20 करोड़ ऐसे लोगों के बैंक खाते खोले गए हैं, जिनका अपना बैंक खाता नहीं था। इनमें से सत्तर फीसदी बैंक खातों में नियमित लेन-देन होता है। इन खाताधारकों ने अपने खातों में 300 अरब रुपये जमा किए हैं। पिछले सात महीनों में 12.40 करोड़ नागरिकों ने बहुत कम लागत वाली जीवन और दुर्घटना बीमा तथा पेंशन स्कीम ली है। मुद्रा स्कीम के तहत बीस लाख लोगों के कर्ज मंजूर हुए हैं और बहुत छोटे उद्यमियों को 900 अरब से अधिक के कर्ज वितरित किए गए हैं।
डिजिटल इंडिया भी इसी तरह का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसकी चारों तरफ चर्चा हो रही है। देश में आज एक अरब मोबाइल फोन उपभोक्ता और 40 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता हैं। स्मार्टफोन के उभरते बाजारों में भारत आज दूसरे स्थान पर है। इसी तरह स्टार्टअप के मामले में अमेरिका और चीन के बाद सबसे अनुकूल माहौल भारत का है। आधार के तहत देश के 97 करोड़ नागरिकों को डिजिटल पहचान देने का काम पूरा हो चुका है। इस डिजिटल आधार पर डिजिटल इंडिया का लक्ष्य डिजिटल खाई को भरते हुए नागरिकों, खासकर गरीबों और वंचितों को सशक्त बनाना है, ताकि उनके जीवन में उन्नति की नई संभावनाएं पैदा हों।
जनसांख्यिकी का जो लाभ हमें मिला है, वह इस प्रक्रिया को और तेज गति दे रहा है, क्योंकि देश की सवा अरब आबादी का 65 प्रतिशत हिस्सा पैंतीस वर्ष या उससे कम आयु का है। देश की सभी ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ने का तेज कार्यक्रम, स्पेक्ट्रम के कारोबार से संबंधित सभी लंबित मुद्दों का हल, सूचना प्रौद्योगिकी में ओपन सोर्स को प्राथमिकता, जिसका मतलब खुलापन, पारदर्शिता तथा सामुदायिक विकास से है, आदि के जरिये हम विभिन्न सेवाओं की डिजिटल डिलिवरी के लिए मजबूत ढांचागत व्यवस्था निर्माण की प्रक्रिया में निरंतर जुटे हुए हैं। आज देश में ई-कॉमर्स 67 फीसदी की दर से बढ़ रहा है, जिसका फोकस ग्रामीण और अर्द्ध शहरी इलाकों में अधिक है।
हमारी डाक सेवा के विशाल नेटवर्क का इस्तेमाल ई-कॉर्मस माल की डिलिवरी के लिए हो रहा है, जिससे पार्सल राजस्व में भारी बढ़ोतरी हुई है। डाक विभाग में डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया तेज करने और ग्रामीण क्षेत्रों में कॉमन सर्विस सेंटर की भूमिका बढ़ाने के अतिरिक्त गांवों में जल्दी ही बीपीओ स्कीम लॉन्च करने की योजना है-इन सबका उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जो डिजिटल इंडिया को गति देगा। सब्सिडी का बड़ा हिस्सा अब डिजिटल पहचान का इस्तेमाल करते हुए सीधे गरीबों के बैंक खातों में डाला जा रहा है। इससे सब्सिडी के बेजा का लाभ हड़पने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगा है।
पिछले एक साल की बात करें, तो इस दौरान आईटी क्षेत्र में 1,000 नए स्टार्ट-अप्स आए हैं। सरकार के प्रोत्साहन से देश में स्टार्ट-अप के प्रति माहौल बनता जा रहा है, जहां युवा तकनीक के जरिये नए अवसर पैदा कर रहे हैं। मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। पिछले 10 महीनों में मोबाइल बनाने वाली तमाम बड़ी कंपनियों ने देश की 15 जगहों में अपने मैन्यूफैक्चरिंग साइट्स खोले हैं। वैश्विक परिदृश्य में भी भारत की छवि लगातार चमक रही है। पिछली चार तिमाहियों में 7.4 फीसदी विकास दर के साथ भारत सबसे तेज आर्थिक विकास वाला देश बना है। राजमार्ग निर्माण, ऊर्जा क्षेत्र तथा दूसरे क्षेत्रों में देश को भारी निवेश हासिल हो रहा है। निवेश आकर्षित करने की सबसे प्रमुख जगह, सातवां सबसे ब्रांडेड देश, कारोबार करने में आसानी के मामले में 12 अंकों का सुधार और व्यक्तिगत तौर पर दुनिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति सम्मान के कारण भारत को स्वाभाविक तौर पर विश्व की सबसे तेज अर्थव्यवस्था बताया जा रहा है।
-लेखक केंद्रीय संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री हैं