आजादी के बाद पहली बार 2017 में नई स्वास्थ्य नीति आई, जो बेहद दूरगामी प्रभाव छोड़ने वाली और गहरा असर देने वाली नीति बनी है। यह एक युगांतरकारी नीति है। इसके पहले जो स्वास्थ्य नीति थी, वह टुकड़ों-टुकड़ों में काम करने वाली थी। कभी मलेरिया फैल गया, तो उस पर जोर दिया गया। कभी टीबी की समस्या बड़ी हुई, तो फोकस उधर हो गया। एक तरह से वह संकट प्रबंधन की नीति थी। कोई दूरगामी योजना और दीर्घकालीन नीति नहीं थी। हमारी सरकार जब आई, तो हमने समग्र, समावेशी और समान प्रभाव देने वाली स्वास्थ्य नीति बनाई। सरकार का संदेश है, रोग से निरोग की ओर।
नई स्वास्थ्य नीति के तीन पहलू हैंः प्रिवेंटिव, प्रमोटिव और क्यूरेटिव (उपचारात्मक)। आयुष्मान भारत इसी नीति की परिणति है। जिसके तहत पूरे देश में डेढ़ लाख हेल्थ ऐंड वेलनेस सेंटर बनाए जाएंगे। इन केंद्रों में हर व्यक्ति की तीस साल की उम्र में संपूर्ण जांच कराई जाएगी। महिलाओं के लिए स्तन कैंसर, मुख कैंसर और ग्रीवा कैंसर, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, टीबी और कुष्ट रोग की समग्र जांच कराएंगे। इसके अलावा अन्य सभी बीमारियों की भी जांच होगी और दवाई दी जाएगी। अगर हम तीस साल की उम्र में ही बीमारी पकड़ लें, तो उसका इलाज जल्दी और प्रभावशाली तरीके से हो सकेगा। जबकि 50 साल की उम्र में बीमारी का पता चलने पर इलाज में ज्यादा कठिनाई आती है।
इस साल हम 15 हजार वेलनेस केंद्र बना देंगे और 2022 तक सारे डेढ़ लाख वेलनेस केंद्र स्थापित हो जाएंगे। इससे देश में रोगों की समग्र और प्राथमिक जांच का पूरा नेटवर्क तैयार हो जाएगा।
दूसरा पहलू है, आउट ऑफ पॉकेट खर्च। इसे दूर करने के लिए सरकार फ्री ड्रग्स ऐंड डाइग्नोस्टिक सुविधा उपलब्ध करा रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब दस किस्म के टेस्ट और 25 किस्म की दवाएं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 50 किस्म के टेस्ट और सौ से ऊपर किस्म की दवाएं और जिला अस्पतालों में 500 से ज्यादा दवाइयां और टेस्ट निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। पिछले तीन साल हमने 1,400 करोड़ रुपये की दवाइयां बांटी हैं।
आयुष्मान भारत, जिसे 'मोदी केयर' भी कहा जाता है, के तहत 50 से 55 करोड़ लोगों के पांच लाख रुपये तक का सालाना इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी। मतलब 40 फीसदी आबादी को पांच लाख रुपये का हेल्थ कवरेज मिलेगा। यह उनकी जेब से होने वाले खर्च को कम करेगा। जहां तक राज्यों के आयुष्मान भारत को लागू करने का सवाल है, तो 25 से ज्यादा राज्यों ने एमओयू पर दस्तखत कर दिए हैं। महाराष्ट्र और राजस्थान, जिनके बारे में गलत खबर छपी है, वे भी इससे सहमत हैं। पंजाब ने भी सहमति दे दी है। यानी करीब-करीब हर राज्य ने इसे मंजूर कर लिया है। इतनी बड़ी योजना है कि कोई भी इससे वंचित नहीं रहना चाहेगा।
आयुष्मान भारत दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है और इसे प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सरकार प्रतिबद्धता से काम कर रही है। इसके लिए सबके सुझाव आमंत्रित हैं। सरकार इसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना चाहती है। दिल्ली का एम्स 1960 के आसपास शुरू हुआ था, लेकिन उसे उच्च स्तर तक पहुंचने में 20 साल लग गए। नए एम्स खोलने का काम अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने शुरू किया था, जिसे नरेंद्र मोदी की सरकार आगे बढ़ा रही है। हमारी कोशिश है कि जल्दी से जल्दी देश भर में एम्स का एक बड़ा जाल फैल जाए और लोगों को अपने शहरों और राज्यों में ही उच्च स्तरीय इलाज मिल सके। हमें उम्मीद है कि अगले 15 वर्षों में देश का स्वास्थ्य एवं चिकित्सा परिदृश्य बदल जाएगा।