वैसे तो जम्मू कश्मीर को कश्मीर घाटी के साथ चिनाब घाटी, पुंछ घाटी आदि और भी कई घाटियों से जाना जाता है, जहां प्रकृति ने मानो अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया है। पर चिनाब घाटी में कई पर्यटन स्थल हैं, जो पर्यटकों के मनोरंजन का केंद्र बने हुए हैं। चिनाब घाटी के अंतर्गत आने वाले प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भद्रवाह को 'मिनी कश्मीर' भी कहा जाता है। भद्रवाह जम्मू से 200 किलोमीटर दूर है, मुख्य सड़क मार्ग काफी अच्छे हैं और पर्यटक जम्मू से बटोत की यात्रा 'फोर लेन हाई-वे' से करते हैं। पर्यटकों को यहां की हरी और गहरी वादियां, दूध जैसे शीतल पानी के झरने, लंबी चरागाहें और बर्फ से ढके ऊंचे पहाड़ अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
भद्रवाह की 'जॉय वैली' पर्यटकों के बीच सबसे लोकप्रिय है। लेकिन पर्यटन विभाग की उदासीनता के कारण अब भी बड़ी संख्या में पर्यटक इस खूबसूरत स्थान से अनजान हैं। इस संबंध में डोडा के रहने वाले 30 वर्षीय नितिन कुमार कहते हैं, 'फिलहाल यहां रुकने के लिए पर्यटकों को टेन्ट खरीदने पड़ते हैं, क्योंकि रहने की उचित व्यवस्था नहीं है। खाने-पीने की चीजों की भी समुचित व्यवस्था नहीं है।'
डोडा जिला हर दृष्टिकोण से खूबसूरत है। इसकी खूबसूरती को चार चांद लगाने वाली 'चिंता घाटी' समुद्र सतह से 6,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जो चारों तरफ घने जंगलों से घिरा हुआ है। यहां कई टूरिस्ट स्पॉट भी हैं। चिंता घाटी के चिंता नाहला पर बना थुबा पॉइंट भद्रवाह का सबसे ऊंचा पॉइंट है। भद्रवाह से 40 किमी दूर एक और खूबसूरत जगह बाल पाद्री स्थित है, जो एक खूबसूरत पिकनिक स्पॉट है, जहां पर्यटक बर्फबारी और घुड़सवारी का आनंद उठाते हैं।
यहां सर्दियों के मौसम में काफी बर्फ रहती है। यहां आने का सबसे सुंदर समय मई, जून और जुलाई है। डोडा बलेसा के रहने वाले अर्जुन ठाकुर कहते हैं कि यह डोडा की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है। परंतु बाल पाद्री में पर्यटकों के ठहरने की कोई बेहतर व्यवस्था नहीं है। यहां आने वाले पर्यटक ठहरने के लिए अपना टेन्ट खुद लेकर आते हैं, अन्यथा उन्हें खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ सकती है। चूंकि यह एक ट्रेकिंग प्लेस है, ऐसे में यदि यहां रहने और खाने-पीने की उचित व्यवस्था हो, तो पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी।
चिनाब घाटी के लोगों का मुख्य पेशा कृषि है। पर अगर यहां के पर्यटन स्थलों को बेहतर बनाया जाए और पर्यटकों के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो यह जगह पर्यटन के मानचित्र पर उभर कर सामने आएगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए साधन भी उपलब्ध होंगे। स्थानीय निवासी 28 वर्षीय काजल कुमारी कहती है, 'यदि चिनाब घाटी के पर्यटक स्थलों को विकसित किया जाए, तो इससे यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। विकास होने से यह इलाका देश के अन्य जगहों से भी जुड़ सकता है।'
पर्यटन रोजगार पैदा करता है और लोगों के जीवन स्तर को भी ऊपर उठाता है। चिनाब घाटी में पर्यटक कम आने के कई कारण हैं, जैसे, आवश्यक सुविधाओं की कमी तथा रहने के स्थान व भोजन जैसी सुविधाओं का अभाव। चिनाब घाटी को पर्यटन के अनुकूल बनाने और पर्यटन उद्योग से जुड़े आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए तालमेल का होना आवश्यक है। इस संबंध में जम्मू कश्मीर के पर्यटन सचिव सैयद आबिद राशिद शाह कहते हैं, 'हम जम्मू-कश्मीर आने वाले पर्यटकों के लिए लगातार नए और अनोखे काम करने का प्रयास कर रहे हैं। इस लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में लगातार प्रयास जारी है।' अब यह समय ही बताएगा कि चिनाब घाटी और इसके पर्यटन का कितना विकास हो पाता है। (चरखा फीचर)