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मुशायरा हिट करवाने के नुस्खे

Mon, 15 Jun 2015 08:19 PM IST
कुमार विनोद
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कई छोटे-बड़े मुशायरों में शिरकत कर चुके इस खाकसार शायर ने मुशायरों को हिट करवाने के चंद अचूक नुस्खे तजवीज किए हैं। पहला नुस्खा यह है कि देश की संसद में भले ही महिलाओं को तैंतीस प्रतिशत आरक्षण अभी तक न दिया गया हो, लेकिन मुशायरे के ‘सक्सेस रेट’ को सौ फीसदी तक ले जाने के इच्छुक आयोजकों को चाहिए कि वे इसमें भाग लेने वाली महिलाओं का तैंतीस प्रतिशत कोटा तुरंत प्रभाव से ‘फिक्स’ कर दें। मुशायरे में महिलाओं का कोटा फिक्स हुआ नहीं कि भीड़ अपने आप बढ़ने लगेगी।
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दूसरा नुस्खा यह है कि मुशायरे में गंभीर किस्म के कवियों, शायरों आदि से यथासंभव परहेज किया जाए। गंभीर शायर पत्रिकाओं और किताबों में ही अच्छे लगते हैं, मुशायरों में उनकी कविताओं पर तालियों की आवाज के बजाय श्रोता उबासी लेते दिखाई पड़ते हैं। इसलिए हास्य कवियों अथवा हास्य के नाम पर चुटकुले परोसने वालों, बीच-बीच में द्विअर्थी जुमलों का प्रयोग कर जनता की नब्ज टटोलने वालों को तरजीह दी जा सकती है। बतौर ‘आइटम नंबर’ वीर रस के एकाध कवि को भी इसमें शामिल किया जा सकता है।

नुस्खा नंबर तीन यह है कि आयोजकों को चाहिए कि वे मुशायरे में भाग ले रहे शायरों का पेमेंट उनके हिस्से में आई तालियों के मुताबिक करना शुरू कर दें। इससे तालियां बजवाने की पूरी जिम्मेदारी शायरों की हो जाएगी। चाहे झूठ-मूठ की ही तालियां बजे, पर इससे मुशायरे की रेटिंग बढ़ेगी। जिस किसी शायर को अपने कलाम पर तालियां बजने की जरा भी उम्मीद न हो, वह अपने साथ किराये के कम से कम चार-पांच श्रोता जरूर लाए, जो श्रोताओं की भीड़ में अलग-अलग जगहों पर बैठ जाएं। उन्हें सिर्फ इतना करना है कि वह हर पंक्ति के बाद वाह-वाह, भई बहुत खूब, क्या बात है-कहते हुए, बाकी श्रोताओं को दिखाते हुए, दोनों हाथ हवा में ऊपर उठाकर ताली बजाए, जिसका अनुसरण भेड़चाल में माहिर श्रोता करेंगे। फिर मुशायरे को सुपर हिट बनाने में भला कौन रोक सकता है!
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