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राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती देती धमकियां

शिवदान सिंह
Updated Wed, 29 Jan 2020 04:19 AM IST
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शरजील इमाम - फोटो : Social Media

जेएनयू के छात्र नेता शरजील इमाम द्वारा दी गई कथित धमकी की गंभीरता एक रक्षा विशेषज्ञ अच्छी प्रकार पहचान सकता है। शरजील का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में यह कहते हुए नजर आया, 'यदि नागरिक संशोधन कानून (सीएए) वापस नहीं हुआ, तो उत्तर पूर्व के राज्यों असम, मेघालय, त्रिपुरा, नागालैंड, मणिपुर को देश के मुख्य भाग से जोड़ने वाले सिलीगुड़ी कॉरिडोर को मुस्लिम बंद करवा देंगे। जिससे भारत के टुकड़े करके उसकी अखंडता को नष्ट किया जा सके।' यह समझने की जरूरत है कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर का हमारे लिए क्या महत्व है।



अक्सर सिलीगुड़ी कॉरिडोर को 'चिकन नेक' भी कहा जाता है, क्योंकि यह गलियारा एक मुर्गे की गर्दन जैसा पतला है। इस गलियारे के जरिये चीन की सीमा से लगता हुआ सिक्किम राज्य तथा भूटान भी देश से जुड़ता है। इस गलियारे की भौगोलिक स्थिति इस प्रकार है- उत्तरी बंगाल के सिलीगुड़ी शहर से गुजरने वाला राजमार्ग करीब 15 किलोमीटर चलकर सिक्किम से आने वाली तीस्ता नदी तक पहुंचता है, जहां से यह बाईं तरफ सिक्किम तथा दाईं तरफ मुड़कर उत्तर पूर्वी राज्य तथा भूटान को जाता है।


इसी सड़क के साथ साथ दिल्ली को गुवाहाटी से जोड़ने वाली रेलवे लाइन भी जाती है। इसके अतिरिक्त सिलीगुड़ी से कुछ दूरी पर बांग्लादेश की सीमा लगती है, जहां से लंबे समय से बांग्लादेशियों की घुसपैठ भारतवर्ष में हो रही है। आशंका है कि ये घुसपैठिये भारत सीमा में घुसकर सिलीगुड़ी के आसपास के जंगलों तथा पहाड़ों में बस गए हैं। इसीलिए शरजील इस क्षेत्र को मुस्लिम बहुल बताकर इनसे इस राजमार्ग तथा रेलमार्ग को अवरुद्ध कराने की धमकी दे रहा है।


1962 में चीन ने भी ऐसी ही धमकी दी थी, जब उसने सिक्किम के नाथूला पर आक्रमण किया था। चीन का इरादा भी उस समय जल्दी से घुसकर इस कॉरिडोर पर कब्जा करने का था। परंतु समय रहते हुए भारतीय सेना ने उसके इस इरादे को सफल नहीं होने दिया। दोकलम पर हुए विवाद के पीछे भी चीन की यही मंशा थी। शरजील ने जो धमकी दी है, वह एक गंभीर मामला है, जिस पर भारत की खुफिया एजेंसियों को गंभीरता से छानबीन करनी चाहिए। आखिर उसे धमकी देने के लिए किसने प्रेरित किया? क्या इसके पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई तो नहीं है?


1998 में पाकिस्तान ने जब कारगिल में घुसपैठ करवाई थी, तब उसकी मंशा श्रीनगर को लेह तथा लद्दाख से जोड़ने वाले राजमार्ग को सिलीगुड़ी की तरह अवरुद्ध करने की थी। यह याद रखना चाहिए कि श्रीनगर लेह राजमार्ग को आवागमन के लिए मुक्त कराने के लिए देश की सेना को कितनी आहुतियां देनी पड़ीं तथा देश का कितना आर्थिक नुकसान उस युद्ध में हुआ।


देश में लंबे समय से बांग्लादेश तथा म्यांमार से घुसपैठ चल रही थी, जिसमें ज्यादातर वहां के मुसलमान तथा अल्पसंख्यक हिंदू, ईसाई और सिख भी हैं। मगर हिंदू, ईसाई और सिख वहां प्रताड़ित होने के कारण भारतवर्ष में शरणार्थियों के रूप में प्रवेश कर रहे हैं। मुस्लिमों के साथ ऐसी बात नहीं है। इसीलिए नागरिकता संशोधन कानून में इस प्रकार घुसपैठ करने वाले मुसलमानों को सम्मिलित नहीं किया गया है। केवल वोट बैंक की राजनीति के कारण इस कानून का विरोध किया जा रहा है, जिसके विरोध की आड़ में देश को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतें अपने मंसूबों को अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं, जिनसे सतर्क रहने की जरूरत है।


-लेखक, भारतीय सेना के सेवानिवृत्त कर्नल हैं।

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