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सूरत-ए-हाल : यह युद्ध का युग नहीं है... फिर भी हम तैयार हैं, एक बुद्धिमानी भरा निर्णय

पी. चिदंबरम
Updated Sun, 11 May 2025 07:26 AM IST

सार

पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, लेकिन बदले में पाकिस्तान भारत के आम नागरिकों को निशाना बना रहा है। भारत ने साफ कर दिया है कि ‘अगर आप युद्ध चाहते हैं, तो हम तैयार हैं’।
 

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पाकिस्तान पर भारत की स्ट्राइक - फोटो : Amar Ujala


बुद्धिमानी भरा निर्णय

प्रधानमंत्री मोदी ने इन बाधाओं को महसूस करते हुए बुद्धिमानी से चुनिंदा लक्ष्यों तक सीमित और संतुलित सैन्य प्रतिक्रिया को चुना। मंगलवार, 7 मई 2025 को भारतीय सेना ने नौ लक्ष्यों (पाकिस्तान में 4 और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 5) पर मिसाइल और ड्रोन दागे तथा आतंकवादी ठिकानों के बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया। यह पैमाने और समय दोनों के लिहाज से जानबूझकर किया गया सीमित अभियान था और इसने अपने उद्देश्य में सफलता भी हासिल की। यह आतंकवाद से पीड़ित एक देश की वैध प्रतिक्रिया थी। भारत ने जवाबी कार्रवाई में नागरिक बस्तियों या संपत्तियों को निशाना नहीं बनाया और न ही इसका लक्ष्य पाकिस्तान का सैन्य ढांचा था। यह तो माना ही जा रहा था कि पाकिस्तान इस पर प्रतिक्रिया देगा, सो पाकिस्तान ने सेना के जनरलों और आईएसआई के प्रभाव में आकर नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार गोलीबारी की। अगर पाकिस्तान ने बड़े पैमाने पर युद्ध शुरू कर दिया होता, तो उसे ओआईसी समेत कई देशों का कोपभाजन बनना पड़ता। हालांकि, यह मान लेना बेवकूफी होगी कि पाकिस्तानी सेना के प्रमुख आने वाले दिनों में और भी आक्रामक तरीके से जवाबी कार्रवाई नहीं करेंगे। इसके अलावा, यह मान लेना भी गलत होगा कि 7 मई को आतंकवादी ठिकानों पर किए गए हमले के बाद तीनों संगठन - द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ), लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) खत्म हो गए। उनका नेतृत्व अभी भी बरकरार है और पहले भी उन्होंने यह दिखाया है कि वे मारे गए नेताओं के स्थान पर नए नेताओं को सामने लाने में सक्षम हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान में ऐसे युवा भी हैं, जो भारत में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए भर्ती होने, प्रशिक्षित होने और प्रेरित होने के लिए तैयार हैं, जिसमें आत्मघाती बनना तक शामिल है। जब तक पाकिस्तान पर सेना के जनरल और आईएसआई का शासन रहेगा, तब तक शायद भारत के लिए इस तरह का खतरा खत्म नहीं होगा।


नुकसान अपरिहार्य है

जब भी दो पक्षों में युद्ध होगा, इस बात की उम्मीद नहीं की जा सकती है कि इसमें जान-माल या सैन्य उपकरणों का नुकसान केवल एक पक्ष को ही होगा। भारत सरकार ने इस बात को स्वीकार किया है कि सीमा पार से होने वाली गोलीबारी में कुछ भारतीय नागरिक मारे गए हैं। यह दुखद और दर्दनाक है, लेकिन लंबी सीमा/नियंत्रण रेखा को देखते हुए, इन घटनाओं को टाला नहीं जा सकता है। यह मुमकिन है कि पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई में भारत ने अपने कुछ सैन्य उपकरणों को खो दिए हों। पाकिस्तान ने विमान को मार गिराने के बेबुनियाद दावे किए हैं, लेकिन बीबीसी को दिए गए एक साक्षात्कार में पाकिस्तान के हकलाने वाले रक्षा मंत्री ने इसके समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया और एक खेदजनक आंकड़ा पेश किया। एहतियाती उपायों के बावजूद अगर सीमा पार से गोलाबारी नहीं रुकती है, तो भारतीय पक्ष को और अधिक नुकसान होगा। नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में कश्मीर में आतंकवाद की तीन बड़ी घटनाएं हुई हैं- उरी, पुलवामा और पहलगाम। हर घटना के बाद सरकार ने संयमित तरीके से जवाब दिया। ऐसा लगता है कि सरकार ने खुलकर और पारदर्शी तरीके से बोलना और काम करना सीख लिया है : 7 मई की घटना के बाद सरकार ने नक्शे और दृश्य जारी किए। सरकार ने एक चालाकी भरा कदम उठाते हुए दो युवा महिला अधिकारियों को, जिनमें से एक सेना से और एक वायु सेना से थी, मीडिया को लाइव टीवी पर जानकारी देने के लिए उतारा, जिसे पूरे देश ने देखा। इन सब में दिल में खटकने वाली एक बात रही कि 24 अप्रैल और 7 मई को आयोजित सर्वदलीय बैठकों में प्रधानमंत्री अनुपस्थित रहे। लोगों ने यह भी देखा है कि पहलगाम हमले के बाद मोदी ने कश्मीर का दौरा नहीं किया है, न ही वे पीड़ित परिवारों से मिलने गए हैं। इसकी तुलना 3 मई, 2023 से संघर्ष प्रभावित मणिपुर का दौरा करने को लेकर उनके द्वारा किए गए अस्पष्ट इनकार से की जा रही है।


पाकिस्तान की दुविधा

8 मई को पाकिस्तान ने अपना रुख बदला और जवाबी कार्रवाई करते हुए सीमा पर मिसाइल, ड्रोन और विमान तैनात कर दिए। भारत ने जवाबी हमला करते हुए कई स्थानों पर पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया। भारत ने अपनी कार्रवाई को संयमित बताया, लेकिन पाकिस्तान ने इसे अलग तरह से देखा। मुझे लगता है कि भारत सरकार ने चतुराई से गेंद पाकिस्तान के पाले में डाल दी है और संकेत दिया है कि ‘अगर आप युद्ध चाहते हैं, तो हम तैयार हैं’। पाकिस्तान की बुद्धिमानी इसी में है कि वह पहलगाम और उसके परिणामों को पीछे छोड़कर आतंकवादियों पर लगाम लगाए और भारत के साथ युद्ध विराम समझौते पर पहुंच जाए। सवाल यह है कि पाकिस्तान की सत्ता में कौन है? क्या यह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (नवाज शरीफ के भाई) के नेतृत्व में अराजक नागरिक सरकार है या पाकिस्तानी सेना और आईएसआई? अनिश्चित भविष्य, युद्ध की चेतावनी, उच्च तीव्रता वाले संघर्ष, सीमा पार से गोलीबारी के साथ सैन्य और नागरिक हताहतों के लिए खुद को तैयार रखें, क्योंकि मुश्किल भरे दिन आने वाले हैं।

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