पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय की व्यवहार वैज्ञानिक डॉ. कैटी मिल्कमैन बताती हैं कि एक क्रम या लय बना लेना दो वजहों से काम करता है, जिन्हें व्यवहारवादी नुकसान का भय व फायदे की उम्मीद कहते हैं। उनके अनुसार, किसी काम का क्रम लोगों में यकीन पैदा करता है कि लंबे समय तक किया गया यह काम निश्चित ही फायदा पहुंचाएगा। वह यह भी कहती हैं कि कुछ खोने का भय तो इससे भी ज्यादा प्रभावी होता है। तो जब आप रोजाना एक क्रम के साथ किसी काम को कर रहे होते हैं, तो इस लय को न तोड़ने के विचार के पीछे लालच से ज्यादा भय काम कर रहा होता है। भय इसका भी होता है कि अगर एक बार यह लय टूटी, तो दोबारा से पूरी मेहनत करनी होगी।
बेस्टसेलर किताब गुड हैबिट्स, बैड हैबिट्स की लेखिका डॉ. वेंडी वुड कहती हैं कि कोई नई आदत विकसित करने के लिए पहले आपको एक लय बनानी होती है। फिर उसे तब तक बरकरार रखना होता है, जब तक वह स्वयं आपका अंग नहीं बन जाती। वह कहती हैं, ‘कोई भी काम हो, आप बस शुरुआत कीजिए, रोज थोड़ी देर करते रहिए और एक दिन आप देखेंगे कि बगैर किसी प्रयास के वह हो रहा है।’ तकनीक इसमें आपकी मदद कर सकती है। मेरी एक मित्र ने किसी एप पर नई भाषा सीखनी शुरू की और लगातार 2000 दिनों तक वह उस पर सीखती रही। एप के लीडरबोर्ड में उसका नाम सबसे ऊपर था, जिसने उसे और अच्छा करने की प्रेरणा दी। इसके अलावा, आप जो भी क्रम बनाएं, उसमें एक दिन छूट का भी रखें, यह आपके लिए चीजों को आसान बनाएगा। जब आप किसी काम को करने की एक लय बनाने जा रहे हों, तो उन अतिरिक्त लाभों के बारे में भी सोचना चाहिए, जो इससे आपको मिल सकते हैं। इससे आपमें जो अनुशासन आएगा, वह आपकी जिंदगी के दूसरे क्षेत्रों पर भी जरूर असर डालेगा।