जब शरीर थका हो, तो खाना बनाना बोझ लग सकता है। ऐसे में, हम अक्सर मोबाइल उठाकर स्क्रॉल करने लगते हैं। पर, मशहूर इस्राइली-ब्रिटिश शेफ योतम ओटोलेन्घी का कहना है कि ऐसा करने के बजाय अपने लिए कुछ आसान-सा पकाना दिन का सबसे सुखद अनुभव बन सकता है। बची हुई सब्जियों, लहसुन और मसालों से बना भोजन भूख मिटाने के साथ चीजों के सही इस्तेमाल का संतोष देता है। अगर खाना बनाते समय पक्षियों की चहचहाहट या प्राकृतिक ध्वनियां सुनाई दें, तो साधारण काम भी सुकून दे सकता है।
खुशी का एक रास्ता दूसरों के लिए नि:स्वार्थ भाव से कुछ करना भी है। दुनिया के कई हिस्सों में सड़क किनारे बने ‘लिटिल फ्री’ शेयरिंग बॉक्स इस भावना की मिसाल हैं। लोग इनमें किताबें और जरूरत का दूसरा सामान अजनबियों के लिए छोड़ जाते हैं। न पहचान की जरूरत, न बदले में कुछ पाने की उम्मीद। यह छोटा-सा प्रयास याद दिलाता है कि इन्सानियत आज भी रोजमर्रा के छोटे कामों में जिंदा है। इसके अलावा, किसी की मदद करना या किसी उदास चेहरे पर मुस्कान लाना भी हमें भीतर से खुश कर सकता है। कई बार अपनों के साथ बिताए गए कुछ पल और प्यार से कहे गए चंद शब्द महंगे तोहफे से कहीं ज्यादा कीमती हो सकते हैं।
एक और तरीका भी है। हर रात खुद से पूछें कि आज मेरे साथ क्या अच्छा हुआ। जवाब किसी की मुस्कान, पसंदीदा भोजन, समय पर पूरा हुआ काम या किसी अपने से हुई अच्छी बातचीत भी हो सकता है। चाहें तो उसे डायरी में लिख लें। अगर किसी दिन कुछ खास याद न आए, तो लिखी हुई पुरानी यादों को ही दोबारा पढ़ लें।
खुशियां अक्सर उन्हीं छोटी-छोटी बातों में छिपी होती हैं, जिन्हें हम रोज देखते हैं, पर महसूस करना भूल जाते हैं। इसलिए, कभी ठहरकर देखें कि क्या अच्छा हुआ, किसने हमारा साथ दिया और हम किसके चेहरे पर मुस्कान ला सके।