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उत्तर प्रदेश को सर्वोत्तम बनाने का क्षण

Wed, 22 Mar 2017 09:54 AM IST
तरुण विजय
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तरुण विजय
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नरेंद्र मोदी और अमित शाह का योग सूत्र देश में केसरिया का चक्रवर्ती राज्य स्थापित कर रहा है। विशेषकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में उन्होंने विचारधारा और कार्यकर्ताओं के मानस से जुड़े नेताओं को मुख्यमंत्री पद देकर केवल संगठन का ही मनोबल नहीं बढ़ाया, बल्कि अन्य राजनीतिक दलों के सामने मिसाल भी कायम की है। इसमें सबसे ज्यादा हंगामा और संभवतः पहली बार किसी राज्य के मुख्यमंत्री पर राष्ट्रव्यापी बहस हुई, तो वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। जिनका हिंदू संन्यासी होना उनके सांप्रदायिक व्यक्तित्व का प्रमाण मान लिया गया। यद्यपि होना यह चाहिए था कि जो व्यक्ति हिंदू धर्म की व्यापकता, विशालता, उदार हृदय मानस तथा युगों से चली आ रही भिन्न विचारों के प्रति सहिष्णुता के प्रतीक भगवे रंग को ओढ़े हुए है, उसके प्रति ज्यादा विश्वास दिखाया कि ऐसा ही व्यक्ति बिना भेदभाव के राज कर सकता है, जिसका यदि कोई एकमात्र स्वार्थ होगा, तो वह धर्म सेवा, गौ सेवा ही हो सकता है।
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यह दुर्भाग्य ही है कि जो स्वयं को सेक्यूलर कहते हैं, वे हिंदू धर्म के वर्तमान समय में दो महान व्याख्याता संन्यासी और गीता प्रेस के प्रति दुर्भावना और विद्वेष से भरी टिप्पणियां कर रहे हैं। सवाल उठता है कि जिस प्रदेश में हर दिन डकैती, बलात्कार, अपहरण, दंगों तथा फिरौतियों की खबरों से उगता हो, जो अपराधों में देश का शिरोमणि बन गया हो, वहां एक वीतरागी संन्यासी के राज प्रमुख बनने पर उन लोगों को इतना कष्ट क्यों हो रहा है, जो हर बात पर संविधान की दुहाई देते हैं? वास्तव में मोदी और शाह की युति ने उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के राजतिलक से भ्रष्टाचार और अपराधों के विरुद्ध एक ऐसा ब्रह्मास्त्र छोड़ा है, जिसकी गूंज सारी दुनिया में हो रही है।

जब से वामपंथियों का कांग्रेस पर असर पड़ा, तब से इस देश में हिंदू और देशभक्त होने के प्रति एक ग्लानि और क्षमा भाव पैदा किया जाने लगा है, वरना हिंदू महासभा के नेता महामना मालवीय, गांधी का रामराज, सुभाष बोस का जयहिंद, बंकिम का वंदे मातरम, सरदार पटेल की असंदिग्ध प्रखर राष्ट्रीयता, कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी का जय सोमनाथ देश के हर वर्ग और दल द्वारा आत्मीयता से अंगीकार किया जाता रहा। उत्तर प्रदेश में जो लोग खुद को लोहियावादी कहते रहे, वे यह भूल गए कि उन्हीं राम मनोहर लोहिया ने भारत के जिन तीन स्वप्नों को व्याख्यायित किया था, उनके नाम हैं-राम, कृष्ण और शिव।
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उत्तर प्रदेश में राम, कृष्ण और शिव के पवित्रतम क्षेत्र हैं, लेकिन हिंदुओं का तीर्थ और उनका धार्मिक व्यवहार पिछले 15 वर्षों की सेक्यूलर सरकारों को कभी सहन नहीं हुआ। इन चुनावों में सेक्यूलर दलों ने उम्मीदवार घोषित नहीं किए, बल्कि कहा कि वे 100 मुसलमान खड़े कर रहे हैं। किसके लिए और किसे प्रभावित करने के लिए? मुलायम सिंह ने बहुत गर्व और अभिमान से कहा कि कारसेवकों पर उन्होंने गोलियां चलवाई थी। इस दंभोक्ति में कितनी प्रजावत्सलता और गांधी का न्याय छिपा है। क्या गरीबी और सामाजिक न्याय का कोई मजहबी चेहरा हो सकता है? हिंदू की गरीबी अलग और मुसलमान की अलग? महिला अधिकार का विषय क्या अब शरीयत के आईने में देखा जाएगा?

भाजपा को मिले विराट समर्थन ने मोदी के अखिल भारतीय प्रखर देशभक्त व्यक्तित्व को कुंदन की तरह निखारा है। योगी आदित्यनाथ उस हिंदू संन्यासी परंपरा से हैं, जिसने भेदभाव के खिलाफ लड़ाई लड़ी है, पर कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। उत्तर प्रदेश के सर्वोत्तम प्रदेश बनने का क्षण यही है।
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