फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

इस प्रतिरोध के मायने

तस्लीमा नसरीन
Updated Sun, 29 Apr 2018 07:05 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
श्रीरेड्डी
कास्टिंग काउच का विवाद एक बार फिर सामने है। कास्टिंग काउच का मतलब है-मैं तुम्हें काम दूंगा, लेकिन इसके बदले तुम्हें अपना शरीर मुझे सौंपना पड़ेगा। सिर्फ फिल्म जगत में नहीं, सभी जगह कास्टिंग काउच चलन में है। शादीशुदा, कुंवारे, युवा, वृद्ध-पूरा पुरुष वर्ग नौकरी चाहने वाली महिलाओं के साथ ऐसा सलूक करेगा, यह जैसे स्वाभाविक ही मान लिया गया है।


लड़कियों को सिर्फ नौकरी पाने के लिए नहीं, नौकरी बरकरार रखने के लिए भी समर्पित होना पड़ता है। भारत में अभी कास्टिंग काउच से जुड़ा विवाद तेलुगू फिल्मों की अभिनेत्री श्रीरेड्डी के कारण है। श्रीरेड्डी ने तेलुगू फिल्मोद्योग में व्याप्त कास्टिंग काउच की घृणित प्रवृत्ति के खिलाफ नग्न प्रतिवाद किया। उन्होंने इसके खिलाफ मुंह खोला, तो मुंबई में विख्यात नृत्य निर्देशक सरोज खान ने कास्टिंग काउच के समर्थन में प्रतिक्रिया देकर नया विवाद पैदा कर दिया। अनेक लोगों ने सरोज खान की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। 


श्रीरेड्डी काफी दिनों से कास्टिंग काउच का विरोध कर रही थीं। उन्होंने मूवी आर्टिस्ट एसोसिएशन के खिलाफ भी विरोध जताया है। दरअसल कई फिल्मों में काम करने के बावजूद उन्हें एसोसिएशन की सदस्यता नहीं मिली। उसी के खिलाफ उन्होंने सांकेतिक नग्न प्रदर्शन किया। इस पर एसोसिएशन ने न केवल श्रीरेड्डी को कभी सदस्यता न देने का फैसला किया, बल्कि उसने उनका बहिष्कार करते हुए धमकी भी दे डाली है कि श्रीरेड्डी के साथ अगर कोई फिल्मों में काम करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


जिस फ्लैट में श्रीरेड्डी किराये पर रहती थीं, उसके मालिक ने भी उन्हें फ्लैट खाली करने का नोटिस दिया। यानी लैंगिक विषमता के खिलाफ लड़ाई लड़ने निकली श्रीरेड्डी खुद अब और विषमता का शिकार हो गई हैं। खुले में नग्न होने के कारण श्रीरेड्डी से वे लोग बेहद नाराज हैं, जिन्होंने उन्हें एकांत में नग्न करने की कोशिश की थी। लेकिन उन्होंने तेलुगू फिल्मों के उन निर्माता-निर्देशकों के चेहरे से नकाब उतारकर भला ही किया है, जिन्होंने फिल्म में काम देने के बदले उनका शारीरिक शोषण किया था। बॉलीवुड समेत दूसरी जगहों में महिलाएं इस तरह का साहस दिखाएं, तो बहुतेरे श्रीमंतों की असलियत सामने आ जाएगी। आखिर हॉलीवुड में हार्वी विंस्टन जैसे दिग्गजों के चेहरे से नकाब उतारे ही गए हैं।


श्रीरेड्डी ने जिस तरह से नग्न प्रतिरोध किया, वह नया नहीं है। दुनिया में बहुत समय से किसी व्यवस्था का विरोध करते हुए नग्न हो जाने की प्रवृत्ति रही है। सार्वजनिक तौर पर नग्न होने के नुकसान तो हैं। लोग आपसे घृणा कर सकते हैं। पर प्रतिरोध की यह नग्नता शक्ति भी देती है। पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर में 2004 में सैनिकों ने एक महिला मनोरमा देवी को उग्रवादी होने के संदेह में घर से कथित तौर पर उठा लिया था, फिर बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी थी। उसके विरोध में बारह स्थानीय महिलाओं ने नग्न होकर विरोध प्रदर्शन किया था।


उन्होंने अपने हाथ में बैनर टांग रखे थे, ‘सैनिको, आओ और हमारा बलात्कार करो।’ मनोरमा देवी के साथ हुए सलूक पर वहां आक्रोश तो था ही, महिलाओं के विरोध ने इंफाल समेत पूरे मणिपुर को उस बर्बरता के खिलाफ एकजुट कर दिया था। बलात्कार-विरोधी और किसी आंदोलन ने हमारी चेतना की पीठ पर इतने जोर से चाबुक नहीं मारे थे।


बीती सदी के आठवें दशक में बांग्लादेश में नूर हुसैन नामक एक गरीब ऑटो चालक ने तत्कालीन राष्ट्रपति इरशाद की तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाते हुए सड़क पर अपनी कमीज उतार दी थी। उनके सीने पर 'तानाशाही का विनाश हो', 'गणतंत्र की स्थापना हो' जैसे नारे लिखे हुए थे। पुलिस की गोली से नूर हुसैन मारा गया, लेकिन तब से वह बांग्लादेश में तानाशाही के विरोध के प्रतीक बने हुए हैं।
विज्ञापन


नूर हुसैन को केंद्र में रखकर बांग्लादेश में अनेक नाटक, फिल्म, कविता और गीत लिखे गए हैं। जुलूस में अनेक लोग पुलिस की गोली से अपनी जान गंवाते हैं। लेकिन 1952 के भाषा आंदोलन के शहीदों के बाद नूर हुसैन की मृत्यु ने ही बांग्लादेश को इतना शोक संतप्त किया।


नग्न प्रतिवाद निर्लज्जता या वस्त्रहीनता नहीं है। चूंकि महिलाओं पर तमाम हमले उनके शरीर के कारण ही होते हैं, इसलिए नग्न प्रतिवादों के जरिये महिलाएं वस्तुतः पुरुषवर्चस्ववादी समाज को खुलेआम उत्पीड़न की चुनौती देती हैं। अहिंसक आंदोलन जिस तरह हिंसक सोच को शर्मिंदा करता है, महिलाओं का नग्न प्रतिवाद ठीक उसी तरह पुरुषवर्चस्ववादी समाज को शर्मिंदा करने में सक्षम है, क्योंकि यह ठीक उसके मर्मस्थल पर चोट करता है। विषमताओं के विरोध में दुनिया भर में नग्न प्रतिवाद हुए हैं और हो रहे हैं। 


पिछले साल अर्जेंटीना में प्लाजो द मायो की अदालत के सामने सौ लड़कियों ने नग्न होकर अपना प्रतिरोध दर्ज किया। यह प्रतिरोध महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों और निर्यातन के खिलाफ था। नग्न लड़कियां फुटपाथ पर लेटकर व्यवस्था के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा रही थीं। नहीं, नग्न लड़कियों का वह प्रतिरोध यौन भावनाओं को प्रज्वलित करने वाला नहीं था, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ क्षुब्ध करता था। इससे पहले भी यौन अत्याचार के विरोध में अर्जेंटीना की महिलाएं नग्न होकर संसद भवन के सामने धरने पर बैठी थीं।


श्रीरेड्डी के नग्न प्रतिरोध से तेलुगू फिल्मद्योग में जिस तरह का तूफान उठ खड़ा है, वह स्वस्थ संकेत है। महिलाओं को इस मानसिकता से पीछा छुड़ाना होगा कि वे शोषित होने के लिए पैदा हुई हैं। इस दौर में महिलाएं हर पेशे में अपना वर्चस्व स्थापित कर रही हैं। श्रीरेड्डी ने रास्ता दिखाया है कि महिलाएं अगर चाह लें, तो पुरुषवर्चस्ववादी समाज के चेहरे से नकाब उठाना कोई कठिन काम नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next