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विज्ञापनों की बदलती दुनिया

सतीश सिंह Published by: Raman Singh Updated Thu, 16 Jan 2020 06:18 PM IST
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सतीश सिंह - फोटो : a

कभी विज्ञापन सिर्फ अखबारों में आता था या प्रचार-प्रसार के लिए जगह-जगह होर्डिंग्स और पोस्टर लगाए जाते थे। गांव एवं कस्बों में डुगडूगी पिटवाई जाती थी। लोग ठेले, रिक्शे या ऑटोरिक्शा में लाउडस्पीकर लगाकर प्रचार-प्रसार करते थे। मेले-सर्कस, सिनेमा आदि के प्रचार-प्रसार इसी तरीके से किए जाते थे, लेकिन अब विज्ञापन की दुनिया में तेजी से बदलाव आ रहा है। पहले विज्ञापन सिनेमा के शुरू में या मध्यांतर में दिखाया जाता था, लेकिन अब सिनेमा के कई विकल्प आ गए हैं, जिनमें पांच से दस मिनट के अंतराल पर विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं, जिसे कुछ सेकेंड्स तक आपको देखना ही होता है। उसके बाद ही आप उससे आगे बढ़ सकते हैं।



वेब सीरीज, यू-ट्यूब, नेट-फ्लिक्स आदि के आने से विज्ञापन का दायरा व्यापक हो गया है। कम अवधि के वीडियो, जैसे, टिकटॉक का इस्तेमाल विज्ञापन के लिए किया जा रहा है। 'टिकटॉक ने भारत के छोटे शहरों में रहने वाले लोगों को लोकप्रिय होने का मौका दिया है। अब तो ई-कॉमर्स वेबसाइट और बड़े ब्रांड अपने ग्राहकों की रुचि के अनुसार टिकटॉक बना रहे हैं। आज वॉइस असिस्टेंट विज्ञापन का एक बड़ा आधार बनकर उभरा है। विभिन्न मोबाइल फोन कंपनियां वॉइस असिस्टेंट फीचर से लैस मोबाइल का निर्माण कर रही हैं। भारत में लगभग 82 प्रतिशत स्मार्टफोन उपयोगकर्ता वर्तमान में वॉइस असिस्टेंट तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब लोग व्हाट्सऐप पर टेक्स्ट टाइप करने के बजाय वॉयस मेसेज भेजना ज्यादा पसंद करते हैं। इस तकनीक का इस्तेमाल गूगल पर जानकारी खोजने, गूगल मैप का उपयोग करने आदि में भी किया जा रहा है।


फिलहाल, भारत की अर्थव्यवस्था सुस्त है। फिर भी कहा जा रहा है कि भारत वर्ष 2020 में दुनिया के शीर्ष विज्ञापन बाजारों में से एक होगा। एक अनुमान के अनुसार इस साल विज्ञापन बाजार में 12 से 13 प्रतिशत की दर से वृद्धि होगी। इस रफ्तार से इस साल विज्ञापन बाजार का आकार 95,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। यह भी कहा जा रहा है कि इस साल भारत विश्व के शीर्ष 10 विज्ञापन बाजारों में से एक होगा। इस साल में इंटरनेट या डिजिटल विज्ञापन में विकास दर सबसे अधिक 26.3 प्रतिशत होगी। आजकल नकारात्मक विज्ञापन दिखाने का चलन भी शुरू हो गया है। ऐसा राजनीतिक विज्ञापनों में देखा जा रहा है। बदले माहौल में माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक लगाने की बात कह रहा है। इतना ही नहीं, फेसबुक जैसे दूसरे बड़े प्लेटफॉर्म पर भी इस तरह के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने की बात कही जा रही है।


दरअसल इंटरनेट, विज्ञापनदाताओं के लिए विज्ञापन का शक्तिशाली एवं प्रभावी माध्यम है, क्योंकि यह मतदाताओं और उनके विचार को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। इंटरनेट और सोशल साइट्स पर आने वाले विज्ञापनों को नियंत्रित करने के लिए नियामकों को अस्तित्व में लाने के लिए लंबे समय से मांग की जा रही है। फेसबुक के मुख्य कार्यकारी मार्क जुकरबर्ग के अनुसार लोकतंत्र में नेताओं या खबरों पर रोक लगाना निजी कंपनियों के लिए आसान नहीं है, क्योंकि कारोबारियों या कंपनियों के लिए विज्ञापन कमाई का एक बड़ा माध्यम है।   

बदले परिवेश में विज्ञापनों की दशा और दिशा दोनों बदल गई है। बाजार के बड़े होने से कारोबार की संभावना बढ़ी है, जिसका दोहन कारोबारी बखूबी कर रहे हैं।

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