मेरे एक बहुत ही करीबी मित्र यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। अपने विभाग का अध्यक्ष बनने के अगले ही दिन उन्होंने अध्यक्ष वाली कुर्सी उठवाकर दफ्तर के ही एक कोने में रखवा दी, फिर अपने कमरे से एक अदद स्टूल मंगवाकर उस पर बैठना शुरू कर दिया। कुर्सी के बजाय स्टूल पर उनके बैठने को लेकर सबने अपने-अपने दिमागी घोड़े सरपट दौड़ाने शुरू कर दिए-मुझे तो लगता है कि फलां इन्हें हटवाकर खुद इस कुर्सी पर बैठना चाहता है, जिसकी भनक इन्हें लग गई है और अब कुर्सी से उतार दिए जाने की आशंका के मद्देनजर यह स्टूल लेकर आए थे। कम से कम इससे उन्हें बेइज्जती तो झेलनी नहीं पड़ेगी कि अध्यक्ष जी कुर्सी से उतार दिए गए।
लेकिन मुझे लगता है कि सिर्फ कुछ नया कर दिखाने की चाहत में ही इन्होंने कुर्सी के स्थान पर स्टूल का इस्तेमाल शुरू किया है। फिर तो इनके लिए चेयरमैन (अध्यक्ष) के स्थान पर स्टूलमैन शब्द का प्रयोग करना पड़ेगा। और हां, किसी भी मीटिंग की कार्यवाही लिखते समय इनके नाम के सामने ‘इन द चेयर’ के स्थान पर 'ऑन द स्टूल’ लिखना पड़ेगा।
बहरहाल मेरे दिमाग में कुछ जोरदार सीन उभर रहे हैं-सदन में अपना बहुमत सिद्ध करने से पहले मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री कुर्सी पर बैठने के बजाय अपने घर से मंगवाए हुए स्टूल पर बैठकर ही सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले रहे हैं। प्रोबेशन पर चल रहा साधारण कर्मचारी हो या बड़ा अधिकारी-सभी ने स्टूल को ही अपना आसन बनाया है।
फिर ऐसा भी होगा कि भले कोई मुख्यमंत्री हो या प्रधानमंत्री या फिर अन्य कोई अधिकारी-वह अपना कार्यकाल पूरा होने से कुछ समय पहले ही ऑफिशियल कुर्सी से घरेलू स्टूल पर शिफ्ट हो जाया करेगा, क्योंकि ऐसा करने से उसके मन में इस बात की तसल्ली रहेगी कि उसने तो खुद ही अपने प्राणों से भी प्यारी कुर्सी का त्याग कर दिया है। अन्यथा एक ही झटके में कुर्सी से उतरना और फिर अगले ही दिन किसी और को अपनी जगह उस पर बैठे देखना कितना कष्टकारी अनुभव होता है न!