यह काम केवल राजनेता ही कर सकते हैं कि जब आप सबसे ज्यादा भूखे हों, तब वे रोटी पर टैक्स लगा दें। कॉपर यानी तांबे के साथ यही हुआ है। इलेक्ट्रिक वाहनों और नई बिजली आपूर्ति ग्रिड के लिए तांबे की मांग से तप रही दुनिया पर ट्रंप के टैरिफ फट पड़े। अमेरिका में तांबे की आपूर्ति पर 50 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगेगी।
कनाडा से भारत तक और ब्राजील से चीन तक पूरा तांबा बाजार झनझना गया। अब अमेरिका में कॉपर महंगा हो गया है और शेष दुनिया में सस्ता, क्योंकि जब तांबा अमेरिका में नहीं जाएगा, तो अन्य देशों में पहुंचेगा। इससे सबसे ज्यादा झटका किसे लगा? चिली को, दुनिया का सबसे बड़ा तांबा उत्पादक, विश्व का करीब 28 फीसदी कॉपर यहीं से आता है। कॉपर की कीमतों में उतार-चढ़ाव चिली की सियासत को हिला देता है, क्योंकि चिली ‘बॉर्न विद कॉपर स्पून’ है।
आइए, बैठिए टाइम मशीन में, चलते हैं चिली, यह देखने कि कॉपर ने किस तरह देश की सियासत को उलट-पलट दिया। टाइम मशीन हमें अटाकामा रेगिस्तान के ऊपर ले जा रही है। यह दुनिया का सबसे सूखा मरुस्थल है, जो 15 करोड़ साल पुराना है। साल में 15 मिलीमीटर बारिश भी यहां चमत्कार है। एक तरफ एंडीज की हिमाच्छादित चोटियां, दूसरी ओर ठंडा प्रशांत महासागर। लेकिन जरा नीचे तो देखिए...यह है चुक्कीकमाटा। दुनिया की सबसे बड़ी खुली तांबा खदान। 4.3 किमी लंबी, 3 किमी चौड़ी और 3,000 फीट गहरी। यह चिली की अर्थव्यवस्था की धड़कन है। टाइम मशीन की घड़ी बता रही है कि हम 1952 में पहुंच गए हैं। चुक्कीकमाटा की विशाल खदान चमक रही है, लेकिन मजदूरों का जीवन अंधेरे में है। अमेरिकी कंपनी अनाकोंडा माइनिंग खदान की मालिक है। खदान के पास मजदूरों का शहर है-मकान, स्कूल, सॉकर मैदान, लेकिन मजदूरों की दशा अच्छी नहीं है। उस युवा को देख रहे हैं आप, जो मोटरसाइकिल पर सवार है? सही पहचाना आपने... यह चे ग्वेरा हैं, जो अपनी मोटरसाइकिल डायरीज के लिए दक्षिण अमेरिका की यात्रा में चुक्कीकमाटा आए हैं। 24 साल का यह युवा डॉक्टर मजदूरों से मिल रहा है। उसे पता चलता है कि अनाकोंडा न्यूनतम वेतन देने से इन्कार करती है, जबकि कंपनी लाखों डॉलर कमा रही है। चे अपनी डायरी में लिखते हैं : ‘यह तांबा चिली का खून है, पर इसकी चमक विदेशी जेबों में जा रही है।’ याद रखिएगा कि चुक्कीकमाटा में चे ग्वेरा की यह यात्रा क्यूबा क्रांति की प्रेरणा बनेगी।
अरे उधर तो देखिए...कौन है वहां? हां...वह पाब्लो नेरुदा ही हैं। उनकी एक कविता चर्चा में है। नोबेल पुरस्कार के लिए उनकी मंजिल अभी दूर है, पर उनके साहित्य की बुनियाद चुक्कीकमाटा में रखी गई है। लोग बात कर रहे हैं कि कुछ वक्त पहले नेरुदा यहां आए थे, उन्होंने एक रात मजदूरों के साथ बिताई। उन्हें एक बच्चे की कहानी मिली है, जो खदान की धूल से बीमार था। नेरुदा की कविता नाइट इन चुक्कीकमाटा अनाकोंडा को ‘हरी राक्षसी’ कहती है। उनकी पंक्तियां गूंजती हैं :
In the clustered heights, beneath the moon of hardness-excavator-you open the mineral’s lunar craters.