त्योहारों से ठीक पहले चीनी की कीमतों में उछाल ने जहां उपभोक्ताओं से लेकर सरकार तक का जायका बिगाड़ दिया है, वहीं दस साल में पहली बार सरकार को उसके आयात के लिए मजबूर होना पड़ा है, जो वाकई चिंताजनक है। यों तो चीनी की कीमत विगत मार्च से ही बढ़ने लगी थी, लेकिन पिछले 15 दिनों में इसकी कीमतों में प्रति किलो करीब 17 रुपये की बढ़ोतरी ने सरकार की नींद उड़ा दी है।
गौरतलब है कि अगस्त से नवंबर तक देश में त्योहारों का मौसम होता है, जिस दौरान चीनी की घरेलू मांग सामान्यतया बढ़ जाती है। ब्राजील के बाद चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश होने के बावजूद अगर भारत को करीब दस साल बाद पहली बार कीमतों पर नियंत्रण के लिए चीनी का आयात करने के लिए बाध्य होना पड़ा है, तो उसका सीधा मतलब है बाजार में मांग का अचानक बढ़ना और उसके अनुरूप आपूर्ति का कम होना। इससे आम उपभोक्ता की जेब पर भारी बोझ पड़ने और जमाखोरी व कालाबाजारी की आशंका बढ़ गई है।
चीनी की कीमत का सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यह कृषि और उपभोक्ता अर्थव्यवस्था के बीच सीधा संबंध दिखाता है। असल में गन्ने की खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। सिंचाई, खाद, श्रम, बिजली और परिवहन की लागत में वृद्धि का असर गन्ने और अंततः चीनी की कीमत पर पड़ता है। इसके अलावा, आपूर्ति कम होने की बड़ी वजह गन्ने के उत्पादन में अनुमान से कम पैदावार होना तथा गन्ने के एक हिस्से का इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किया जाना बताई जा रही है।
कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक, नवंबर, 2025 में बीस लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दिए जाने के कारण भी घरेलू आपूर्ति में कमी आई है। आम तौर पर अपने देश में घरेलू उत्पादन से ही घरेलू खपत की पूर्ति की जाती है, लेकिन जब कभी आपूर्ति में कमी होती है, तभी चीनी का आयात किया जाता है। इससे पहले अपने देश में वर्ष 2016-17 में कच्ची चीनी का आयात किया गया था।
बहरहाल, बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्तूबर तक 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की मंजूरी दी है, लेकिन ये तात्कालिक उपाय हैं। सरकार को उत्पादन, भंडारण, घरेलू मांग और निर्यात की स्थिति पर लगातार नजर रखनी चाहिए। जमाखोरी और कृत्रिम कमी पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसी नौबत दोबारा न आए, इसके लिए सरकार को उत्पादन बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए दीर्घकालिक उपायों पर विचार करते हुए ठोस कदम उठाने होंगे।