मैं न्यूजीलैंड द्वारा मजबूत भारतीय बल्लेबाजी टीम को महज 46 रन पर समेटने का तमाशा नहीं देख पाया। ऐसा मालूम होता है कि गौतम गंभीर, रोहित शर्मा और उनकी टीम की तरह मैंने भी इन कीवी क्रिकेटरों के लचीलेपन को कमतर आंका था। उस शाम मुझे मैदान पर उपस्थित न होने का बेहद अफसोस हुआ। इसके बाद मैंने उन्हें सम्मान देने के लिए उनके देश के सर्वकालिक 11 महान खिलाड़ियों की एक सूची तैयार की। यह करना उत्साहजनक और आनंददायक था, क्योंकि काल्पनिक टीमें बनाना हमेशा ऐसा ही होता है। गहन चिंतन के बाद आखिरकार मैंने जो टीम तैयार की, वह इस प्रकार है- 1. ग्लेन टर्नर 2. बर्ट सटक्लिफ 3. मार्टिन डोनेली 4. मार्टिन क्रो (कप्तान) 5. केन विलियमसन 6. ब्रैंडन मैकुलम (विकेट कीपर) 7. क्रिस केर्न्स 8. रिचर्ड हेडली 9. डेनियल विटोरी 10. शेन बॉन्ड 11. ट्रेंट बोल्ट।
इस टीम में प्रामाणिक रूप से चार महान क्रिकेटर हैं- डोनेली, क्रो, विलियमसन और हेडली। बाकी सभी खिलाड़ी भी बहुत अच्छे हैं। इनमें से कोई भी सिडनी में ऑस्ट्रेलियाई ऑल टाइम इलेवन या चेन्नई में इंडियन ऑल टाइम इलेवन के खिलाफ उनका समर्थन नहीं करेगा, लेकिन वेलिंग्टन में घरेलू मैदान पर वे पसंदीदा के रूप में शुरुआत करते हैं।
इस टीम को चुनने के बाद मेरा पहले दिन का खेल न देख पाने का अफसोस थोड़ा कम हो गया और अगले दिन का मैच देखने के लिए मैं चिन्नास्वामी स्टेडियम की ओर चल पड़ा। मेरी सीट सदस्य स्टैंड की अग्रिम पंक्ति में थी, जहां से मिड ऑन सीधा दिखाई देता था। जिस स्टैंड में लगभग एक हजार लोग बैठ सकते हैं, उस दिन मात्र तीस लोग बैठे थे- 10 सदस्य और 20 पुलिस कर्मी। मैं वहां बैठकर बाएं हाथ के कीवी बल्लेबाज रचिन रवींद्र को टिम साउदी के साथ शानदार शतक बनाते हुए देख रहा था। उन दोनों के बीच आठवें विकेट के लिए हुई साझेदारी ने मेहमान टीम को निर्णायक रूप से आगे लाकर खड़ा कर दिया।
खेल की समाप्ति पर न्यूजीलैंड के पास 350 से अधिक रन की बढ़त थी। अब उसके जवाब में भारत कैसे प्रतिक्रिया देगा? जब वे दूसरी बार बल्लेबाजी करने आएंगे तो क्या पहली पारी का निराशाजनक प्रदर्शन उनके जेहन में होगा? मैं खासतौर पर विलक्षण प्रतिभा के धनी यशस्वी जायसवाल को देखने के लिए उत्सुक था, जिन्हें मैंने पहले कभी लाइव बल्लेबाजी करते नहीं देखा था। उन्होंने कुछ खूबसूरत ड्राइव लगाईं, लेकिन बाएं हाथ के धीमे गेंदबाज एजाज पटेल की गेंद पर आगे बढ़कर शॉट मारने के चक्कर में आसानी से स्टंप हो गए। हालांकि, आउट होने से पहले रोहित और विराट काफी विश्वास के साथ खेले। रोहित शर्मा के आउट होने के बाद सरफराज खान आए, जिन्हें बल्लेबाजी करते हुए मैंने पहले कभी नहीं देखा था। उस खिलाड़ी की छोटी कद-काठी ने महान बल्लेबाज जीआर विश्वनाथ की याद दिला दी। यह समानता तब और अधिक स्पष्ट हो गई, जब उन्होंने स्लिप के ऊपर से कुछ खूबसूरत कट लगाए। कोहली दिन के आखिरी ओवर में आउट हो गए, लेकिन भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ जो संघर्ष किया, उसने मुझे अगली सुबह एक बार फिर से स्टेडियम में लौटने के लिए प्रोत्साहित किया। पूरे एक सत्र और उससे भी अधिक समय तक हम सरफराज और ऋषभ पंत के बीच एक शानदार, स्ट्रोक भरी साझेदारी के गवाह बने। एक के ड्राइव और कट तथा दूसरे के ऊंचे शॉट्स और रिवर्स स्वीप ने कुछ ही घंटों में खेल का संतुलन बदल दिया। रनों का अंतर खत्म होने पर भारत के 6 विकेट हाथ में थे। मेरे बगल में बैठे एक युवा प्रशंसक ने अनुमान लगाना शुरू कर दिया कि भारत चौथी पारी में न्यूजीलैंड को किस तरह का लक्ष्य देगा? क्या कीवी इस खराब पिच पर हमारी स्पिन गेंदबाजी को झेल पाएंगे?
दूसरा सत्र खत्म होने से पहले कीवी टीम के पास नई गेंद से पासा पलटने का आखिरी मौका था और यही निर्णायक साबित हुआ। टिम साउदी ने सरफराज को आउट किया, जिन्होंने एक बहुत ही खराब शॉट खेला। इसके बाद लंबे कद के विलियम ओरुर्के ने पंत को बोल्ड किया, अंतिम बल्लेबाज राहुल और जडेजा को भी आउट किया। दूसरे छोर से मैट हेनरी ने लगातार 10 ओवर फेंके। उन्होंने भारत के पुछल्ले बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा। चौथी पारी में न्यूजीलैंड के सामने मात्र 100 रन से अधिक का मामूली लक्ष्य था। 2024 में बंगलूरू में न्यूजीलैंड ने भारत के साथ कुछ वैसा ही किया, जैसा कि भारत ने 2001 में कोलकाता में लक्ष्मण, द्रविड़ और हरभजन के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया के साथ किया था।
उस शाम जब मैं मैदान से बाहर निकला तो मेरे पास से एक साथी सदस्य गुजरा, जिसने कहा- "सर, हम आपको केवल टेस्ट मैचों में ही देखते हैं, आईपीएल खेलों में कभी नहीं।" मुझे यकीन नहीं है कि यह महज एक तथ्यात्मक अवलोकन था या कटाक्ष। यदि बाद वाला है तो मैं इसे गर्व के बैज के रूप में पहनूंगा। आईपीएल मैच खत्म होने के कुछ ही मिनटों में भुला दिए जाते हैं, लेकिन टेस्ट मैच के दो दिनों के खेल को मैं लिख रहा हूं और उसकी यादों को ताजा कर रहा हूं, रवींद्र और सरफराज की बल्लेबाजी की यादें, उनके द्वारा खेले गए स्ट्रोक के विवरण। ओरुर्के और हेनरी की गेंदबाजी और उनके द्वारा लिए गए विकेटों की यादें मेरे दिमाग में लंबे समय तक रहेंगी। मैंने पुणे में दूसरे टेस्ट टीवी पर देखा और इस बात से आश्चर्यचकित हुआ कि कैसे कीवी टीम ने अपने से कहीं बेहतर समझी जाने वाली टीम को मात दे दी। इस बार उनके हीरो टॉम लैथम थे, जिन्होंने आत्मविश्वास के साथ कप्तानी की और दूसरी पारी में शानदार बल्लेबाजी से मैच को भारत की पकड़ से बाहर कर दिया। बाएं हाथ के स्पिनर मिशेल सैंटनर, जिनकी गति और विविधता ने उन्हें सफेद गेंद क्रिकेट में तो खूब सफलता दिलाई थी, टेस्ट मैच में इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था।
अंत में मैं पाठक को उस सर्वकालिक न्यूजीलैंड इलेवन की ओर ले जाता हूं, जिसे मैंने लेख की शुरुआत में पेश किया था। निश्चित रूप से अन्य क्रिकेट प्रशंसक मेरी पसंद पर सवाल उठा सकते हैं। कुछ लोग केर्न्स से आगे 1930 के दशक के शानदार सीम गेंदबाज जैक कोवी को चुन सकते हैं। अन्य लोग सोच सकते हैं कि मैकुलम की तुलना में केन वड्सवर्थ या बीजे वॉटलिंग विकेट कीपर-बल्लेबाज के रूप में बेहतर विकल्प होंगे।
हालांकि कोई भी पाठक न्यूजीलैंड टीम के किसी भी सदस्य के लिए, जिसने भारत में यह शृंखला जीती है, अपने देश की सर्वकालिक एकादश का हिस्सा बनने का दावा नहीं कर सकता है। हमें यह जानने में कुछ समय लग सकता है कि रचिन रवींद्र वाकई बहुत अच्छे हैं या प्रामाणिक रूप से महान हैं। दूसरी ओर कोहली, अश्विन और बुमराह किसी भी सर्वकालिक भारतीय एकादश में शामिल होंगे। जडेजा और पंत भी दौड़ में शामिल रहेंगे। न्यूजीलैंड ने पिछले कुछ हफ्तों में भारत में जो हासिल किया है, उससे एक बात फिर साबित हो गई है कि यह एक टीम गेम है, जिसमें व्यक्तिगत प्रतिभा और पिछली उपलब्धियां उन 11 खिलाड़ियों से बेहतर नहीं हो सकतीं, जो एक साथ खेलते हैं और एक-दूसरे के पूरक हैं।