फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

स्टारलिंक और राष्ट्रीय हित: यूक्रेन के अनुभव से भारत को क्या सबक लेना चाहिए?

सिसरो Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 16 Oct 2026 08:31 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
स्टारलिंक, एलन मस्क - फोटो : AI जनरेटेड
भारत में अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की उपग्रह-इंटरनेट सेवा स्टारलिंक को लेकर चल रही तीखी बहस के बीच यूक्रेन में उसके सैन्य संचार में आई बाधाओं की खबरों ने यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि जब एक देश की संचार व्यवस्था किसी निजी विदेशी कंपनी की तकनीकी पर निर्भर हो जाए, तो राष्ट्रीय सुरक्षा व रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा कैसे हो सकेगी।


इसमें कोई संदेह नहीं कि रूस के हमले के बाद यूक्रेन में स्टारलिंक ने संचार व्यवस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन, यूक्रेन के इस आरोप की भी अनदेखी नहीं की जा सकती कि स्टारलिंक के हाईस्पीड टर्मिनलों पर अप्रत्याशित प्रतिबंधों के कारण उसकी सैन्य इकाइयों को संचार संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ा। इसी वर्ष फरवरी में रूसी सेना के लिए भी स्टारलिंक की पहुंच सीमित किए जाने का मामला सामने आया था। यूक्रेन में इंटरनेट की गति घटाने के मस्क के फैसले को रूस के तेल ढांचों पर यूक्रेनी हमले रोकने के लिए अमेरिका की ओर से बनाए जा रहे दबाव से भी जोड़ा जा रहा है।


इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भले जरूरी हो, पर यह आशंका ही बताती है कि तकनीक का संचालन करने वाली कंपनी के फैसले किस तरह अंतरराष्ट्रीय राजनीति से प्रेरित हो सकते हैं। यही वह पहलू है, जिसे भारत को भी स्टारलिंक के संदर्भ में फैसला लेते वक्त गंभीरता से देखना चाहिए। स्टारलिंक जैसी सेवाएं निस्संदेह देश के उन क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकती हैं, जहां भौगोलिक परिस्थितियों के कारण फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क बिछाना कठिन या महंगा है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान, जब पारंपरिक संचार व्यवस्था बाधित हो जाती है, तब ऐसी सेवाएं राहत और बचाव कार्यों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। मस्क भारत में सस्ते प्लान लाने की बात भी कह चुके हैं।


जाहिर है कि स्टारलिंक के आने से इंटरनेट कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने से उपभोक्ताओं को फायदा मिल सकता है। मगर, भारत में संचालन के लिए उसे देश के कानूनों व नियामकीय शर्तों को स्वीकार करना होगा। हालांकि, सरकार को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि विदेशी उपग्रह-इंटरनेट स्वदेशी दूरसंचार क्षमताओं का पूरक बने, न कि उनका विकल्प। यूक्रेन के आरोपों के मद्देनजर भारत के लिए सबक स्पष्ट है कि तकनीक का स्वागत हो, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता की कीमत पर कतई नहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next