बीते दस वर्षों में श्रीलंका अच्छी तरह से समझ गया है कि नई दिल्ली का एनडीए शासन, पूर्ववर्ती यूपीए से बिल्कुल अलग है। मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने शपथ लेने के तुरंत बाद 2015 में श्रीलंका की यात्रा की थी। वर्ष 2009 में यूपीए शासन द्वारा अपनाई गई भारत-श्रीलंका नीति अल्पसंख्यक तमिलों के नरसंहार पर केंद्रित थी। अब ‘मोदी-एकेडी’ की सरकारों ने रक्षा सहयोग समझौते में तेजी लाने और ऊर्जा संबंधों को बढ़ाने पर सहमति जताई है। दोनों देश निवेशोन्मुख विकास और भौतिक, डिजिटल, ऊर्जा संपर्क पर ध्यान केंद्रित करेंगे। श्रीलंकाई राष्ट्रपति एक गंभीर राजनेता हैं। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की जीत की पृष्ठभूमि में नरेंद्र मोदी की भू-राजनीतिक समझ और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ मोदी की निकटता उन पर भारी पड़ती दिखी।
श्रीलंकाई शिष्टमंडल ने कोरोना महामारी के समय भारत द्वारा प्रदान की गई चिकित्सीय सहायता की सराहना की। इसके अलावा, जब श्रीलंका को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा, तो भारत ने विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मदद दिलाने में गारंटर की भूमिका निभाई। वर्ष 2022 में श्रीलंका को 75,000 करोड़ रुपये की मदद बहुत बड़ी राहत थी। इस तरह भारत ने श्रीलंका के नागरिकों के स्वास्थ्य व वित्तीय सेहत की रक्षा के लिए भी कदम उठाए। ये सारी बातें श्रीलंकाई राष्ट्रपति एकेडी के जेहन में थीं, जब वे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था, रक्षा और नागरिकों की खुशियों के लिए समन्वित दृष्टिकोण के बारे में बात कर रहे थे। दोनों के बीच हुई व्यापक वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
छह मुख्य बिंदुओं पर आम सहमति भी बनी। ये उपलब्धियां डॉ. जयशंकर के श्रीलंका में भारतीय उच्चायुक्त के रूप में लंबे समय तक काम करने के कारण संभव हो पाईं। सुरक्षा के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करने में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अहम भूमिका निभाई। इन दोनों के बिना दोनों सरकारों के प्रमुखों का उच्चस्तरीय चर्चा के लिए गोलमेज पर बैठना संभव नहीं था। वास्तव में, दोनों पक्षों ने दोहरे कराधान से बचने के साथ क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनका उद्देश्य दोनों देशों के वित्तीय ढांचे की रक्षा करना था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस यात्रा ने संबंधों में नई गति और ऊर्जा का संचार किया है और वे ‘निवेश-आधारित विकास’ और भौतिक, डिजिटल और ऊर्जा कनेक्टिविटी को शामिल करते हुए ‘भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण’ पर काम करेंगे। उन्होंने कहा, ‘हम बिजली-ग्रिड कनेक्टिविटी और बहु-उत्पाद पेट्रोलियम पाइपलाइन स्थापित करने की दिशा में काम करेंगे। सामपुर सौर ऊर्जा परियोजना में तेजी लाई जाएगी। इसके अतिरिक्त, श्रीलंका के बिजली संयंत्रों के लिए एलएनजी की आपूर्ति की जाएगी। दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए ईटीसीए को जल्द पूरा करने का प्रयास करेंगे।’
द्विपक्षीय बैठक के बाद दिसानायके ने दो साल पहले श्रीलंका के ‘अभूतपूर्व आर्थिक संकट’ के दौरान मदद करने के लिए भारत का आभार जताया। दोनों नेताओं ने गहरे समुद्र में तमिल मछुआरों को परेशान किए जाने पर भी चर्चा की, जो श्रीलंका के लिए असहज करने वाला मुद्दा था। एक अन्य विषय-पड़ोसी देशों में ‘सुलह और पुनर्निर्माण’ भी था और यह उम्मीद जताई गई कि श्रीलंका सरकार तमिल अल्पसंख्यकों की आकांक्षाओं को पूरा करेगी। मोदी ने कहा कि अगर दोनों देशों के बीच रेलवे संपर्क, नौका और उड़ान सेवाएं शुरू हो जाएं, तो लोगों के बीच संपर्क आसान हो जाएगा।
श्रीलंकाई पक्ष के मुद्दों पर दिसानायके ने कहा कि उन्हें मछुआरों के मुद्दे का ‘टिकाऊ’ और ‘स्थायी समाधान’ खोजने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने श्रीलंका को पांच अरब डॉलर का अनुदान और ऋण दिया है। उन्होंने आगे कहा कि ‘हम श्रीलंका के सभी 25 जिलों को सहायता प्रदान कर रहे हैं।’ इसके अलावा प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि ‘हमने सुरक्षा सहयोग समझौते को जल्द ही अंतिम रूप देने का फैसला किया है। हम हाइड्रोग्राफी पर सहयोग करने के लिए भी सहमत हुए हैं। हमारा मानना है कि कोलंबो सुरक्षा सम्मेलन क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।’
भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं पर जोर दे रहा था, जिस पर कोलंबो ने नई दिल्ली को आश्वस्त किया, जो खुशी की बात है, खासकर ऐसे समय में जब चीन आक्रामक रूप से भारत पर निशाना साधने के लिए अपने मिशन हिंद महासागर को आगे बढ़ा रहा है। कोलंबो द्वारा चीनी ऋण का भुगतान करने में विफल रहने के बाद हंबनटोटा बंदरगाह पर कब्जा करने वाला चीन अपने नौसैनिक निगरानी और जासूसी जहाजों को वहां खड़ा कर रहा है। पिछले दो वर्षों में, बीजिंग ने कई अवसरों पर अपने 25,000 टन वजनी उपग्रह और बैलिस्टिक मिसाइल ट्रैकिंग जहाज युआन वांग 5 को हंबनटोटा में तैनात किया है-जो कि श्रीलंका की भारत से निकटता के कारण दक्षिण भारत के श्रीहरिकोटा में भारतीय अनुसंधान एवं विकास कार्यों की जासूसी करने के लिहाज से नई दिल्ली के हितों के लिए हानिकारक है।
एकेडी ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी बातचीत की। राष्ट्रपति ने कहा कि श्रीलंका भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति और सागर विजन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में भारत श्रीलंका के सतत आर्थिक विकास के लिए समर्थन जारी रखेगा। राष्ट्रपति ने कहा कि श्रीलंका के साथ भारत की व्यापक विकास सहायता साझेदारी उसकी प्राथमिकताओं और जरूरतों पर आधारित है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत के निवेश से आर्थिक सुधार और स्थिरता में मदद मिलेगी। दोनों पक्षों ने विश्वास जताया कि यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने, दोनों देशों के लोगों की शांति और समृद्धि के लिए गति प्रदान करेगी।
श्रीलंका के राष्ट्रपति की भारत यात्रा को जिस भी नजरिये से देखा जाए, मोदी ने श्रीलंका का विश्वास जीतकर चीन को आईना दिखाने का अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है।