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जयवायु परिवर्तन: तेजी से गर्म क्यों हो रहा है दक्षिण एशिया, आपदाओं की पुनरावृत्ति पर लगाम बड़ी चुनौती

सीमा जावेद
Updated Fri, 12 Dec 2025 07:18 AM IST

सार

दक्षिण एशिया जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक औसत से दोगुना तेजी से गर्म हो रहा है। इसके कारण बाढ़, चक्रवात, लू और सूखे जैसी आपदाएं बार-बार आ रही हैं।
 
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global warming - फोटो : freepik


तूफान कोटो के प्रभाव के कारण वियतनाम अपने दक्षिण-मध्य क्षेत्र में और अधिक भारी वर्षा से जूझ रहा है। थाईलैंड में, एक दिसंबर तक, बाढ़ से कुल नौ प्रांत, 74 जिले और 2,725 गांव प्रभावित हुए, जिनमें लगभग 23 लाख लोग थे। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2025 का मानसून लगातार दूसरे साल ‘सामान्य से ज्यादा’ रहा। इसके पीछे जो ट्रेंड बन रहा है, वह ज्यादा अहम है-बारिश के दिन घट  रहे हैं, पर कम दिनों में छप्पर फाड़ कर बारिश होती है।


जर्मनवॉच की रिपोर्ट क्लाइमेट रिस्क इंडेक्स 2026 के मुताबिक, 1995 से 2024 के बीच दुनिया भर में 9,700 से ज्यादा चरम मौसमी घटनाओं में 8,32,000 लोगों की मौत हुई और 45 खरब अमेरिकी डॉलर (मुद्रास्फीति समायोजित) का आर्थिक नुकसान हुआ। इन दिनों श्रीलंका, इंडोनेशिया, फिलीपींस, मलयेशिया, थाईलैंड तथा वियतनाम में एकसाथ आए विनाशकारी तूफानों ने दक्षिण एशिया में हजारों जानें ले लीं और लाखों लोगों को विस्थापित किया है। चक्रवात सेन्यार व दित्वाह ने 40 लाख लोगों को प्रभावित किया है। इससे पहले भारत, विशेषकर पंजाब, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश बाढ़ का सामना कर रहे थे। इस साल मूसलाधार बारिश एवं उसके व्यापक प्रभाव (भूस्खलन और अचानक बाढ़) से पूरा एशिया जूझ रहा है।


दरअसल दक्षिण एशिया जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक औसत की तुलना में दोगुना तेजी से गर्म हो रहा है। इसके कारण बाढ़, चक्रवात, लू और सूखे जैसी आपदाएं बार-बार हो रही हैं। पूरे एशिया के लिए चरम मौसम अब एक आवर्ती संकट बन चुका है। हाल ही में, जलवायु वैज्ञानिक चिराग धारा (क्रेया यूनिवर्सिटी), रॉक्सी मैथ्यू कोल (भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान) एवं उनके सहयोगियों द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, भारत का औसत तापमान पिछले एक दशक (2015-2024) में लगभग 0.9 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है। पश्चिमी और पूर्वोत्तर भारत में साल के सबसे गर्म दिन का तापमान 1950 के दशक की तुलना में 1.5-2 डिग्री तक बढ़ चुका है। ऐसे में, कहीं सैलाब, कहीं सूखा-एक ही देश, दो कहानियां हैं। असम, अरुणाचल और बिहार जैसे राज्यों में बारिश 20 फीसदी तक कम दर्ज की गई।


दुनिया भर में लगभग 40 प्रतिशत लोग (तीन अरब से ज्यादा) वर्तमान में उन ग्यारह देशों में रहते हैं, जो पिछले 30 वर्षों में चरम मौसमी घटनाओं-जैसे लू, तूफानों और बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इन देशों में भारत (9वें), चीन (11वें), और लीबिया (चौथे), हैती (5वें) और फिलीपींस (7वें स्थान पर) जैसे अन्य देश शामिल हैं। इनमें कोई भी समृद्ध औद्योगिक देश शामिल नहीं है। ये सब विकासशील देश हैं।


इस वर्ष की शुरुआत से अब तक प्रशांत व हिंद महासागर में कम से कम 16 चक्रवात और दर्जनों दबाव आए हैं। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के जलवायु वैज्ञानिक रॉक्सी मैथ्यू कोल के अनुसार, अब मध्यम चक्रवात भी अत्यधिक वर्षा करते हैं और व्यापक बाढ़ का कारण बन सकते हैं। जलवायु परिवर्तन से दक्षिण एशिया तेजी से गर्म हो रहा है, जिसके चलते उसमें नित नई आने वाली आपदाएं दिन दूनी रात चौगुनी गति से आ रही हैं। edit@amarujala.com
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