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ताकि सच हो सकें संभावनाएं

त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड Updated Thu, 09 Nov 2017 09:07 AM IST
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उत्तराखंड
कुदरत के अनमोल खजाने से भरपूर हमारा उत्तराखंड आज 18वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। 17 साल में उत्तराखंड ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। 2013 में केदारनाथ त्रासदी ने राज्य के जनमानस को झकझोर कर रख दिया था। पर पहाड़ में रहने वाले लोगों ने अपने पहाड़ जैसे हौसले से उत्तराखंड की रफ्तार को थमने नहीं दिया। उत्तराखंड संभावनाओं का प्रदेश है। यह पर्यटन प्रदेश है। यहां कण-कण में प्राकृतिक सुंदरता के साथ देवताओं का वास है। यह ऊर्जा प्रदेश है। यहां कृषि, बागवानी, एरोमैटिक खेती और जैविक खेती की असीम संभावनाएं हैं। अमूल्य वन संपदा होने के कारण यह प्रदेश बायो इकोनॉमी का केंद्र है।


उत्तराखंड राज्य लोगों के अथक संघर्ष और बलिदान से मिला है। नौ नवंबर, 2000 को जब यह राज्य अस्तित्व में आया, तब लोगों ने न जाने कितनी आशाएं पाली थीं। मैं यह तो नहीं कहूंगा कि उनकी उम्मीदों पर काम नहीं हुआ। मगर जिस दिशा और रफ्तार से काम होना चाहिए था, वह नहीं हो पाया। इस बार जनता ने दो तिहाई बहुमत देकर राज्य के अस्थिर राजनीतिक वातावरण को समाप्त किया है। हमारे सामने जिम्मेदारी बड़ी है। चुनौतियां बहुत हैं। मगर मैंने हमेशा इन चुनौतियों में संभावनाएं तलाशी हैं।


पलायन और ग्रामीण कृषि का सिमटता दायरा अब भी एक बड़ी चुनौती है। ग्रामीण क्षेत्रों से लोग पलायन कर रहे हैं, जिससे जमीन बंजर हो रही है। बढ़ते शहरीकरण से खेती योग्य भूमि घट रही है। पलायन रोकने के लिए हमने पलायन आयोग का गठन किया है और पर्वतीय जिले पौड़ी में ही इसका मुख्यालय बनाया है। प्रदेश से बाहर रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडियों से हमने अपील की है, घौर आवाए अपणा गौं का वास्ता कुछ कराण् यानी अपने गांव लौटो और गांव के विकास के लिए कुछ करो। हमने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प लिया, जिस पर हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसलिए पारंपरिक खेती के साथ किसानों को त्वरित फायदा देने वाली नकदी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड को ऑर्गेनिक स्टेट के तौर पर विकसित करने का लक्ष्य दिया है। हमें उम्मीद है कि एक सुनियोजित कार्ययोजना के तहत उत्तराखंड को ऑर्गेनिक स्टेट में तब्दील करने में सफल होंगे। पर्वतीय क्षेत्रों में खेती को आबाद करना जरूरी है। यहां की जलवायु और उर्वरता को ध्यान में रखकर क्लस्टर बेस्ड फार्मिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में मटर, गोभी, टमाटर, मिर्च, लहसुन की जैविक खेती से धीरे- धीरे किसानों की आय में सुधार होने लगा है। मुझे विश्वास है चकबंदी अपनाने के बाद किसानों की स्थिति और बेहतर होगी। किसान की लागत कम करने के उद्देश्य से एक लाख तक का ऋण दो फीसदी ब्याज दर पर दिया जा रहा है। भ्रष्टाचार किसी भी समाज के लिए घातक है। भ्रष्टाचार मुक्त भारत के लिए भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड बनना जरूरी है। इसलिए हम एक ऐसी व्यवस्था का निर्माण करना चाहते हैं, जहां भ्रष्टाचार करने का मौका ही न मिले।


पर्यटन उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ और रोजगार पैदा करने का सबसे बड़ा जरिया है। सोचिए, जिस राज्य के पास 17 पर्वत चोटियां, 51 अलग-अलग संस्कृतियां, 89 छोटी-बड़ी नदियां, 111 सुरम्य झील और ताल, 151 वन्यजीव संपदा से भरपूर स्पॉट और सैकड़ों मठ-मंदिर हों, वहां से पलायन की क्या मजबूरी है! दुर्भाग्यवश पलायन उत्तराखंड की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। मगर संभावनाओं के द्वार भी यहीं से खुलते हैं। तीर्थाटन, पर्यटन, योग, अध्यात्म और एडवेंचर को आधार बनाकर हम बड़े पैमाने पर पर्यटकों को आकर्षित कर सकते हैं। पर्यटन की दृष्टि से नैनीताल और मसूरी आज भी पर्यटकों की पहली पसंद हैं। चूंकि हमारे पास प्रकृति का अनमोल खजाना है, इसलिए हमने 13 जिलों में 13 नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित करने का कदम उठाया है। योग, संस्कृति और आयुर्वेद के जरिये हम इस राज्य को नई पहचान दिलाना चाहते हैं। इसलिए संस्कृति ग्राम, आयुष ग्राम की स्थापना की जा रही है। होम स्टे योजना को बढ़ावा दिया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि पर्यटन के जरिये ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा सके। इस साल चार धाम यात्रा में रिकॉर्ड 23 लाख से अधिक यात्री आए। अकेले केदारनाथ धाम में पिछले साल के मुकाबले इस साल डेढ़ लाख ज्यादा श्रद्धालु आए। जल्द ही दुनिया को एक नई केदारपुरी दिखेगी, जो पौराणिकता और आधुनिकता का संगम होगी। नई केदारपुरी के निर्माण से आने वाले वर्षों में चार धाम यात्रियों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि होने की संभावना है। इसका फायदा निश्चित रूप से स्थानीय जनता को मिलेगा।


उत्तराखंड में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यहां कुल भूमि का दो तिहाई वन क्षेत्र है। गंगोत्री से उत्तरकाशी तक करीब 4,000 वर्ग किमी क्षेत्र इको सेंसिटिव जोन में आता है। एक अनुमान के मुताबिक, फॉरेस्ट क्लीयरेंस की जटिलताओं के चलते परियोजनाओं की लागत कई बार 27 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इन सब चुनौतियों के बावजूद केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय के चलते चार धाम ऑल वेदर रोड और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना राज्य के विकास को नई गति देंगी। इन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण और वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में तेजी लाई गई है।


रोजगार उत्तराखंड के लिए अहम मुद्दा है। राज्य में उद्योगों की संभावना सीमित क्षेत्रों तक है। सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम के जरिये सिडकुल इकाइयों में करीब 22,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया गया है। इसके साथ स्वरोजगार को प्रोत्साहित कर ज्यादा से ज्यादा युवाओं को अपनी जमीन से जोड़ने की कोशिश हुई है। मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि हमारे प्रदेश के कई युवाओं ने अपने प्रयासों से पहाड़ में किसानों की दशा बदलने और पलायन रोकने की दिशा में पहल की है।
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