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रोजगार हासिल करने का कौशल

जयंतीलाल भंडारी Updated Tue, 03 Jul 2018 05:53 PM IST
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जयंतीलाल भंडारी
मानव संसाधन से संबंधित शोध के लिए ख्याति प्राप्त वैश्विक संगठन 'मैन पावर ग्रुप' ने अपने 'टैलेंट शार्टेज सर्वे 2018' में कहा है कि दुनियाभर के कोई 45 प्रतिशत नियोक्ता इस समय कार्य के लिए उपयुक्त प्रतिभाओं की कमी का सामना कर रहे हैं। दुनिया में प्रतिभाशाली कर्मियों की कमी पिछले 12 साल के रिकॉर्ड स्तर पर है।


दुनिया की सबसे अधिक युवा आबादी रखने वाला भारत भी प्रतिभाओं की कमी वाले शीर्ष 10 कमजोर देशों में शामिल है। भारत में 56 फीसदी नियोक्ताओं को रिक्त पदों पर काबिल कर्मचारी नहीं मिला पा रहे हैं। इस रिपोर्ट के बाद देश के रोजगार परिदृश्य पर दो जरूरतें उभरकर दिखाई दे रही हैं। पहली, यह है कि भारत में रोजगार बाजार और नियोक्ताओं के लिए कौशल प्रशिक्षण, तकनीकी विकास एवं संचार कौशल से सुसज्जित नई पीढ़ी तैयार की जानी चाहिए। देश की दूसरी बड़ी रोजगार जरूरत बढ़ते हुए रोबोटों के कारण रोजगार के नए अवसरों में कमी आने से उत्पन्न हो रही चुनौतियों का सामना करने की है। 


गौरतलब है कि देश में बेरोजगारी से संबंधित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षणों में यह तथ्य उभरकर सामने आ रहा है कि देश की जनसंख्या के करीब दस फीसदी लोग पूर्ण-मौसमी बेरोजगार एवं शिक्षित-अशिक्षित बेरोजगार के रूप में दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने अपनी नई रोजगार रिपोर्ट में कहा है कि भारत 2018 में दुनिया का सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाला देश दिखाई दे रहा है।


संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओइसीडी) ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट 2018 में कहा है कि यद्यपि भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दुनिया के अधिकतर देशों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन भारत में रोजगार वृद्धि दर अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ पा रही है। भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के श्रम ब्यूरो के सर्वे 2018 में मालूम हुआ है कि देश में बेरोजगारी दर पिछले पांच वर्ष के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। 


ऐसे में छलांगें लगाकर बढ़ रही नौकरियों की जरूरतों के बीच देश और दुनिया में रोबोटों की तेजी से बढ़ती संख्या के कारण भी नई पीढ़ी के समक्ष रोजगार की चिंताएं बढ़ी हैं। एशियाई विकास बैंक ने अपनी रोबोटिक्स व कृत्रिम मेधा (एआई) रिपोर्ट 2018 में कहा है कि रोबोटिक्स जैसी नई प्रौद्योगिकियों के आने से भारत सहित विकासशील देशों के श्रमिकों के रोजगार की रक्षा के लिए उचित नीति बनाई जाना जरूरी है।


इसमें कहा गया है कि युवाओं को नए दौर के कौशल प्रशिक्षण से सुसज्जित किया जाए। इस परिप्रेक्ष्य में पिछले दिनों इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय ने तकनीकी क्षेत्र की कंपनियों के संगठन नैस्काम के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), वर्चुअल रियल्टी, रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन इंटरनेट ऑफ थिंग्स, बिग डाटा एनॉलिसिस, क्लाउड कम्प्यूटिंग, सोशल मीडिया-मोबाइल जैसे आठ नए तकनीकी क्षेत्रों में 55 नई भूमिकाओं में वर्ष 2020 तक 90 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने का जो अनुबंध किया है, उसे कारगर तरीके से कार्यान्वित करने की जरूरत है। 


निस्संदेह हमें देश और दुनिया में भारत के कौशल प्रशिक्षित युवाओं की बढ़ती हुई मांग पर ध्यान देना होगा। विश्व बैंक की वैश्विक रोजगार से संबंधित रिपोर्ट में भी कहा गया है कि दुनिया के अधिकांश विकसित और विकासशील देशों में भारत के कौशल प्रशिक्षित युवाओं की मांग बढ़ रही है। देश में भी मेक इन इंडिया की सफलता के लिए कौशल प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत दिखाई दे रही है।
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