फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

पड़ोस: पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता और बांग्लादेश में कट्टरपंथी उन्माद, भारत से अतिरिक्त सतर्कता की मांग

अमर उजाला Published by: लव गौर Updated Mon, 22 Dec 2025 07:04 AM IST

सार

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी को भ्रष्टाचार मामले में मिली सजा, वहां फैली गहरी राजनीतिक अस्थिरता को और गहरा कर सकती है। दूसरी तरफ बांग्लादेश में भी कट्टरपंथी उन्माद अपने चरम पर है। यह स्थिति भारत से अतिरिक्त सतर्कता की मांग करती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी - फोटो : पीटीआई


भारत की दृष्टि से देखें, तो उसके दोनों प्रमुख पड़ोसी देशों में बढ़ती अस्थिरता न केवल अवांछनीय है, बल्कि क्षेत्रीय शांति और विकास के लिए भी गंभीर चुनौती है। इमरान खान का मामला पाकिस्तान में सत्ता, न्यायपालिका और सेना के जटिल रिश्तों को एक बार फिर उजागर करता है। दरअसल, 2018 में, जब इमरान खान सत्ता में आए, तो आधिकारिक यात्राओं के दौरान उन्हें करोड़ों रुपये के उपहार मिले। इमरान खान पर यह आरोप लगा कि उन्होंने तोशाखाना में उपहार जमा तो कराए, फिर उन्हें सस्ते दाम पर खरीद लिए और इस प्रक्रिया में कानूनों में मनचाहे बदलाव भी किए।


गौरतलब है कि फिलहाल इमरान पर सौ से भी ज्यादा मामले दर्ज हैं और वह अगस्त, 2023 से जेल में बंद हैं। दरअसल, पाकिस्तानी पूर्व प्रधानमंत्री के साथ अप्रैल, 2022 में सत्ता से बेदखल होने के बाद जो कुछ हो रहा है, उससे यही संकेत मिलता है कि देश में राजनीति सड़कों से अधिक अदालतों में लड़ी जा रही है। भारत के लिए यह स्थिति इसलिए अधिक चिंताजनक है, क्योंकि इतिहास गवाह है कि राजनीतिक अस्थिरता के दौर में पाकिस्तान की सत्ता संरचना अक्सर गैर-लोकतांत्रिक ताकतों के हाथों मजबूत होने लगती है, जो पाकिस्तानी सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर के उभार की शक्ल में दिख भी रहा है। ऐसे समय में, भारत-विरोधी बयानबाजी, नियंत्रण रेखा पर तनाव और आतंकी समूहों को मौन समर्थन जैसी प्रवृत्तियां तेज होने लगती हैं।


दूसरी ओर, बांग्लादेश में जिस तरह से कट्टरपंथ हावी हो रहा है और पाकिस्तान से उसकी नजदीकी बढ़ रही है, वह भी भारत के लिए चिंता का विषय है। ‘पड़ोस पहले’ भारत की विदेश नीति का आधार है, लेकिन इसकी पूर्वशर्त है कि पड़ोस पहले स्थिर भी हो। दक्षिण एशिया पहले ही आर्थिक एकीकरण और क्षेत्रीय सहयोग के मामले में दुनिया के सबसे पिछड़े इलाकों में शामिल है, ऐसे में पाकिस्तान और बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता विकास के बचे-खुचे अवसरों को भी खत्म कर सकती है। भारत पड़ोसियों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, पर उसे अपनी सुरक्षा, आर्थिक हितों और कूटनीतिक प्राथमिकताओं के प्रति सतर्क रहना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next