नई सरकार को बने हुए एक महीना हो चुका है और आते ही वह अपने काम में जुट गई है। अब समय बजट का है, जिसे लेकर काफी उम्मीदें हैं और इस आशावाद की पर्याप्त वजहें भी हैं। सरकार के सामने चुनौती है कि वह कितनी तेजी से अर्थव्यवस्था की गति तेज करती है, आंतरिक ग्रोथ बढाती है और आर्थिक तौर पर दुनिया में एक बड़ी ताकत के तौर पर उभारकर दिखाती है। भारत को मध्य आय अर्थव्यवस्था बनने के लिए सात फीसदी की आर्थिक विकास दर से आगे बढ़कर इसे दोहरे अंकों पर ले जाकर सबको रोजगार देने पर ध्यान देना होगा। अभी सात फीसदी की वृद्धि दर बेशक अच्छी महसूस हो रही हो, लेकिन विकासशील देश को गरीबी से उबरने के लिए ज्यादा वृद्धि चाहिए। लिहाजा सात फीसदी की विकास दर को 10 फीसदी पर पहुंचना चाहिए, फिर साल दर साल इसे आगे बढ़ना चाहिए।
राष्ट्रीय और वैश्विक तौर पर चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन अवसर भी उतने ही बड़े हैं। भारत इस साल दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। तब भारत की अनुमानित अर्थव्यवस्था तीस खरब डॉलर से ज्यादा की हो सकती है। यह इस पर निर्भर करेगा कि हम अपने दरवाजे कारोबार के लिए कैसे खोलते हैं और स्थानीय उद्योगों को कैसे मजबूत करते हैं। भारतीय उद्योग और विदेशी निवेश, दोनों के लिए जरूरत ऐसी होनी चाहिए कि रोजगार सृजित हो, जो 45 साल में सबसे नीचे है और जीडीपी 2018-19 में 6.8 फीसदी पर है। सरकार इन बड़ी चुनौतियों से वाकिफ भी है, इसीलिए सरकार गठित होने के एक हफ्ते के भीतर ही इसे लेकर दो कमेटियां गठित कर इस पर खास ध्यान देने का संकेत दिया गया।