वैसे तो बुखार कई किस्म के होते हैं-वायरल, मलेरिया, टायफाइड, निमोनिया, डेंगू आदि। इस समय स्वाइन फ्लू का आतंक है। लेकिन एक अन्य बुखार के बारे में कोई भी जानकारी एलोपैथी, होम्योपैथी, आयुर्वेद आदि में नहीं मिलती। यह एग्जाम फीवर यानी परीक्षा के समय होने वाला बुखार है।
कारण : जैसा कि नाम से ही जाहिर है, यह बुखार सामान्यतः मार्च-अप्रैल के महीनों में स्कूल-कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी के छात्रों को अपने शिकंजे में कस लेता है। इस ज्वर से पीड़ित होने की आशंका उन विद्यार्थियों में अधिक पाई जाती है, जो पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान शिक्षकों, कक्षाओं एवं पाठ्यपुस्तकों से सम्मानजनक दूरी बनाए रखते हैं, और समय का सदुपयोग कैंटीन, साइबर-कैफे, पार्क, सिनेमा हॉल आदि स्थानों पर मौज-मस्ती करने या मोबाइल कंपनियों की अनलिमिटेड फ्री मैसेजेज, सस्ती-आउटगोइंग, मुफ्त-इनकमिंग आदि सेवाओं का लाभ उठाने जैसे मांगलिक कार्यों में करते हैं।
लक्षण : ऐसे बुखार में सामान्यतः किताबों के दर्शन मात्र से रोगी की कंपकंपी छूटने लगती है, और दो-चार पन्ने पलटते ही माथे पर पसीने की बूंदें उभर आती हैं!
सामान्य इलाज : एग्जाम फीवर ग्रस्त युवा पहले यह सुनिश्चित करें कि उनके पास किसी भी विषय की कोई भी टेक्स्ट बुक अथवा डिटेल्ड नोट्स न हों। वे वक्त गंवाए बिना, सर्वत्र उपलब्ध एग्जाम नोट्स रूपी गुटके कॉमा-फुलस्टॉप सहित कंठस्थ करना शुरू कर दें। मेमोरी में कुछ बाइट्स फिर भी फ्री रह जाएं और जेब अनुमति प्रदान करे, तो विभिन्न प्रकाशकों द्वारा जनहित में जारी किए गए गेस पेपरों का भी सेवन किया जा सकता है।
चेतावनी : इन गेस पेपरों की गैस बिना किसी पूर्व सूचना के कभी भी गैस बनकर हवा में उड़ सकती है।
शाही इलाज : वे रोगी, जिन पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा है, वे परीक्षा केंद्र अधीक्षक नामक प्राणी से उपरोक्त इंगित 'शर्तिया कामयाब' नुस्खे द्वारा सामंजस्य बिठा लें, तो इस बुखार से उनकी मुक्ति का मार्ग शीघ्रातिशीघ्र प्राप्त हो सकता है।