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मां की डांट अच्छी होती है जी

Sun, 13 Apr 2014 06:00 PM IST
सहीराम
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मां की डांट अच्छी होती है जी। अगर वक्त पर पड़ जाए, तो और अच्छी होती है। वरना तो लोग खामख्वाह गा-गाकर कहने लगते हैं, अम्मा देख, तेरा मुंडा बिगड़ा जाए। कुछ लोग जो मां के प्यार में बिगड़ जाते हैं, वे बाद में पछताते हैं कि हाय, हमें उसी वक्त मां की डांट क्यों नहीं पड़ी, जब हम बिगड़ रहे थे। हालांकि जिन्हें बचपन में मां की डांट पड़ती रही, वे उम्र बढ़ जाने के बाद भी अक्सर उसे याद करते रहते हैं कि अम्मा आकर डांट देती, तो कितना अच्छा होता। जो मां की डांट पहले नाराजगी पैदा करती है, वह बाद में सेंटी भी कर देती है।
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इधर देश के एक ऐसे युवा नेता को मां की डांट पड़ गई, जो एक बड़े खानदान से हैं और यह खानदान पक्ष-विपक्ष, दोनों तरफ फैला हुआ है। विपक्ष के इस नेता ने सरकारी पक्ष के अपने रिश्ते के भाई की तारीफ कर दी थी। इससे इस खानदान को चाहनेवाले अनेक लोग सेंटी हो उठे। उनके मुंह से बेसाख्ता निकल गया कि भाई हो, तो ऐसा।

पर खुद उनकी मां को यह सब पसंद नहीं आया। उन्होंने बेटे को डांट दिया कि अपने भाई की तारीफ करते हुए उन्हें दिल से नहीं, दिमाग से काम लेना चाहिए था। हालांकि वही मां अपनी भतीजी के चुहल पर अब उतनी ही आक्रामकता से अपने बेटे के बचाव में आ गई है। इससे यही पता चलता है कि मां चाहे तो बच्चे को डांट सकती है, पर दूसरा कोई उसे न डांटे। अपने बेटे के दिल और दिमाग पर टिप्पणी सिर्फ मां ही कर सकती है, दूसरा कोई नहीं, चाहे वह दीदी ही क्यों न हो!
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मां को हमेशा इस बात की चिंता सताती रहती है कि अगर बच्चे ने दिल से काम लिया, तो उसे अच्छा दहेज नहीं मिलेगा। अगर बच्चे ने दिल की मानी, तो वह न साइंस पढ़ पाएगा और न ही डॉक्टर-इंजीनियर बन पाएगा। इसके बजाय बेटा दिमाग से काम लेगा, तो जिंदगी संवर जाएगी। सो घरवालों की हमेशा कोशिश होती है कि वे दिल की न चलने दें और बच्चा हमेशा अपना दिमाग ही चलाए। दिमाग चलाने से करियर बन जाता है। उम्मीद है कि उन नेता पर भी मां की डांट का असर पड़ेगा और उनका करियर उज्ज्वल होगा।
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