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सौराष्ट्र की तस्वीर बदल देगी साउनी परियोजना

Wed, 31 Aug 2016 07:44 PM IST
अवधेश कुमार
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अवधेश कुमार
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प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी की गुजरात की यह पहली रैली थी। जाहिर है, उसकी ओर देश भर का ध्यान जाना आवश्यक था। वैसे भी पाटीदार आरक्षण आंदोलन तथा दलितों की पिटाई के विरोध में हंगामे के कारण गुजरात देश की सुर्खियों में रहा है। लोग यह जानना चाहते थे कि आखिर मोदी इस पर क्या बोलते हैं। हालांकि सरकारी कार्यक्रम होने के कारण यहां ज्यादा राजनीतिक बातचीत की गुंजाइश नहीं थी, फिर भी जिस जल परियोजना का मोदी ने लोकार्पण किया, उसमें पूर्व सरकारों की आलोचना तथा अपनी उपलब्धियों को बताने की स्वाभाविक ही गुंजाइश थी। दरअसल, नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध के ऊपर से समुद्र में बह जाने वाले जल के उपयोग को ध्यान में रखकर सौराष्ट्र नर्मदा अवतरण सिंचाई योजना (साउनी योजना) बनी थी, जो मोदी के दिमाग की उपज थी। इस योजना के अंदर सौराष्ट्र के 11 जिलों के 115 छोटे बड़े बांधों के जलाशयों को सरदार सरोवर बांध के अतिरिक्त जल से भरा जाना है। मोदी ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में वर्ष 2012 में करीब 1,200 करोड़ रुपये की इस योजना का शिलान्यास किया था।
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जाहिर है, यह मोदी की निजी उपलब्धि है। हम जानते हैं कि सौराष्ट्र पटेलों का गढ़ है। पाटीदार आंदोलन के कारण आम धारणा यह बनी है कि पटेलों का बड़ा वर्ग भाजपा से नाराज चल रहा है। ऐसे क्षेत्र में योजना के पहले चरण का लोकार्पण तथा प्रधानमंत्री बनने के बाद जनता को संबोधन करने का पहला मौका। इसका राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करना स्वाभाविक है। कांग्रेस ने कार्यक्रम की आलोचना करके इसे राजनीतिक मोड़ दे ही दिया था। प्रधानमंत्री ने अपने ढंग से इसका जवाब दिया। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि टुकड़े फेंकने से चुनाव जीते जा सकते हैं, पर देश नहीं चलाया जा सकता।

दरअसल, मोदी सौराष्ट्र और पूरे गुजरात के लोगों को यह समझाना चाहते थे कि उन्होंने उनके कल्याण के लिए किस तरह काम किया और आज उसका परिणाम सामने है। उदाहरण के लिए, उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद तीन साल किसानों को यह समझाने में बीत गए कि उनके लिए पानी सबसे महत्वपूर्ण है। लोगों को यह समझ में आया और धीरे-धीरे उनका सहयोग मिलने लगा। इसी का परिणाम है कि आज गुजरात में उन जगहों पर आसानी से पानी उपलब्ध है, जहां पहले इसकी कल्पना तक नहीं थी। यह सचाई है कि सौराष्ट्र में पेयजल और सिंचाई का संकट था, तो कच्छ में धूल के सिवा कुछ नजर नहीं आता था। आज कच्छ से 17 हजार टन केसर आम का निर्यात हो रहा है। सीमा की रक्षा करने वाले जवानों को पीने का पानी ऊंटों पर लाना पड़ता था, आज पाइपलाइन से उन्हें सीमा तक नहाने का पानी मिल रहा है।
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बरसात के दिनों में सरदार सरोवर नर्मदा बांध के ओवरफ्लो के कारण काफी मात्रा में पानी समुद्र में बह जाता है। इस योजना के तहत समुद्र में बह जाने वाले इसी पानी के करीब एक तिहाई हिस्से को पाइपलाइन के जाल के जरिये वहां से चार से पांच सौ किलोमीटर दूर स्थित सौराष्ट्र के बांधों तक पहुंचाया जाना है। करीब तीन मीटर व्यास वाली पाइपलाइन के जरिये विभिन्न महत्वपूर्ण बांधों को आपस में जोड़ा जाएगा। देखना होगा कि मोदी द्वारा सौराष्ट्र को जल पहुंचाने की इस अपने किस्म की अकेली योजना का वहां के लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है। आखिर अगले वर्ष चुनाव है और तब तक हो सकता है, इसका एक चरण पूरा हो जाए।
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