जो हाथ नहीं मिलाना चाहते, उनके लिए ‘कोहनी’ हाजिर है। हाथ मिलाने से होने वाली बीमारियों से बचने के लिए यूरोप के कुछ देश कोहनी आगे कर रहे हैं। उनका मानना है कि इस तरह अभिवादन भी हो जाएगा और बीमारी भी नहीं होगी। ‘कोहनी से कोहनी मिला’ इन देशों में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पर मुझे लगता है हमारे देश में कोहनी नहीं मिल पाएगी। क्योंकि यहां तो कोहनी मारने के काम में आती है। लगता है, यूरोप वालों को कोहनी मारने के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। वरना वे इस तरह का तरीका ईजाद ही नहीं करते। कोहनी मारते हुए आप खुश तो हो नहीं सकते। यह मारी ही इसलिए जाती है कि सामने वाले को जरा महसूस तो हो। यहां तो कोहनी मारने का मौका मिला नहीं कि दे मारी...! जो पहले मार दे, वही मीर! हमारे यहां कोहनी मारकर आप दुश्मन तो बना सकते हैं, दोस्त नहीं बन सकते।
वैसे हाथ का विकल्प हमने बहुत पहले ही खोज लिया था। बुफे में जब लकदक प्लेट एक हाथ से पकड़े होते हैं और दूसरे हाथ से कोस रहे होते हैं, तो क्या हाथ मिलाने के लायक रह जाते हैं? सामनेवाला भी तो इसी अवस्था को प्राप्त रहता है! ऐसे में विद्वानों और जानकारों ने यह खोज निकाला कि जूठे हाथ को उलटी तरफ से सामने वाले के जूठे हाथ की उलटी तरफ लगाया जाए! पौंचा मिलाना भी कह सकते हैं आप! जब अभिवादन की यह हरकत जूठन की वजह से संपन्न की जा सकती है, तो सामान्य हालत में ऐसा करने में हर्ज ही क्या है। आम बोलचाल की भाषा में इसे ‘हैंडल मिलाना’ कहते हैं। लेकिन यह प्रथा सिर्फ बुफे तक ही सीमित है।
यूरोप वाले शायद हमारी तरह से नहीं खाते होंगे। यही वजह है कि उन्होंने इस तरीके पर गौर नहीं किया। कांटे-छुरी से खानेवाले तो कोहनी तक ही पहुंच सकते हैं, पौंचा तक पहुंचना उनके बस की बात नहीं है। जिन देशों में उंगलियां चाट-चाटकर चटखारे लिए जाते हैं, वहां हमारी यह पद्धति कारगर साबित हो सकती है। हां, अगर कोई विदेशी मिल गया, तो हम कोहनी मारने में भी पीछे नहीं रहने वाले हैं। यह तो हमारे उलटे हाथ की बात है। कोहनी मिले या पौंचा...बस हाथ को अब आराम मिलना चाहिए। वैसे सारी दुनिया हाथ के पीछे हाथ धोकर पड़ गई है, तो उम्मीद करें कि हाथ मिलाना सामाजिक अपराध बन कर रहेगा। हो सकता है, ऐसा करने वाले को जेल की हवा भी खानी पड़ जाए। हत्या के बाद हाथ मिलाना ही सबसे जघन्य अपराध हो जाए...!