उधो, लोकसभा चुनाव किसी पहेली से कम नहीं है। शुरुआत में पार्टी जिस नेता के घोटालों पर पर्दा डालती है, वही नेता बाद में पार्टी के लिए कलंक हो जाता है।
लोकसभा चुनाव में अभी एक साल है, मगर सब की निगाह 10, जनपथ के फैसले पर है। जिन पार्टियों ने एडवांस में उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं, उनकी फजीहत होनी ही है। देश की जनता अपने नेता के साथ एक साल तक रोमांस नहीं कर सकती।
उधो, उन राज्यों में समय पूर्व घोषित लोकसभा प्रत्याशियों की नाक में दम है, जिनमें कोई दूसरी पार्टी सत्तारूढ़ है। सत्तारूढ़ दल इन विपक्षी नेताओं के प्रतिष्ठानों पर छापे डलवा रहा है, ताकि वे चुनाव मैदान से हट जाएं। कल अगर नया उम्मीदवार भी चुनाव लड़ने से इनकार कर दे, तो फिर प्रत्याशी बदल जाएगा!
उधो, किसी पार्टी में चुनाव जीतने की क्षमता रखने वाले स्थानीय नेता एक या दो ही होते हैं। दूसरे दल की राज्य सरकार विपक्षी प्रत्याशियों के पीछे हाथ धोकर पड़ जाए, तो विपक्षी दलों में चुनाव लड़ने वालों का टोटा पड़ जाता है!
उधो, देश की दो बड़ी पार्टियों के नेता मौज में हैं।
इन पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा ‘एडवांस’ में नहीं की है। आचार संहिता लगने के बाद ये पार्टियां नेता का नाम फाइनल करती हैं। ऐसी स्थिति में राज्यों की सत्तारूढ़ दबंग सरकारें इनके प्रत्याशियों को तंग नहीं कर पातीं। चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद किसी नेता के घर छापा पड़ने की संभावना न के बराबर हो जाती है।
उधो, आप तो जानते ही हैं कि इस देश में अनियमितताएं कदम-कदम पर फैली पड़ी हैं! थ्योरी यह है कि जिन पार्टियों के मुखिया आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई से रूबरू हैं, वे ही पार्टियां छोटे-छोटे नेताओं के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले दर्ज करवा रही हैं! इसे चुनाव पूर्व तैयारी कहा जाता है।
उधो, एक साल तक मतदाताओं को साधना आप द्वारा सुझाए जा रहे ‘योग’ से कठिन है। लोग चाहते हैं कि ‘एडवांस’ में घोषित लोकसभा प्रत्याशी बिजली-पानी की समस्या हल कर दे! कानून-व्यवस्था पटरी पर ला दे! उधो, हमारी पार्टी के जासूस हमारे खिलाफ आलाकमान को फीडबैक दे रहे हैं।
साल भर हम प्रचार करें और चुनाव कोई दूसरा लड़े, इसकी संभावना लगातार बनी हुई है। उधो, अब हम समझ गए कि लौकिक प्रेम प्रवंचना के सिवा कुछ नहीं है। आपका योग श्रेष्ठ है। बावजूद इसके हम चुनाव लड़ेंगे, क्योंकि यही तो राजनीति है!