आजादी की लड़ाई के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल की छवि एक मुस्लिम विरोधी की बनाई गई। यह गलत छवि उनके प्रति आकर्षण का एक बड़ा कारण भी बनी। कुछ दिन पहले सरदार की पुण्यतिथि के अवसर पर भी इसका आभास कराया गया। सरदार अगर मुस्लिम विरोधी होते, तो वह महात्मा गांधी के प्रिय शिष्य न बन पाते। नेहरू और पटेल के बीच कई विषयों पर गंभीर मतभेद थे और दोनों के इस्तीफा देने की भी नौबत आई। पर मुस्लिम मुद्दा इसमें नहीं था।
खुद पटेल अपने बारे में क्या सोचते थे? राजमोहन गांधी ने अपनी किताब पटेल : अ लाइफ में लिखा है कि कमांडर इन चीफ रॉय बुचर स्वतंत्रता दिवस के ढाई महीने पहले 31 मई को देहरादून में उनसे मिले थे। पटेल ने उनसे कहा, ' मैं कुछ मसलों के बारे में आपको बताना चाहता हूं।... बहुत सारे लोग समझते हैं कि मैं मुस्लिम विरोधी हूं। यह बात बिल्कुल नहीं है। मैं पूरे भारत में मुसलमानों की सलामती और भले की गारंटी करने को तैयार हूं।'
राजनीतिक लाभ की दृष्टि से वांछित निष्कर्ष निकालने के लिए इस तथ्य की प्रायः अनदेखी कर दी जाती है कि संविधान सभा की अल्पसंख्यक विषयक सलाहकार समिति के अध्यक्ष पटेल ही थे। संविधान ने अल्पसंख्यकों की भाषा, लिपि, संस्कृति की रक्षा की गारंटी दी।
अल्पसंख्यकों से संबंधित संविधान के अनुच्छेदों 25, 26, 27, 28, 29 और 30 के अस्तित्व का बड़ा श्रेय तो पटेल को ही दिया जाएगा। जब पाकिस्तान से जिंदा- मृत हिंदुओं और सिखों की गाड़ियों का तांता लगा हुआ था और इधर से लाखों मुसलमान पाकिस्तान जा रहे थे, तब गृह मंत्री पटेल ही थे।
दिल्ली में भी मारकाट मची हुई थी। पटेल ने नेहरू और माउंटबेटन के साथ बैठक में कहा था, 'दिल्ली लाहौर बन जाए, यह मैं कतई बर्दाश्त नहीं करूंगा।' पटेल ने सीधे गोली मार देने का आदेश जारी कर दिया। उसी दिन पुरानी दिल्ली स्टेशन पर चार हिंदू दंगाइयों को गोली मार दी गई।
पटेल को मुस्लिम विरोधी साबित करने के लिए अमृतसर और लखनऊ के उनके भाषणों का हवाला दिया जाता रहा है। पटेल ने अमृतसर में कहा था, मैं आपसे एक अपील करने आया हूं। शहर छोड़कर जा रहे मुसलमानों की हिफाजत का वचन दें। अगर कोई बाधा डालेंगे, तो हमारे शरणार्थियों की हालत दुखद हो जाएगी।
लियाकत अली खान ने नेहरू को फोन कर चिंता जताई। गांधी जी से शिकायत की गई कि पटेल मुसलमानों के पाकिस्तान जाने के विचार को प्रोत्साहित कर रहे हैं। पटेल ने गांधी जी से कहा, 'जिन मुसलमानों की निष्ठा भारत के प्रति नहीं है, उन्हें चले जाना चाहिए। और मैं यह कहे बिना नहीं रह सकता कि मुसलमानों का बहुमत निष्ठावान नहीं है।'