यह दो महीने पहले की बात है। सितंबर, 2024 में रूस-यूक्रेन युद्ध के गोला-बारूद की आवाजें कुछ धीमी पड़ी थीं। जंग जारी थी, मगर निगाहें अमेरिका की तरफ थीं, जहां नवंबर में नए राष्ट्रपति के आगमन के बाद यूक्रेन का मुस्तकबिल तय होना था। इस बीच रूस और यूक्रेन ने करीब 203 युद्धबंदियों को छोड़ दिया। यह काम संयुक्त अरब अमीरात की मध्यस्थता में हुआ था। रूस ने यूक्रेन को वे बंदी लौटाए, जो कुर्स्क में पकड़े गए थे, जबकि यूक्रेन ने जो रूसी बंदी वापस किए, वे एजोवस्ताल के स्टील प्लांट पर रूसी हमले के दौरान पकड़े गए थे। इस खबर से एजोवस्ताल के कारखाने पर रूस और यूक्रेन की जंग सुर्खियों में उभर आई। युद्धों का इतिहास जिस तरह पहले विश्वयुद्ध में सोम्म की लड़ाई या दूसरी बड़ी जंग में स्टालिनग्राड का मोर्चा या फिर ओकीनावा में अमेरिका व जापान की जंग को याद करता है, उसी तरह से अगली सदियां एजोवस्ताल की जंग को याद करेंगी।
उन सुर्खियों की धमक अभी ताजा है, जब यूक्रेन पर रूस के हमले के 60वें दिन जंग मारियोपोल में सिमट गई थी। एजोवस्ताल का मेटालर्जिकल संयंत्र सबसे बड़ा युद्ध क्षेत्र बन गया था। यहां 86 दिनों तक अभूतपूर्व जंग चली। अंतत: मई, 2022 में एजोवस्ताल के लड़ाकों ने हथियार डाल दिए। एजोवस्ताल स्टील प्लांट करीब 11 किलोमीटर इलाके में फैला है। यह यूक्रेन का तीसरा सबसे बड़ा धातु संयंत्र है, जो जंग से पहले तक सालाना करीब 60 लाख टन पिग आयरन और 70 लाख टन स्टील समेत कई अन्य इस्पात उत्पाद बनाता था...।
टाइम मशीन तैयार है। विराजिए अपनी सीट पर, हम आपको दुनिया के सबसे रोमांचक स्टील कारखाने की तरफ ले चलते हैं, जहां खून के निशान अभी ताजा हैं। हमें पहुंचना है 19वीं सदी के अंत में, जब यह कारखाना तामीर हुआ था। टाइम मशीन तेजी से 12वीं सदी की तरफ जाएगी, जहां से हम 19वीं सदी की ओर बढ़ेंगे। यह अजोव सागर यानी सी ऑफ अजोव के किनारे है। इसी के नाम पर आगे एजोव लड़ाके खड़े होंगे, जो 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध में एजोवस्ताल के संयंत्र पर हमले के दौरान रूस से लोहा लेंगे। सी ऑफ अजोव का यह तटवर्ती इलाका आपको हैरान कर रहा होगा। यहां क्रीमिया के तातारों, नोगाई कबीलों, लिथुआनिआ के शासकों और मस्कॉवी शासन के बीच चली लंबी जंग के निशान दिख रहे हैं। 16वीं सदी की तरफ बढ़ते हुए आपको नजर आएगा कि इस इलाके में कितना खून-खच्चर हुआ है। तब मारियोपोल नाम का शहर आपको नजर नहीं आएगा, जिसका नाम 21वीं सदी में बार-बार सुना गया है। यह 18वीं सदी का मध्य है। रूस और तुर्किये की जंग के बाद यह इलाका रूसी साम्राज्य के नियंत्रण में आ गया है। रूस की रानी मारिया फेडरोवाना के नाम से यहां एक शहर बस रहा है। यहां कभी एक पुरानी यूनानी बस्ती भी थी, जिसे कुछ लोग मारियोपोल कहते थे। 19वीं सदी की तरफ बढ़ते हुए आपको दिख रहा होगा कि मारियोपोल में इतिहास ने इतनी करवटें ली हैं कि यहां रूसी, यूक्रेनी, तुर्क और तातार, यूनानी, आर्मेनियाई, यहूदी व बेलारूसी... सब एक साथ बस गए हैं। मारियोपल जैसे शहर कम ही होंगे, जिनके इतिहास में उद्योग, समृद्धि, कारोबार और युद्ध कुछ इस कदर गुंथे हुए हैं। टाइम मशीन की घोषणा को सुनिए, तब तक हम एजोवस्ताल की तरफ बढ़ते हैं। यात्रीगण कृपया ध्यान दें, मारियोपल शहर के नामों का भी अपना किस्सा है। सोवियत शासन उस वक्त शहरों के नाम बदलने के अभियान पर था, पुराने शहरों को कम्युनिस्ट नेताओं के नाम दिए जा रहे थे। नात्जी कहर के बाद मारियोपोल शहर को झानोव कहा गया। यह नाम स्थानीय कम्युनिस्ट नेता अंद्रेई झानोव के सम्मान में रखा गया था। 1989 में सोवियत संघ के विघटन के बाद यह वापस मारियोपोल हो गया।
अब हम 19वीं सदी के छोर पर हैं। यह यूक्रेन का खनिज समृद्ध डोनेट्स क्षेत्र है। यहां लोहे के पुराने उद्योग हैं, वह पुरानी-सी इमारत इल्यिच मेटालॉर्जिकल संयंत्र की है, अमेरिकी उद्यमियों रॉथेंस्टाइन और स्मिथ की यह मिल एजवोस्ताल की प्रेरणा बनेगी। आप देख रहे हैं, मारियोपोल का बंदरगाह तैयार है। डोनेट्स से मारियोपोल तक रेल लाइन बिछाकर सोवियत रूस ने अनाज और कोयले का निर्यात शुरू कर दिया है। टाइम मशीन अब कुछ ऊपर उड़ान भरेगी, क्योंकि नीचे पहला विश्वयुद्ध चल रहा है। इल्यिच मेटालॉर्जिकल संयंत्र में रक्षा उपयोग की कुछ मशीनें बन रही हैं।
यह बीसवीं सदी का दूसरा दशक है। मास्को में जोसेफ स्टालिन सत्ता संभाल चुके हैं। रूस की कुख्यात पहली पंचवर्षीय योजना पर अमल शुरू हो गया। इल्यिच के कारखाने को बड़े स्टील संयंत्र में बदला जा रहा है। क्रीमिया के समुद्री मार्ग से एजोव सागर के तट पर लोहा उतर रहा है। यूक्रेन विश्वस्तरीय धातु उद्योग का गढ़ बन गया है। पास में ही खारकोव का ट्रैक्टर संयंत्र और जेप्रोजिस्ताल का स्टील संयंत्र इसी दौरान बनाया गया है। यहां एक और बड़ी इस्पात कंपनी बन रही है। इस कंपनी को 2005 में भारतीय मूल के ब्रितानी उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल का आर्सेलर मित्तल समूह खरीदेगा। यह 1933 है। एजोवस्ताल की ब्लॉस्ट फर्नेस पिग आयरन उगलने लगी है। स्टालिन के सपने पर सोवियत सरकार के बजट से 29.2 करोड़ रूबल खर्च हुए हैं। अब सुर्खियों में है यह कारखाना। एजवोस्ताल पूर्वी यूक्रेन में सोवियत शासन का गौरव है।
अब आगे बढते हैं। दूसरे विश्वयुद्ध में हिटलर रूस पर चढ़ आया है। एजोवस्ताल को आनन-फानन रक्षा संयत्र में बदल दिया गया। यहां अब रूस के टी-34 टैंक, आर्मर्ड ट्रेन, हवाई बम, मोर्टार बैरल और टैंकों के स्टील के कवच बन रहे हैं। नात्जी रूस के स्टील गौरव एजोवस्ताल की तरफ बढ़ रहे हैं। नात्जियों को आता देख एजोवस्ताल के इंजीनियरों ने विशाल फैक्टरी को पूरी तरह खोल दिया है। एजोवस्ताल का संयंत्र 650 रेल वैगन और वाहनों में लादकर यूराल इलाके में भेज दिया गया है। नात्जियों और रूस के बीच भीषण जंग में एजोवस्ताल का मोर्चा टूट गया है। हिटलर की फौज ने इस संयंत्र को जर्मनी के मशहूर औद्योगिक घराने क्रुप को सौंप दिया है। क्रुप ने पूरी निर्ममता के साथ यहां काम शुरू कराने की कोशिश की, पर बचे-खुचे मजदूरों के विरोध के कारण यह मुमकिन नहीं हुआ। टाइम मशीन की स्क्रीन को टच कीजिए, आपको पता चलेगा कि क्रुप घराने के मालिक अल्फ्रेड क्रुप हिटलर के वार इकनॉमी मंत्री थे। इनकी फैक्टरियां नात्जी सेना के लिए साजो-सामान बनाती थीं। हिटलर के पतन के बाद क्रुप पर कंसंट्रेशन कैंप में उत्पीड़न और जघन्य अपराधों के लिए मुकदमा चलाया गया था। अब हम दूसरे विश्वयुद्ध के अंतिम दौर में हैं। यह 1943 है। रूस में हिटलर का मोर्चा टूट गया है। लौटती जर्मन सेना ने मारियोपोल के इस विशाल औद्योगिक कांप्लेक्स को तहस-नहस कर दिया है। फर्नेस, बैटरी यूनिट और कोकिंग प्लांट उड़ा दिए गए हैं। रूस की रेड आर्मी जब यहां पहुंचेगी, तो उसे धातु के ढेर के अलावा कुछ नहीं मिलेगा। मगर यह क्या! यूराल से संयत्र के हिस्से लाए गए हैं और दो साल के भीतर 1945 में एजोवस्ताल फिर से उठ खड़ा हुआ है। अब हम एजोवस्ताल के साथ 21वीं सदी की तरफ बढ़ते हैं। 1970 के दशक से गुजरते हुए आपको दिखेगा कि इस कारखाने में स्टील की कई नई तकनीकें बनी हैं। श्रमिक कल्याण के मामले में यह कारखाना उदाहरण बन गया है। यह 1990 है। सोवियत संघ का कुख्यात निजीकरण चल रहा है। यूक्रेन के ओलिगार्क रिंक अख्मेतोव ने एजोवस्ताल खरीद ली है। यह मेटइन्वेस्ट समूह का हिस्सा हो गई है। अख्मेतोव यूक्रेन की आर्थिक राजनीति की बड़ी शख्सियत हैं। टाइम मशीन मारियोपोल में अपना सफर खत्म करेगी। यह भुतहा शहर 21वीं सदी की सबसे बड़ी युद्ध विभीषिका है। एजोवस्ताल की उस भयानक जंग की तस्वीरें अब अखबारों और इंटरनेट पर आ रही हैं। ये तस्वीरें उन सैनिकों ने दी हैं, जिन्हें रूस ने इस हाल में छोड़ा है। एक बार फिर एजोवस्ताल के कारखाने ने इतिहास को निराश नहीं किया है। फिर मिलते हैं अगले सफर पर...