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उपन्यास के पन्ने: काउंट ड्रैकुला मरा नहीं था... लोक नायक और स्टोकर के पिशाच की छवि एक, रोमानिया के लोग हैरान

सेठ एस गोल्डश्लेगर, द न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 22 Sep 2024 06:10 AM IST

सार

आयरिश उपन्यासकार ब्रैम स्टोकर ने काउंट ड्रैकुला के बारे में अपनी क्लासिक थ्रिलर पुस्तक के अंतिम अध्याय में उस पिशाच को मार डाला था। वह पिशाच एक जीवित लाश थी, जो हर रात ट्रांसिल्वेनिया की जंगली पहाड़ियों में घूमती थी और दिन में अपने ताबूत में सो जाती थी। लेकिन एक थ्योरी कहती है कि वह मरा नहीं था।
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काउंट ड्रैकुला मरा नहीं था - फोटो : अमर उजाला


आयरिश उपन्यासकार ब्रैम स्टोकर ने काउंट ड्रैकुला के बारे में अपनी क्लासिक थ्रिलर पुस्तक के अंतिम अध्याय में पिशाच को मार डाला, जो एक जीवित लाश थी और रात में ट्रांसिल्वेनिया की जंगली पहाड़ियों में घूमती थी और दिन में अपने ताबूत में सो जाती थी। लेकिन ड्रैकुला के प्रशंसकों का मानना है कि वह मरा नहीं है। स्टोकर के इस उपन्यास की अब तक लाखों प्रतियां बिक चुकी हैं, और बेला लुगोसी अभिनीत 1931 का फिल्म संस्करण वर्षों तक सुबह के समय टीवी स्क्रीन पर छाया रहा। 1972 के पहले चार महीनों में उपन्यास के डेल पेपरबैक संस्करण के 25,000 प्रतियों के दो पुनर्मुद्रण हुए, और तभी बोस्टन कॉलेज के इतिहास के दो प्रोफेसरों, रेमंड टी. मैकनेली और राडू फ्लोरेस्कू ने इस विषय पर शोध करने की ठानी।


इन प्रोफेसरों ने रोमानिया में ड्रैकुला के वास्तविक जीवन की जांच में वर्षों बिताए और उनके इस शोध ने ड्रैकुला के महान पुनरुत्थान की शुरुआत की। यह इन प्रोफेसरों के प्रयासों का ही नतीजा है कि आज अविनाशी पिशाच पर एक वृत्तचित्र, टाइम इंक की एक सहायक कंपनी द्वारा प्रकाशित होने वाली इन सर्च ऑफ ड्रैकुला नामक एक कॉफी-टेबल बुक, इसी नाम का बच्चों का एक खेल और प्रोफेसरों के शोध के बारे में रोमानिया के ड्रैकुला कंट्री नामक एक फिल्म भी उपलब्ध है।


अपने शोध में प्रोफेसरों ने पाया कि 15वीं सदी के एक रईस व्लाद टेप्स के क्रूर शासन के चलते किसान उसे मानव पिशाच मानते थे। लोग इस छवि से डरने के बावजूद उसे पसंद करते हैं। एशिया से ट्रांसिल्वेनिया चले गए प्राचीन मग्यार बताते हैं कि यह छवि तिब्बती चमगादड़-देवता की पूजा की कहानियों से जन्मी थी। प्रोफेसर मैकनेली और फ्लोरेस्कू कहते हैं कि व्लाद टेप्स ही वह व्यक्ति था, जिसे ब्रैम स्टोकर ने अपनी काल्पनिक रचना के लिए मॉडल के रूप में चुना था। स्टोकर कभी ट्रांसिल्वेनिया नहीं गए, फिर कैसे उन्होंने ड्रैकुला लिखना शुरू किया? प्रोफेसर मैकनेली कहते हैं, 'स्टोकर ने पिशाच की कई कहानियां पढ़ी थीं और अपनी कहानी को आगे बढ़ाने के लिए वह विषय की तलाश कर रहे थे, तभी उनकी मुलाकात हंगरी के प्रसिद्ध विद्वान आर्मिनियस वैम्बरी से हुई। 'वैम्बरी ने स्टोकर को उस अजीब शासक व्लाद टेप्स के बारे में बताया, और वह व्लाद के ड्रैकुला जैसे उपनामों से भी परिचित था। इसके बाद स्टोकर ने ट्रांसिल्वेनियाई अंधविश्वासों के स्रोतों का अध्ययन किया। इसलिए कुछ इतिहास, कुछ लोककथाएं और कुछ भूगोल की कथाओं को मिलाकर स्टोकर ने काउंट ड्रैकुला के ऐतिहासिक चरित्र की कल्पना की।' प्रोफेसर फ्लोरेस्कू कहते हैं, 'कोई भी समकालीन तानाशाह उसकी बराबरी नहीं कर सकता। हमारा अनुमान है कि उसके पीड़ितों की संख्या तकरीबन एक लाख है।'


एक बार जब तुर्किये के एक राजदूत ने कहा कि उसके राजनयिकों का किसी के प्रति सम्मान में अपनी टोपियां उतारने का रिवाज नहीं है, तो व्लाद ने तुरंत अपने सेवकों को तुर्कों के सिर पर कील ठोंकने का निर्देश दिया। एक अन्य मौके पर, उसने अपने क्षेत्र के सभी बीमार और गरीबों को एक बड़ी दावत में आमंत्रित किया और फिर भोज कक्ष में आग लगा दी। उसने इस आधार पर अपने मेहमानों की मौत को उचित ठहराया कि वे बीमार थे।


इन प्रोफेसरों को व्लाद के कारनामों पर इतना भरोसा कैसे हो सकता है, खासकर तब, जब उन्होंने जिन पुरानी पांडुलिपियों का अध्ययन किया, वे व्लाद के क्षेत्र से दूर के देशों में लिखी गई थीं? प्रोफेसर फ्लोरेस्कू कहते हैं, 'यही इसकी खूबसूरती है। ड्रैकुला की किंवदंतियां तीन अलग-अलग स्रोतों से विकसित हुईं, जिनसे हमें प्रत्येक कहानी की दूसरों से तुलना करने में मदद मिली। एक स्रोत जर्मन शरणार्थी भिक्षु थे, जो ट्रांसिल्वेनिया के आतंक से भाग गए थे। हमारे पास मूल ड्रैकुला के बारे में रूसी में भी कहानियां हैं, और फिर बीजांटिन स्रोत भी हैं।' प्रोफेसर मैकनेली कहते हैं, 'इसके अलावा, रोमानिया के ड्रैकुला क्षेत्र में आज भी मौखिक परंपरा मजबूत है। 1969 के आखिर तक हमने पाया कि वही पुरानी कहानियां, जो हमने पांडुलिपि में पढ़ी थीं, आज भी वहां सुनाई जा रही हैं। किसान व्लाद की कहानी से रोमांचित हैं। वह इतना शक्तिशाली व्यक्तित्व था कि उसने कल्पना और तथ्य की मिलावट को प्रेरित किया है। वास्तव में, पहला रूसी ऐतिहासिक उपन्यास (जो तथ्य और कल्पना का मिश्रण है) ड्रैकुला के बारे में था।'


प्रोफेसर फ्लोरेस्कू ने कहा, 'हमें लगता है कि ड्रैकुला का विषय हमेशा से सबसे लोकप्रिय रहा है। हमें फ्रांस और स्विट्जरलैंड के विभिन्न मठों और अभिलेखागारों में ड्रैकुला के बहुत सारे पर्चे मिले हैं।' लेकिन असली ड्रैकुला जब वास्तव में खून नहीं पीता था, तो किसान उसे कैसे पिशाचवाद से जोड़ने लगे? प्रोफेसर मैकनेली कहते हैं, 'पिशाचों में विश्वास 2500 ईसा पूर्व से चला आ रहा है। तिब्बती मठों में पिशाचों के बारे में पांडुलिपियां और चमगादड़ देवताओं को दर्शाने वाले भित्तिचित्र हैं। मेरा मानना है कि मूलतः पूर्वी एशिया से आए मग्यार लोग जब ट्रांसिल्वेनिया में रह रहे थे, तो वे ये कहानियां अपने साथ लेकर आए थे।' प्रोफेसर फ्लोरेस्कू कहते हैं, 'ट्रांसिल्वेनिया पिशाच की पौराणिक कथाओं का गढ़ है। वहां की कहानियां सबसे विस्तृत और अलंकृत हैं, और रोमानियाई में 12 शब्द हैं, जिनका अर्थ पिशाच होता है।' वह आगे कहते हैं, 'जो बात लोगों को व्लाद को पिशाचवाद से जोड़ने के लिए प्रेरित करती है, वह यह है कि उसकी लाश कभी नहीं मिली। वर्ष 1931 में जब एक टीम, जिसमें मेरे चाचा भी शामिल थे, ने उनकी कब्र खोदी, तो वह खाली थी। फिर उन्होंने स्नागोव के द्वीप मठ में खुदाई की और एक अचिह्नित कब्र पाई, जिसके बारे में हमें लगता है कि शायद उसमें ड्रैकुला के अवशेष हो सकते हैं।'
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हॉरर फिल्मों के शौकीन प्रोफेसर मैकनेली बेला लुगोसी की फिल्म देखने और स्टोकर के उपन्यास पढ़ने के बाद ड्रैकुला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में रुचि रखने लगे। उन्होंने कहा, 'पुस्तक क्लुज और बिस्ट्रिटा के शहरों और बोर्गो दर्रे के बारे में बताती है। ये स्थान वास्तव में मौजूद हैं, इसलिए मैंने खुद से कहा, यदि ये स्थान वास्तविक हैं, तो शायद व्यक्ति भी वास्तविक हो।'


उन्होंने रोमानिया, जर्मन, स्लाविक और रूसी स्रोतों की जांच शुरू की, लेकिन 1967 तक उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिली, फिर उन्होंने रोमानिया में जन्मे फ्लोरेस्कू के साथ मिलकर काम किया। दोनों ने मिलकर पूरे रोमानिया में घूमकर असली ड्रैकुला के बारे में सुराग ढूंढ़े। यह अभियान शुरू से ही काफी रोचक था। लिखित अभिलेखों के टुकड़ों को जोड़कर, स्थानीय लोककथाओं को देखकर और मौके पर जांच करके, प्रोफेसरों ने व्लाद टेप्स के बारे में बहुत सारी जानकारी एकत्र की। उन्होंने पाया कि उसने इतनी क्रूरता से शासन किया था कि उससे डरने और घृणा करने वाले किसान उसे पुरानी मग्यार कहानियों के पिशाच देवता के रूप में देखने लगे। ब्रासोव से आप पश्चिम की ओर सिघिसोआरा जा सकते हैं, जो व्लाद टेप्स का जन्मस्थान है, और सिबियु, जहां वह 1454 में रहता था। दक्षिण की ओर बुखारेस्ट के रास्ते पर रोमानिया की पुरानी राजधानी तिरगोविस्टे में ड्रैकुला के महल के अवशेष हैं, जहां हर रात ध्वनि और प्रकाश का प्रदर्शन होता है। पास में ही ड्रैकुला के महल के खंडहर हैं, जो पिटेस्टी के पास आर्गेस नदी के किनारे स्थित हैं। प्रोफेसर फ्लोरेस्कू कहते हैं, 'यह महल भयानक और अजीब है। इसकी खोज मेरे लिए एक ऐसा अनुभव था, जिसका मैं आनंद नहीं ले पाया। किसानों को लगता है कि यह एक बुरी जगह है, और हमें रात में वहां रुकने की हिम्मत नहीं हुई। मेरे चाचा, जिन्होंने ड्रैकुला की खाली कब्र की खोज की थी, उस पर चढ़ते समय लगभग मर ही गए थे। वह एक खाई के किनारे पर फिसल गए और लगभग 100 फुट नीचे गिर गए।' प्रोफेसर मैकनेली ने कहा, 'जब हमने असली ड्रैकुला व्लाद टेप्स और काल्पनिक ड्रैकुला के बीच संबंध स्थापित किया, तो रोमानिया के लोग हैरान रह गए। उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनके लोक नायक और स्टोकर के पिशाच की छवि एक ही है।

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