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दंड देने का यह सही वक्त है: पहलगाम की बर्बरता के बाद सिंधु जल संधि निलंबन पहला कदम, अब सैन्य बलों समेत...

दीपक वोहरा
Updated Sat, 26 Apr 2025 06:51 AM IST

सार

पाकिस्तान से बातचीत का समय अब खत्म हो चुका है। हमने आर्थिक रूप से पाकिस्तान को बिल्कुल पंगु बना दिया है। मुस्लिम जगत के भीतर भी उसे पूरी तरह से अलग-थलग कर दिया है। अब सैन्य बलों समेत हर हथियार से उसे दंड देने का समय है। इस दिशा में सिंधु जल संधि को निलंबित करके पहला कदम उठा लिया गया है।
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पहलगाम में आतंकी हमला - फोटो : पीटीआई


सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने 23 अप्रैल, 2025 को सिंधु जल संधि को निलंबित करने, अटारी सीमा को बंद करने, पाकिस्तान उच्चायोग में सैन्य कर्मचारियों को अवांछित घोषित करने और उन्हें अपने सहायक कर्मचारियों के साथ तुरंत भारत छोड़ने के लिए कहने, सार्क योजना के तहत पाकिस्तानियों के लिए वीजा रद्द करने और पूर्व पाकिस्तानी सैन्य चिकित्सक तहव्वुर राणा के खुलासे पर कार्रवाई करने का फैसला किया, जो 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए नरसंहार का मास्टरमाइंड था और अब अमेरिका से प्रत्यर्पित होने के बाद भारत की हिरासत में है।


आइए, समझने की कोशिश करते हैं कि ऐसा क्यों हुआ। पहली बात, 19वीं सदी के शुरुआती दशकों में, दरवेश आंदोलन के संस्थापक, सोमालीलैंड के सनकी मुल्ला मुहम्मद ने इस्लाम के नाम पर हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। सौ साल बाद पाकिस्तान के सनकी सैन्य प्रमुख मुल्ला मुनीर अपने हजारों सैनिकों को मौत के घाट उतारना चाहता है। वह भारत को परेशान करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन करना चाहता है। 


दूसरी बात, पाकिस्तान कश्मीर की अर्थव्यवस्था के तेजी से पुनरुद्धार से भयभीत है। लाखों राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटक कश्मीर जा रहे हैं। पर्यटन कश्मीर के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 80 फीसदी का योगदान देता है। मैं कुछ समय पहले ही घाटी में था और मेरे टैक्सी ड्राइवर ने बढ़ती मांग पर अपनी खुशी बॉलीवुड का गाना ‘मौजा ही मौजा’ गुनगुनाकर जाहिर की थी। तीसरी बात, इस्लामाबाद अपने चीन स्थित आकाओं को यह दिखाना चाहता है कि उसने भारत-पाकिस्तान मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजरों में वापस ला दिया है, जो भारत-चीन संतुलन पर ध्यान केंद्रित कर रहा था। पहलगाम के आतंकी हमले के बाद दर्जनों वैश्विक नेताओं ने भारत के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के सरगनाओं को ऐसा सबक सिखाने की कसम खाई है, जिसे वे कभी नहीं भूलेंगे, भले ही वे पृथ्वी के किसी भी कोने में भाग जाएं।


वैश्विक आतंकवाद सूचकांक-2024 के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्यों में से 100 से अधिक देश किसी न किसी रूप में आतंकवाद के शिकार हुए हैं। इसलिए मेरे कई अंतरराष्ट्रीय मित्रों का भी कहना है कि आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने पर ही दुनिया का भला होगा। पाकिस्तान के होने से न तो दुनिया को कोई फायदा है और न इसके पतन से कोई नुकसान होगा। इसमें कोई संदेह नहीं है कि पहलगाम हमले के गुनहगार पाकिस्तानी सैनिक थे। पाकिस्तान में सबसे अधिक बेकार लोग हैं, जिनकी कराची और अन्य शहरों में अधिकता है। अशिक्षित, गरीब, दिशाहीन, निराश, नाउम्मीद, घृणा फैलाने वाले मदरसों में शिक्षित युवा, खुशी-खुशी जिहाद के लिए आतंक की राह पर और जन्नत की हूरों की तलाश में निकल पड़ते हैं। पाकिस्तान में बेरोजगारी 50 फीसदी से ज्यादा है। 


अपने बच्चों का पेट भरने में असमर्थ पाकिस्तानी मांएं उन्हें जिहादी बनने के लिए प्रोत्साहित करती हैं, क्योंकि भर्ती करने वाला उन्हें खुद को उड़ाने के लिए पैसे देता है। शिक्षित अभिजात वर्ग मुल्क छोड़कर भाग रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 2024 में लगभग दस लाख लोग मुल्क से पलायन कर गए। अफ्रीका से यूरोप में अवैध रूप से प्रवेश करने के दौरान मरने वालों में सबसे बड़ी संख्या पाकिस्तानियों की होती है। पाकिस्तान के बच्चे शहादत की महिमा सीखते हैं। 


पाकिस्तानी सेना भारत को नुकसान पहुंचाने के लिए आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी को आकर्षक विकल्प के रूप में देखती है। पाकिस्तान की छवि इतनी खराब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की 2015 की भारत यात्रा के दौरान, अमेरिका ने पाकिस्तान को चेतावनी दी थी। तो अब भारत को क्या करना चाहिए? कौटिल्य (चाणक्य) के अर्थशास्त्र के सातवें अध्याय का शीर्षक है-द्वैत नीति से जुड़ी है शांति और युद्ध। द्वैधभाव को समझाते हुए चाणक्य कहते हैं-शांति और संघर्ष को संतुलित करने की दोहरी रणनीति। वह इसके लिए चार कदम सुझाते हैं-साम, दाम, दंड और भेद।
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कौटिल्य ने शासकों को शांति और युद्ध को चुनने से पहले अपनी सापेक्ष शक्ति का मूल्यांकन करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि कमजोरी की स्थिति में दी गई रियायतें निष्फल होती हैं। इसलिए बातचीत का समय अब खत्म हो चुका है। हमने आर्थिक रूप से पाकिस्तान को बिल्कुल पंगु बना दिया है। मुस्लिम जगत के भीतर भी उसे पूरी तरह से अलग-थलग कर दिया है। अब सैन्य बलों समेत हर हथियार से उसे दंड देने का समय है।


इस दिशा में सबसे पहले, हमने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है, जिसके तहत सिंधु प्रणाली का 80 फीसदी पानी पाकिस्तान को आवंटित किया गया था। करोड़ों जिहादी अब अपने आकाओं से पानी की भीख मांग सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमलों के पीछे जो लोग हैं, उन्हें दंडित किया जाएगा, तथा यह भी स्पष्ट किया कि हमले के लिए उकसाने वालों को भी नहीं छोड़ा जाएगा।


खुला संदेश देने के बजाय, हम आतंकवाद का समर्थन करने वाली पाकिस्तानी सेना के रावलपिंडी मुख्यालय को नष्ट करके उसे कमजोर करने के लिए एक गतिशील कार्रवाई करेंगे। मुस्लिम राष्ट्रों सहित विश्व इसका स्वागत करेगा, विशेषकर इसलिए, क्योंकि यह हमला तब हुआ है, जब प्रधानमंत्री मोदी इस्लामी दुनिया में भारत के सबसे अच्छे मित्र सऊदी अरब की यात्रा पर गए थे। उम्मीद है, अब भारत बालाकोट में की गई सर्जिकल स्ट्राइक की तरह कोई बड़ा कदम उठाएगा।  

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