प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस्राइल यात्रा कई मायनों में 'न भूतो, न भविष्यति' जैसी होने वाली है। वहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेत्यान्याहू प्रोटोकॉल तोड़कर हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने पहुंचे। वहीं प्रधानमंत्री मोदी 26/11 के मुंबई हमले में चमत्कारिक ढंग से जीवित बचे यहूदी बालक बेबी मोशे से मिलकर आतंक के विरुद्ध भारत-इस्राइल मैत्री को पुष्ट करेंगे।
भारत से यहूदियों के संबंध दो हजार साल से भी ज्यादा पुराने हैं। उन्हें दुनिया भर में ठुकराया गया, लेकिन भारत ही ऐसा देश रहा, जहां के लोगों ने उन्हें शांति, सम्मान और अपनापन दिया। यहूदियों ने भारतीय नाम, जातिसूचक संज्ञा, विवाह पद्धति के अनेक रूप, भाषा और वेशभूषा अपनाकर एक अद्भुत सम्मिलन का उदाहरण प्रस्तुत किया। बैंक ऑफ इंडिया से लेकर अनेक महत्वपूर्ण संस्थान, पुस्तकालय, अस्पताल, विद्यालय उन्होंने बनाए। बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के नायक लेफ्टिनेंट जे एफ आर जैकब यहूदी थे।
हालांकि 1948 में जन्मे इस्राइल को भारत ने 1952 में मान्यता दी, पर भारतीय मुस्लिमों, कम्युनिस्टों तथा अरबपरस्त विदेश नीति के दबाव में उसे 1992 तक राजनयिक मान्यता नहीं दी गई। इसके बावजूद भारत के प्रति प्रेम और कृतज्ञता के भाव से इस्राइल ने न सिर्फ 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में भारत की सहायता की, बल्कि 1999 के कारगिल युद्ध में जब बोफोर्स तोपों के लिए गोला-बारूद खत्म हो गया, तो प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की ओर से संदेश मिलने पर इस्राइल सरकार ने बिना किसी लिखा-पढ़ी और भुगतान के चौबीस घंटे में गुप्त रूप से बोफोर्स का गोला-बारूद भेज दिया।
आजादी के समय भारत में प्रायः अस्सी हजार यहूदी थे। इस्राइल बनने पर अधिकतर वहां चले गए। अब पांच हजार के लगभग बचे हैं। वे सभी भारत को अपनी मातृभूमि और इस्राइल को अपनी धर्म-भूमि मानते हैं।
आज इस्राइल रक्षा, कृषि, सायबर सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी गुप्त सूचनाओं के आदान-प्रदान एवं टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के क्षेत्र में भारत का सबसे महत्वपूर्ण एवं विश्वसनीय मित्र है। हीरों तथा मोतियों का इस्राइल को सर्वाधिक निर्यात किया जाता है। भारतीय सेना के लिए अत्याधुनिक बराक-1 मिसाइलें, अवाक्स रडार, टैंकभेदी मिसाइलें, मिसाइल प्रतिरोधक रॉकेट लांचर ही नहीं, उससे भी ज्यादा जल संसाधनों के प्रबंधन और कम पानी वाले या रेगिस्तानी इलाकों में कृषि के विकास में इस्राइल हमारा सबसे बड़ा सहायक देश है, जो बेहिचक हर क्षेत्र में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर कर रहा है। हाल ही में डीआरडीओ के साथ रक्षा उत्पादन क्षेत्र में इस्राइल का समझौता आज तक का सबसे बड़ा करार है, जो स्पाइक और बराक-1 मिसाइलों के निर्माण में भारत को सक्षम बनाएगा तथा मेक इन इंडिया के उद्देश्य पूरा करेगा।
भारत में इस्राइल के राजदूत एक वर्ष से प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के लिए गजब की सक्रियता दिखाते रहे-वह सभी मुख्यमंत्रियों, सभी दलों के सांसदों व नेताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों से निरंतर मिले। 2015 में दुनिया के सबसे बड़े यहूदी संगठन ब्रायन ओ ब्रिथ के 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का भारतीय संसद में स्वागत हुआ, जिसकी अध्यक्षता करने का मुझे सौभाग्य मिला।
भारत के हित में अरब देशों के साथ-साथ इस्राइल से मित्रता आवश्यक है-यह सिद्धांत मोदी सरकार ने सफलतापूर्वक स्थापित किया है। इसका भारत की रक्षा, कृषि, जल और शिक्षा नीति पर दूरगामी सकारात्मक असर होगा। उम्मीद है, मोदी इस्राइल यात्रा कर एक नया इतिहास रचेंगे।