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कांग्रेस पर हमले के पीछे

तवलीन सिंह Updated Sun, 11 Feb 2018 07:29 PM IST
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तवलीन सिंह

पिछले सप्ताह संसद में प्रधानमंत्री का कांग्रेस पर आक्रमण देख दिल्ली के तकरीबन सारे राजनीतिक पंडितों ने मान लिया कि नरेंद्र मोदी को एहसास होने लग गया है कि 2019 में उनकी जीत अब उतनी पक्की नहीं, जितनी कुछ महीने पहले तक लगती थी। प्रधानमंत्री दोनों सदनों में बोले और दोनों जगह अपने भाषणों में कांग्रेस का उन्होंने इतनी बार जिक्र किया कि राहुल गांधी संसद के बाहर इतरा कर चलते नजर आए। कांग्रेस के नए अध्यक्ष ने पत्रकारों से कहा कि प्रधानमंत्री को कांग्रेस की बुराइयां गिनाने के बदले अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनानी चाहिए थीं। उनके इस वक्तव्य से प्रेरणा लेकर कांग्रेस प्रवक्ता उस शाम की टीवी चर्चाओं में योद्धा का रूप धारण किए दिखे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की चूंकि उपलब्धियां हैं ही नहीं, इसलिए वह कांग्रेस पर हमला बोलने को मजबूर हुई है। क्या नरेंद्र मोदी वास्तव में डर गए हैं?



भेड़चाल से खुद को अलग रखना मेरी आदत है, सो इन टीवी चर्चाओं के बाद यह लेख लिखने से पहले मैंने एकांत में विचार किया और इस नतीजे पर पहुंची हूं कि प्रधानमंत्री को शायद एहसास होने लग गया है कि भाजपा शासित राज्यों में जितना परिवर्तन और विकास होना चाहिए था, उतना हुआ नहीं है। जिन क्षेत्रों में हुआ है, वह ग्रामीण सड़कों के निर्माण में और स्वच्छ भारत अभियान में हुआ है। मोदी के कार्यकाल में मैंने ऐसे कई गांव देखे हैं, जहां खुले में शौच करना पूरी तरह बंद हो गया है और जहां गांववालों ने सरकारी सहायता लेकर निजी शौचालयों में निवेश किया है। रही बात ग्रामीण सड़कों की, तो यहां भी परिवर्तन मैंने अपनी आंखों से देखे हैं।


लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में परिवर्तन का अभाव दिखता है। ग्रामीण स्कूल आज भी ज्यादातर ऐसे हैं, जहां अध्यापक आते भी हों, तो पढ़ाई केवल नाम के वास्ते होती है। ‘असर’ ने हाल में अपने सर्वेक्षण में पाया कि सरकारी स्कूलों में चौदह साल के बच्चे न ठीक से पढ़ सकते हैं, न ही बुनियादी गणित का उनको ज्ञान है। सरकारी स्कूलों में यह बीमारी पुरानी है, फिर भी सवाल उठता है कि जहां परिवर्तन की इतनी सख्त आवश्यकता है, वहां यह आया क्यों नहीं। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों का सरकारी स्कूलों से भी बुरा हाल है। सो कुछ दिन पहले जब प्रधानमंत्री ने विश्व की तथाकथित सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना घोषित की, तो स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पूछा कि क्या निजी अस्पतालों में भी जाने की इजाजत होगी। स्थिति यह है कि गरीब से गरीब लोग निजी अस्पतालों में इलाज करवाने को मजबूर हैं, क्योंकि सरकारी अस्पतालों का हाल बहुत बुरा है। आयुष्मान भारत योजना द्वारा एक वर्ष में पांच लाख रुपये की चिकित्सा उपलब्ध करवाने का प्रावधान है, लेकिन जब अच्छे सरकारी अस्पताल हैं ही नहीं, तो वे लोग इसका लाभ कैसे उठा पाएंगे, जो निजी अस्पतालों में इलाज करवाने का सपना भी नहीं देख सकते?


क्या प्रधानमंत्री को इन क्षेत्रों में परिवर्तन का अभाव दिखने लगा है? क्या यही मुख्य कारण था कांग्रेस पर उनके हमले का? इनका जवाब जो भी हो, नरेंद्र मोदी को आक्रमण करना ही है, तो अपने मुख्यमंत्रियों पर करना चाहिए, जिन्होंने सत्ता संभालने के बाद उसी तरह सरकार चलाई है, जैसे कांग्रेसी मुख्यमंत्री चला रहे थे दशकों से। 2019 में नरेंद्र मोदी अगर हारते हैं, तो मुख्य दोष उनके इन मुख्यमंत्रियों का होगा।

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