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आचार संहिता का दायरा

अवधेश कुमार Published by: Raman Singh Updated Wed, 10 Apr 2019 05:58 PM IST
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अवधेश कुमार

हर चुनाव में आचार संहिता को लेकर कुछ घटनाएं सुर्खियां बनती हैं और उन पर व्यापक चर्चा होती है। मौजूदा चुनाव में ऐसी तीन घटनाएं सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। इनमें पहली है, राज्यपाल कल्याण सिंह द्वारा स्वयं को भाजपा का कार्यकर्ता बताते हुए नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए काम करने की बात करना। दूसरा, नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार द्वारा कांग्रेस की न्याय घोषणा की आलोचना। और तीसरा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा एक सभा में भारतीय सेना को मोदी जी की सेना कहना। बसपा प्रमुख मायावती द्वारा मुसलमानों से वोट देने की अपील आचार संहिता के साथ जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आएगी। हम तीन प्रमुख घटनाओं की ही चर्चा करेंगे, जिन पर चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया और अपना फैसला भी कर दिया है। विपक्षी पार्टियां इसे मुद्दा बना रही हैं, पर उनका स्वयं का आचरण भी चुनावी माहौल को निर्मल बनाए रखने वाला नहीं कहा जा सकता है। उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'खूंखार आतंकवादी' कहना। ऐसे और भी उदाहरण हैं, जो आचार संहिता के उल्लंघन की श्रेणी में आते हैं, लेकिन जब तक चुनाव आयोग स्वतः संज्ञान नहीं लेता या उसके यहां शिकायत नहीं की जाती, तब तक ये सामान्य वक्तव्य ही बने रहेंगे।



कल्याण सिंह के मामले में चुनाव आयोग का फैसला है कि उन्होंने आचार संहिता का उल्लंघन किया। चूंकि राज्यपाल एक सांविधानिक पद है, इसलिए आयोग ने कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति के यहां मामला भेज दिया है। सूचना है कि राष्ट्रपति ने इसे गृह मंत्रालय को अग्रसारित कर दिया है। इस तरह कल्याण सिंह के मामले पर फैसला मोदी सरकार को करना है।


कल्याण सिंह जब जयपुर से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित अपने निवास पर आए, तो वहां के भाजपा कार्यकर्ताओं ने स्थानीय भाजपा उम्मीदवार के विरुद्ध प्रदर्शन किया, उसके पुतले तक जलाए। कल्याण सिंह सार्वजनिक तौर पर उनसे मिलने से बचते रहे। किंतु जब वे बाहर निकले तो काफी लोग जमा थे। उन्होंने अपनी गाड़ी रोकी और उनसे बात करते हुए कह दिया कि हम सब भाजपा के कार्यकर्ता हैं। इस समय हम सब चाहते हैं कि मोदी जी फिर प्रधानमंत्री बनें एवं उसके लिए काम करना हमारा कर्तव्य है।


ध्यान रखने की बात है कि चुनाव आयोग ने आदित्यनाथ से यह नहीं कहा है कि आपने आचार संहिता का उल्लंघन किया है या नहीं। आयोग ने कहा है कि सेना हमारी और देश की रक्षा करती है। इसका चरित्र अराजनीतिक है। इसलिए बड़े पद पर बैठे होने के कारण बोलते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि हर हाल में सेना का अराजनीतिक चरित्र बना रहे। राजीव कुमार को भी आयोग ने कहा कि आगे से इस तरह का बयान देने से बचना चाहिए। इस तरह दोनों को आयोग ने नसीहत देने तक अपने को सीमित रखा है। इसका मतलब यह हुआ कि चुनाव आयोग को भी इनमें सीधे आचार संहिता का उल्लंघन नहीं दिखा है, लेकिन परोक्ष तौर पर इसके मायने स्वच्छ चुनाव प्रक्रिया की दृष्टि से अच्छे नहीं हैं।

 

चुनाव आयोग अधिकतर मामले में चेतावनी देता है और इससे ही यह मुद्दा बन जाता है। इसका असर भी होता है। कई बार आयोग ने आचार संहिता के उल्लंघन के दायरे में आने वाले बड़े नेताओं को भी कुछ दिनों के लिए सभा करने से वंचित किया है। हां, आयोग को मुकदमा दर्ज कराने के लिए भारतीय दंड संहिता का सहारा लेना पड़ता है। मुकदमे में भारतीय दंड संहिता की उन धाराओं का उल्लेख होता है, जिसके तहत संबंधित नेता का आचरण अपराध की श्रेणी में आता है। जो अपराध की श्रेणी में नहीं आते, उन मामलों में आयोग के हाथ बंधे हुए हैं।

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