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पेड़ों का पढ़ना देखा है कभी!

Sat, 30 Mar 2013 11:10 PM IST
ज्यून तकामी
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हर एक टहनी पर एक फूल
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झपकी आ गई
और मैंने देखा एक सपना
 
हर पेड़ की
हर टहनी पर
खिला हुआ है एक फूल

जैसे खिला हो मन
इस दुनिया में
हर किसी का।


टहनियों की कंपकपाहट

वहां
शिखर पर
थरथरा रही हैं पत्तियां
जैसे कांप रही हों हवा में

या हो सकता है
आ बैठा हो कोई पंछी
उनकी छाया में

कोमल टहनियों की यह
अनायास धुकधुकी
आतंक और आवेश से
कांपता है मेरा मन।

ताजा हरियाली

एक बार
खिड़की से
बगीचे में झांकते हुए
अचानक मैंने छू लिया
कुछ जीवों का
जीवन।

अविचल पेड़

बहते समय के पार
समय शाश्वत दिखाई देता है
बहते बादलों के पार
नीला आकाश

बादल चलते रहते हैं
आकाश रहता अचल
हवा चलती रहती है
पेड़ अविचल।

जापानी कविता में ‘प्रोलेतेरियन कविता’ नामक आंदोलन की शुरुआत की थी। अपने उपन्यासों को लेकर भी चर्चा में रहे। 1971 से लगातार दिया जाने वाला 'ज्यून तकामी पुरस्कार' जापान के साहित्यिक क्षेत्रों में सबसे बड़ा पुरस्कार समझा जाता है। यह कविताएं उनके कविता-संग्रह ‘पेड़ों का स्कूल’ से। अनुवाद किया है-अनिल जनविजय ने।
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