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हिंदी भी कोई पढ़ने की चीज है

Thu, 12 Sep 2013 08:08 PM IST
मूलचंद गौतम
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एक जमाना था, जब बीए पार्ट वन में जनरल इंग्लिश में सत्तर प्रतिशत विद्यार्थी फेल होकर पढ़ाई छोड़ बैठते थे। तब कंपार्टमेंट या सप्लीमेंटरी का लाभ भी बहुत कम छात्रों को ही मिलता था। भला हो उत्तर प्रदेश सरकार का कि देश के विशालकाय आगरा विश्वविद्यालय में कुलपति के रूप में बालकृष्ण राव की नियुक्ति की। उन्होंने जनरल इंग्लिश के स्थान पर हिंदी भाषा का विकल्प देकर गरीब ग्रामीण छात्रों को अंग्रेजी में फेल होने के आतंक से मुक्त कर दिया। इससे हिंदी के अध्यापकों की संख्या में भी वृद्धि हुई।
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अब गरीब जनता का स्तर उठ गया है। हालात उलट गए हैं। नतीजतन बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा समिति के संयोजक हिंदी के प्रोफेसर मुरारीलाल का मुंह लटक गया है, क्योंकि उनकी रोजी-रोटी खतरे में पड़ गई है। ज्यादातर छात्र-छात्राओं ने आवेदन पत्र में डबल इंग्लिश ली है। नकल से पास हुए इन छात्रों के चेहरे-मोहरे से इंग्लिश की बू-बास तक नहीं आती। लिटरेचर को लिटलेचर कहने वाले ये भावी कलक्टर हिंदी सहपाठियों और अध्यापकों को जिस हिकारत से देखते हैं, वह नाकाबिल-ए-बर्दाश्त है। हिंदी की क्लासों में मुर्दनी छाई रहती है। शर्म के मारे कोई किताब तक नहीं लाना चाहता कि कोई पूछ न बैठे कि घर की मुर्गी हिंदी भी कोई पढ़ने की चीज है। हिंदी का अखबार पढ़ना अब बेइज्जती है।

मुरारीलाल के लड़कों ने घर में अंग्रेजी का अखबार लगा लिया है। हिंदी के अखबारों में वैवाहिक विज्ञापन तक गरीब-स्तरहीन और घटिया लोगों के छपते हैं, जिनके पास दहेज में कार तक देने की औकात नहीं है। और तो और, एमए हिंदी लड़की को कोई शादी के लायक नहीं मानता, क्योंकि उसकी काबिलियत मात्र इतनी है, जितनी पहले चिट्ठी या रामायण पढ़कर सुना देने वाली लड़की की हुआ करती थी। अलबत्ता प्राइमरी स्कूल में मास्टरनी हो, तो उसके बारे में सोचा जा सकता है।
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डबल इंग्लिश न हुई, दवा की डबल डोज हो गई। अब बच्चों के नाम तक डब्बल रखे जा रहे हैं, वे हों भले ही सिंगल। बसें तो डबल डेकर पहले ही हो गई हैं। कॉन्वेंटों में तो हिंदी बोलना तक निषिद्ध है-जुर्माना देना पड़ेगा। इसीलिए बिना टाई के पढ़ने वाले बच्चे जाहिलों में गिने जाने लगे हैं। टाट-पट्टी वाले स्कूल उन्हीं के लिए हैं, जो फीस नहीं भर सकते और मिड डे मील खाकर मरने को मजबूर हैं। निज भाषा जब उन्नति के बजाय अवनति का कारण बन जाए, तो कौन पढ़ेगा उसे!
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