सिक्के के दो पहलुओं से संबंधित प्रचलित मुहावरा तमिल सिनेमा और तमिलनाडु की राजनीति पर शत-प्रतिशत खरा उतरता है, क्योंकि पिछले पांच दशक से भी ज्यादा समय से तमिल फिल्मोद्योग राज्य को मुख्यमंत्री देता आ रहा है। उदाहरण देखें-सीएन अन्नादुरई, एम करुणानिधि, एम जी रामचंद्रन, वी एन जानकी और जे जयललिता। इन सभी मुख्यमंत्रियों की जड़ें सिनेमा में थीं। सिर्फ यही नहीं, कई लोकप्रिय फिल्म सितारे ने राजनीति में हाथ आजमाया, जिनमें से कई 'ब्लॉकबस्टर्स' बने, कुछ 'औसत' रहे, तो कुछ 'बुरी तरह फ्लॉप' साबित हुए। फिलहाल दो दशक से ज्यादा की चुप्पी और रहस्य को खत्म करते हुए तमिल सिनेमा के सुपरस्टार रजनीकांत ने बीते दिनों घोषणा की कि वह राजनीति में प्रवेश कर रहे हैं और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले एक नई पार्टी बनाएंगे। इस घोषणा मात्र से तमिलनाडु की राजनीति में मानो भूचाल आ गया और इसने पूरे देश और विदेश का ध्यान आकर्षित किया। विदेशी अखबारों ने भी खबरें प्रकाशित कीं।
सवाल यह है कि आखिर रजनी राजनीति में क्यों आए? उनके अपने ही शब्दों में, 'यह मौजूदा हालात की मांग है। मैं राजनीति में पैसे या प्रसिद्धि के लिए नहीं आ रहा हूं। आप सबने पहले ही मुझे ये सब चीजें पर्याप्त रूप से दी हैं। यहां राजनीति बहुत भ्रष्ट हो गई है। लोकतंत्र खतरे में है। पिछले एक साल से तमिलनाडु की राजनीति ने लोगों का सिर शर्म से झुका दिया है। अन्य राज्यों के लोग हम पर हंस रहे हैं। अब भी अगर मैंने राजनीति में प्रवेश करने का फैसला नहीं लिया और जिन लोगों ने मुझे आजीविका दी, उनकी लोकतांत्रिक साधनों से सेवा नहीं की, तो यह दोष मुझे मृत्यु तक कचोटता रहेगा। सब कुछ को बदलना होगा। अब राजनीतिक परिवर्तन का समय आ गया है। व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है। ईमानदार और पारदर्शी, धर्म और जाति से स्वतंत्र, आध्यात्मिक राजनीति-यही मेरा इरादा, आकांक्षा और लक्ष्य है।'
रजनीकांत ने अपने अनुयायियों से अपने प्रशंसकों के संगठन में ज्यादा से ज्यादा लोगों को पंजीकृत कराने की अपील की और पंजीकरण प्रक्रिया को आसान एवं प्रभावी बनाने के लिए एक वेबसाइट और मोबाइल ऐप लॉन्च किया। आने वाले दिनों में वह और भी कई घोषणाएं करेंगे।
जैसे ही 'थलाइवर' (नायक-जिस नाम से उनके प्रशंसक उन्हें बुलाते हैं) अपनी योजना के साथ आगे बढ़े, तमिलनाडु के राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक से लेकर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी द्रमुक और अन्य छोटी-छोटी पार्टियों तक-सबने रजनीकांत की घोषणा पर प्रतिक्रिया दी। हालांकि कई लोगों ने प्रकट तौर पर स्वागत किया, लेकिन यह समझने वाली बात है कि रजनी के राजनीति में प्रवेश से राजनेता प्रसन्न नहीं हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वह उनकी संभावनाओं में ग्रहण लगा देंगे।
राजनीतिक विश्लेषक एस जयगणेश कहते हैं, 'निश्चित रूप से रजनी तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा बदलाव लाएंगे। लगता है कि उन्होंने उचित जमीनी तैयारी के बाद घोषणा की है। वह युवाओं और महिलाओं का वोट झटकेंगे। जयललिता के निधन और करुणानिधि के रिटायरमेंट के बाद उपजे शून्य को भरने के लिए रजनीकांत से बेहतर कोई नहीं है।'
रजनीकांत की आध्यात्मिक राजनीति के वायदे पर वह कहते हैं, 'रजनी ने स्वयं ही कहा है कि आध्यात्मिक राजनीति का मतलब ईमानदार, वास्तविक और नैतिक राजनीति है। पिछले दशकों में कई राजनेताओं ने कई तरह के वायदे किए। इसलिए हमें यह देखने के लिए प्रतीक्षा करनी चाहिए कि रजनी क्या करने जा रहे हैं।' कुछ तबकों के इन आरोपों पर कि रजनी को हिंदुत्ववादी ताकतों (भाजपा और संघ) का समर्थन मिल रहा है, तमिल समर्थक कार्यकर्ता शशि कुमार कहते हैं, 'रजनीकांत ने अपने ऐप के प्रतीक के रूप में बाबा मुद्रा को चुना है। वह हिंदूवाद में गहरी आस्था के लिए जाने जाते हैं और हमें संदेह है कि वह तटस्थ रहेंगे। पर हम चाहते हैं कि कोई तमिल ही हम पर शासन करे।'
भले ही प्रतिक्रियाओं में अंतर हो, लेकिन रजनी के प्रशंसक एकजुट हैं। जबसे उन्होंने घोषणा की है, उनके प्रशंसकों ने, जो अब तक अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े थे, अपने संगठनों से बाहर निकलकर रजनी के आंदोलन से जुड़ने की इच्छा व्यक्त की है। त्रिपलिकेन के शिवा कहते हैं, 'हम 1995 से ही थलाइवर के राजनीति में आने का इंतजार कर रहे हैं। चूंकि वह राजनीति में आने से हिचकिचा रहे थे, सिर्फ इसलिए हम अन्य पार्टियों के सदस्य बन गए। अब उन्होंने राजनीति में कदम रखा है, तो क्यों नहीं हमें उनके साथ होना चाहिए? हम थलाइवर की पार्टी में शामिल हो रहे हैं।' कोयंबटूर में रजनी फैन्स क्लब के प्रसिडेंट नागराजन एम कहते हैं कि वह रजनीकांत के प्रशंसकों और आम लोगों को पार्टी कार्यकर्ता बनाने का काम शुरू कर चुके हैं। रजनीकांत के प्रशंसकों को उम्मीद है कि वह सत्ता पर कब्जा जमाएंगे और लोगों को सुशासन प्रदान करेंगे, जिसमें लोककल्याण के पूरे उपाय होंगे, मगर भ्रष्टाचार का नामोनिशान नहीं होगा।
गांधिया मक्काल इयाक्कम के प्रमुख तमिलरुवि मनिअण, जिन्होंने रजनीकांत के राजनीतिक निर्णय और रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, कहते हैं कि सुपरस्टार महात्मा गांधी के अनुयायी हैं। गांधीवाद आध्यात्मिक राजनीति की वकालत करता है। आध्यात्मिकता सांप्रदायिकता से अलग है। जो सांप्रदायिक हैं, वे किसी खास धर्म का पक्ष लेते हैं, लेकिन जो आध्यात्मिक हैं, वे उनसे अलग होते हैं। वह आगे कहते हैं, आध्यात्मिकता का मतलब है, सबको प्यार से गले लगाना। इसलिए आध्यात्मिक राजनीति समय की मांग है। इससे भ्रष्टाचार, गलती और अपराध को प्रश्रय नहीं मिलेगा।
अंत में रजनीकांत की फिल्म के दो मशहूर संवाद से मैं इस आलेख को खत्म करता हूं- कोई नहीं जानता कि मैं कब और कैसे आऊंगा, लेकिन मैं सही समय पर आऊंगा। और, अगर मैं देर से भी आऊंगा, तो नई रणनीति के साथ आऊंगा।